बारिश फसलों के लिए अमृत, तो कोहरा जहर:मावठे की बारिश से रबी की फसल को फायदा, लेकिन 6 दिन से छाए कोहरे से गेहूं और सरसों को नुकसान

कुचामन6 दिन पहले
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जिले भर में एक सप्ताह में हुई मावठे की बरसात से नागौर के सिंचित और असिंचित दोनों ही क्षेत्रों में रबी फसल को फायदा हुआ है। किसान मानते हैं कि मावठे के कारण फसलों को जो पानी मिला है, वह उनके लिए अमृत के समान साबित हुआ है।

लेकिन बीते 6 दिनों से आसमान में बादल छाए बादल किसानों के लिए चिंता बने हुए है। अगर कुछ दिन और बादल छाए रहे, तो किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्योंकि इससे मेथी में छाछिया और सरसों में मोयला कीट का प्रकोप बढ़ सकता है।

सिंचित क्षेत्र के किसानों को ज्यादा चिंता

कृषि विशेषज्ञों की माने, तो बादलों से सिंचित क्षेत्र के किसान को ज्यादा समस्या हो सकती है। क्योंकि मेथी और रायड़ा यानी रबी की यह दोनों फसलें सिंचित क्षेत्र में ही होती है। बादलों के छाए रहने से सबसे ज्यादा नुकसान भी इन दो फसलों को हो सकता है।

बादलों के बने रहने से इन दोनों फसलों में छाछिया और मोयला कीट के प्रकोप की आशंका बनी हुई है।

पाला पड़ने की आशंका बढ़ी

किसानों ने बताया कि तेज सर्दी के कारण पाला पड़ने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता। मौसम को देखते हुए पाला पड़ने की आशंका अधिक बनी हुई है। ऐसे में अगर पाला पड़ता है, तो यह भी फसलों के लिए नुकसानदायी हो सकता है।

किसानों को होगा फायदा और नुकसान

कृषि विभाग के सहायक निर्देशक पन्ना लाल जाट का कहना है कि प्रकृति के इस बदलते हुए मौसम को देखते हुए किसानों को फायदा और नुकसान दोनों हो सकता है। 5 जनवरी से लगातार हुई बारिश से किसानों को काफी फायदा हुआ है। खासतौर से सुखा क्षेत्र में बोई हुई फसलें जैसे- चना, सरसों, गेहूं, तारामीरा, इसबगोल और जीरा।

नुकसान की बात करें, तो बदलते मौसम में बारिश के साथ ओलावृष्टि हो तो फसलों को काफी नुकसान होता है। कोहरे के कारण फसलों पर बर्फ की बूंदें जम जाती है। इससे निजात पाने के लिए फसल क्षेत्र में अनावश्यक चीजें जलाना चाहिए। ताकि धुएं से खेत में कोहरे का असर कम देखने को मिलेगा।

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