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मकराना की बेटी ने बढ़ाया मान:पीएम बोले- आप उस जगह से आई हैं, जहां आरस की खदानें हैं, आपने खुद को भी संगमरमर की तरह तराश यह मुकाम पाया है

मकराना2 महीने पहले
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  • 10 आईएएस से मोदी की बात, शुरुआती शब्द, मकराना से रूचि आई है ना, पहले उनसे बात करवाएं
  • दस आईएएस प्रशिक्षु अफसरों से वीडियो कांफ्रेंसिंग में प्रधानमंत्री ने सबसे पहले रुचि से की बात, संगमरमर को भी सराहा

संगमरमर नगरी मकराना की बिटिया रूचि बिंदल पुत्री राजकुमार बिंदल हाल ही में भारतीय सिविल सेवा में चयनित होने के बाद आईएएस का प्रशिक्षण ले रही है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों से वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए संवाद किया।

इस दौरान संवाद कार्यक्रम शुरू होते ही प्रशिक्षु अंशुमान कामेला से प्रधानमंत्री का संवाद कायम करने के लिए नाम बोला गया, जिसमें प्रधानमंत्री ने टोकते हुए सर्वप्रथम रूचि बिंदल से बात करवाने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि आरस (संगमरमर) के क्षेत्र से आई रूचि है ना, उससे बात करवाएं। रूचि ने सोचा प्रधानमंत्री उनसे सवाल कर रहे हैं जिस पर उसने कहा कि वह सवाल ढंग से सुन नहीं पाई। जिस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आपसे सवाल नहीं कमेंट कर रहा हूं। आप उस जगह से आई हैं जहां आरस की खदानें हैं। आरस को तराशते तराशते आप इस मुकाम तक पहुंची है। इसके लिए आपमें विशेष योग्यता है, यह मैं मानता हूं।

संगमरमर को वैदिक व संस्कृत में आरस कहते हैं, मोदी ने संगमरमर के लिए आरस शब्द का इस्तेमाल कर इसके वैदिक मूल्य बताए

मालूम होवे संगमरमर को वैदिक व संस्कृत में आरस कहा जाता है। प्रधानमंत्री ने इशारों ही इशारों में विश्व प्रसिद्ध मकराना के संगमरमर की सराहना की। आरस की खदानों से निकले संगमरमर को पूरे विश्व में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारों में लगाया जाता है, जिसके चलते यह काफी पवित्र व आस्था की नजर से देखा जाता है।

प्रधानमंत्री का संगमरमर के लिए शब्दकोष से आरस शब्द का चयन कर रूचि को प्रोत्साहित किए जाने से यह भी प्रतीत होता है कि वे मकराना संगमरमर खनन क्षेत्र के लिए काफी अच्छी व सकारात्मक व्यक्तिगत सोच रखते हैं। मालूम होवे रूचि बिंदल ने मकराना से शिक्षा अर्जित की, जबकि उच्च शिक्षा व आईएएस की तैयारी दिल्ली से की।
प्रशिक्षु रूचि ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा, आपदा बचाव के क्षेत्र में पारंपरिक प्रथाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत

प्रशिक्षुु आईएएस रूचि ने पीएम से कहा कि हमारे ट्रेडिशनल ज्ञान कोष में ऐसी प्रथाएं व सुविधाएं है जिन्हें आगे बढ़ाते हुए प्राकृतिक आपदाओं से बच सकते हैं व उनका पूर्व अनुमान लगा सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अरूणाचल प्रदेश की एक आदिवासी जाति चीटियों के चलने की दशा से बता देती है कि कब बाढ़ आने वाली है।

मकराना क्षेत्र की एक बावड़ी का हवाला देते हुए बताया कि उसमें पानी भरने से लोग अनुमान लगा वहां से सुरक्षित स्थान के लिए निकल जाते हैं। पीएम ने कहा कि अफसर परंपरागत मान्यताओं को कोडिंग-मेपिंग कर डिजिटल एनालिसिस करें।

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