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नेशनल डॉक्टर्स डे पर विशेष :जहां जन्म लिया वहीं बना ली कर्मभूमि, अब सेवा के संकल्प के साथ जुटे

रावतभाटा15 दिन पहले
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  • शहर के अस्पतालों में तत्परता से सेवाएं दे रहे डॉक्टर, बोले- नसीब वालों को ही मिलता है ऐसा मौका
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यह नसीब वालों को ही मिलता है कि जहां जन्म लिया वही कर्म भूमि बने। रावतभाटा में कभी एक-दो डॉक्टर ही हुआ करते थे। वह भी रावतभाटा में कार्यरत नहीं  थे। कोरोना के इस काल में मेडिकल और डॉक्टर  की अहमियत और बढ़ गई है। इस शहर में ऐसे कुछ डॉक्टर हैं। जिनकी जन्म भूमि भी रावतभाटा है और कर्म भूमि भी रावतभाटा  है। मातृभूमि का कर्जा चुकाने और सेवा के संकल्प के साथ जुटे डॉक्टरों से, डॉक्टर्स डे पर हमने जाना। 

डॉ. जीजे परमार : रिटायरमेंट के नजदीक, फिर भी उसी जोश से सेवा
रावतभाटा के ब्लॉक सीएमएचओ डॉ जीजे परमार   अपने मधुर व्यवहार के लिए जाने जाते हैं। जन्मभूमि शिक्षा रावतभाटा में कहीं और कर्मभूमि भी रावतभाटा में बनी। रिटायरमेंट की उम्र पारकर 61 साल में पहुंच चुके हैं लेकिन वही जोश और उमंग के साथ जन्म भूमि का कर्जा उतारने में जुटे हुए हैं।

डॉ. अनिल जाटव : सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधारी, अभी सेवा में तत्पर
रेफरल अस्पताल रावतभाटा के प्रभारी अनिल जाटव ने सरकारी अस्पताल की दुर्दशा को बदलकर यह दिखा दिया है कि सरकारी अस्पताल उत्कृष्ट भी हो सकते हैं। उनकी जन्मभूमि रावतभाटा में रही शिक्षा भी परमाणु ऊर्जा केंद्रीय विद्यालय में हासिल की। पिता परमाणु बिजली घर में कार्यरत थे। आज पत्नी के साथ रेफरल अस्पताल में नियुक्त हैं। आप चाहे की रिटायरमेंट तक रावतभाटा में जन्म भूमि का कर्म क्षेत्र से सेवा कर कर्जा उतार दें ।
डॉ. मनोवीर सिंह : रोगियों की सेवा ही पहला धर्म
शहर में हड्डी रोग विशेषज्ञ के रूप में प्रसिद्ध डॉक्टर मनोवीर सिंह की जन्मभूमि, शिक्षा रावतभाटा में रही है। उन्होंने शहर में पहले विशेषज्ञ अस्पताल के रूप में सेवा पिछले 8 सालों से पहले शुरू की थी। आज रावतभाटा में किसी भी दुर्घटना होने पर सुविधा रावतभाटा में मिल जाती है। इसका श्रेय उनको जाता है। पिता परमाणु बिजली घर में रिटायर इंजीनियर हैं। उनकी डॉक्टर पत्नी बबीता रानी स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं वह भी साथ में सेवा दे रही है। रावतभाटा में कर्म भूमि बनाने के पीछे उनका उद्देश्य ही था कि इस शहर का जन्म का कर्जा चुका सकें। 
डॉ. मनीष लाहोटी:  जन्मभूमि में नियुक्ति पर गर्व है 
सरकारी अस्पताल में पहली नौकरी रावतभाटा में मिली तो डॉक्टर मनीष लाहोटी को इस बात का गर्व हुआ कि मातृभूमि में काम करने का अवसर मिला। आज शहर में सुविधा युक्त अस्पताल संचालित कर रहे हैं। यह भी बड़ी बात है कि उनके पिता डॉक्टर बी डी लाहोटी की कर्म भूमि रावतभाटा रही है। उसके बाद उनकी पत्नी  डॉक्टर नीतू लाहोटी सरकारी अस्पताल में नियुक्त है।बेटी शिवांगी एमबीबीएस की पढ़ाई अंतिम वर्ष में कर रही है। 

डॉ. मनोज श्रृंगी: जन्मभूमि से की कॅरियर की शुरुआत
रेफरल अस्पताल में युवा डॉक्टर मनोज श्रृंगी सामान्य परिवार से आते हैं, लेकिन उनको गर्व है कि जन्मभूमि से ही कैरियर की शुरुआत की। रेफरल अस्पताल में रात दिन सेवा देने वाले डॉ त्रिलोक मधुर व्यवहार के धनी हैं। बचपन से ही यही सोचा था कि अपने ही शहर में लोगों की सेवा करेंगे।
डॉ. कुलदीप सिंह : दंत रोग विशेषज्ञ से मिली खास पहचान
राजस्थान परमाणु बिजलीघर में दंत रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कुलदीप सिंह शहर का जाना माना चेहरा है। पिता इसी अस्पताल में नियुक्त थे । डॉ.कुलदीप बताते हैं समर्पण, लगाव बचपन से ही शहर से था। बस इसीलिए जन्मभूमि को ही कर्मभूमि बनाया । आज गर्व होता है कि लोगों की सेवा कर पा रहे हैं। रावतभाटा में ही शिक्षा हासिल की। डॉक्टर बनकर कर पहली नियुक्ति रावतभाटा नहीं मिली और यहां काम कर गर्व होता है। 
डॉ. शशिकांत वर्मा : बचपन से चाहते थे रावतभाटा में काम करना
परमाणु बिजली घर के अधिकारी रणजीत वर्मा के पुत्र डॉ शशिकांत वर्मा को रावतभाटा का वर्क कल्चर बचपन से ही पसंद था । यहां लोगों की मिलनसार प्रवृत्ति, पर्यावरण के नैसर्गिक सौंदर्य से ओतप्रोत रावतभाटा में काम करने का मन बचपन से ही था। यही कारण है कि 2011 में  कैगा कर्नाटक में नियुक्ति मिली और 4 साल बाद ही रावतभाटा आने पर गर्व महसूस हुआ।

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