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नगरपालिका:करोड़ों की संपति पर बनी 25 दुकानों का मिल रहा कम किराया,

डीडवाना8 दिन पहले
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  • डीडवाना नगरपालिका की दुकानों का नहीं मिल रहा है राजस्व

नगर पालिका में लम्बे समय से देखा जा रहा है कि जिसकी प्रदेश में सरकार होती है उसी पार्टी का पालिका बोर्ड पर कब्जा रहता हैं और सरकार जाने के बाद उस पार्टी का बोर्ड कुछ समय तक रहता है व नई सरकार के गठन के साथ ही पालिका बोर्ड पर उसी पार्टी का कब्जा हो जाता है परन्तु आज तक किसी भी पालिका बोर्ड में पालिका की सम्पति को लेकर कोई गहन विचार नहीं किया गया। हालांकि 1995 में भाजपा बोर्ड ने जरूर एक फेरवाड़ी की सम्पति को नीलाम किया था मगर उसके बाद आज तक किसी भी बोर्ड द्वारा सम्पति को सुरक्षित करने की चेष्टा नहीं की गई।

वर्तमान में पालिका ईओ द्वारा सरकारी सम्पतियों पर तारबंदी कर बोर्ड लगाने की कार्यवाही की गई, जिसमें बेशकीमती जमीनें है परन्तु पालिका की करोड़ों की लागत से बनी हुई दुकानों का किराया अब तक किसी ने नहीं बढ़ाया और पूर्व न्यूनतम दर के आधार पर किराया चल रहा हैं। डीडवाना पालिका के अधीनस्थ नगर के प्रमुख हृदय स्थल बाजार में यानी नागौरी गेट के आस-पास 14 छोटी-बड़ी दुकानें हैं जिनकी बाजार दर कम से कम 10 करोड़ के आस-पास की हैं और यही हाल बस स्टैण्ड पर स्थित 11 दुकानों का है जिनकी बाजार दर कम से कम 8 से 10 करोड़ हैं। इन सभी दुकानों का वार्षिक किराया यानी 25 दुकानों का वार्षिक किराया केवल मात्र 58 हजार 444 रू. हैं।

जिसमे कम से कम दर की दुकान 80 व 85 रुपये मासिक किराए की है तो अधिक से अधिक किराए की दुकान 200 या 250 तक की हैं। इसके अलावा बस स्टैण्ड के पास ही एक भारत पेट्रोल पम्प की भूमि भी एक हजार रुपए मासिक यानी 12 हजार रुपए वार्षिक दर पर हैं जो 2027 तक लीज पर दिया हुआ हैं। इस प्रकार पालिका को 70 हजार 444 रुपए की वार्षिक आय इस बेशकीमती सम्पति से हो रही हैं।

अगर इन दुकानों का बाजार दर में किराया लिया जाता है तो 2 लाख 50 हजार रुपए मासिक किराया हो सकता है परन्तु दुर्भाग्य की बात है कि आज तक किसी भी पालिका बोर्ड या फिर पालिका प्रशासन ने इसमें पहल नहीं की। जो किराया वर्षों से चल रहा है वहीं लिया जा रहा हैं। पालिका प्रशासन एवं पालिका बोर्ड की इस बड़ी लापरवाही से विभाग को लाखों ही नहीं बल्कि करोड़ों का नुकसान हो रहा हैं।

पालिका प्रशासन अगर चाह तो बोर्ड की मीटिंग में प्रस्ताव पारित करवाकर किराए में बढ़ोतरी कर सकता है या फिर संबंधित दुकानदारों को ही बाजार दर या डीएलसी दर में बेचान कर सकता है या फिर दुकानें खाली करवाकर उन्हें नीलाम कर सकता है मगर ऐसा कुछ नहीं हो रहा और मिली भगत का स्पष्ट नमूना देखने को मिल रहा हैं। विधायक चेतन डूडी ने इस संदर्भ में बताया कि सम्पूर्ण तथ्यात्मक रिपोर्ट लेकर पालिका की संपति को बचाया जाएगा।

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