कार्यक्रम आयाेजन:झील से वाहन गुजरते हैं तो विदेशी मेहमान पक्षियों को नहीं मिलता भोजन : अरविंद

नावां16 दिन पहले
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अमृत महोत्सव के तहत आयोजित कार्यक्रम में मौजूद अधिकारी व नमक उद्यमी। - Dainik Bhaskar
अमृत महोत्सव के तहत आयोजित कार्यक्रम में मौजूद अधिकारी व नमक उद्यमी।
  • पंचायत समिति में गुरुवार को अमृत महोत्सव के वेटलैंड सेलिब्रेशन वीक के तहत आयाेजन

शहर के पंचायत समिति सभागार में गुरुवार को आजादी के अमृत महोत्सव के वेटलैंड सेलिब्रेशन वीक के तहत नमक उद्यमियों के साथ सांभर झील वेटलैंड भूमि के पर्यावरण संरक्षण एवं इससे जुड़े कानूनी विषय पर परिचर्चा का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें सर्वप्रथम प्रदूषण नियंत्रण विभाग से रिजनल ऑफिसर अरविन्द कुमार ने नमक उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि वेटलैंड भूमि के रुप में सांभर झील की एक अलग ही पहचान है।

उन्होंने कहा कि जहां वेटलैंड भूमि होती है वहां आस पास क्षेत्र में बाढ़ आने की संभावना खत्म हो जाती है तथा झील में पानी की आवक नहीं रुकनी चाहिए। पानी की आवक रुकने की स्थिति में वेटलैंड भूमि कुछ समय पश्चात डेजर्ट में बदल जाती है। अरविन्द कुमार ने नमक उद्यमियों से झील क्षेत्र में इण्डस्ट्रीज का वेस्टेज व अन्य कचरा नहीं डालने की अपील की। उन्होंने कहा कि कचरा व वेस्टेज डालने से पक्षियों के लिए खतरा उत्पन्न होता है।

इसीलिए झील में पर्यावरण प्रदूषण, पानी प्रदूषण नहीं पहुंचने के साथ ही अपशिष्ट भी नहीं डालना चाहिए। इस अवसर पर नमक उद्यमी राजेश गोयल ने कहा कि सांभर झील में पंजाब, हरियाणा, अजमेर, पुष्कर का पानी भी आता था लेकिन जगह जगह ऐनीकेट बनने से पानी की आवक रुक गई। इसीलिए पानी की आवक बढ़े इसकी ओर ध्यान देना चाहिए।

बैठक में उपखण्ड अधिकारी ब्रह्मलाल जाट, राजस्थान नमक रिफाइनरी एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल गट्टानी, सचिव नवरंगलाल अग्रवाल, योगेश गुप्ता, दीपक अग्रवाल, संदीप जोशी, लोकेश गोयल, सी.पी अग्रवाल, अजय अग्रवाल, अमित बेरीवाल सहित अन्य नमक उद्यमी मौजूद थे। बैठक में अध्यक्ष अनिल गट्टानी ने बताया कि झील से नमक उत्पादन कार्य लगभग सात सौ पचास साल पुराना है। पहले बंजारा जाति के लोग उसके पश्चात अंग्रेज व सांभर साल्ट की ओर से नमक उत्पादन किया जाता था। फिर धीरे धीरे व्यापारियों की ओर से नमक उत्पादन किया जा रहा है।

वाहनों के गुजरने से पक्षियों को नहीं मिल पाता भोजन-

प्रदूषण विभाग के अधिकारी अरविन्द कुमार ने नमक उद्यमियों से अपील करते हुए कहा कि झील में पानी सूखने के पश्चात झील परिसर से नमक से भरे ट्रेक्टर भी नहीं निकलने चाहिए। क्योंकि झील सूखने के साथ ही धरातल पर एलगी आ जाती है। झील में बारिश के पानी की आवक शुरु होने के साथ ही यह एलगी पक्षियों के लिए भोजन बन जाती है।

उसी भोजन के लिए विदेशी पक्षी हजारों कोष की यात्रा कर सांभर झील में आते है। इसीलिए वाहन नहीं गुजरने चाहिए। क्योंकि जितनी दूरी से वाहन व ट्रैक्टर गुजरते है वहां पक्षियों के भोजन के लिए एलगी खत्म हो जाती है। नमक उद्यमियों को पक्षियों के भोजन व सुरक्षा की ओर भी ध्यान देना चाहिए।

फास्ट ट्रेक से झील में रुकेगी पानी की आवक, पुलिए से भी अवरोध

कार्यक्रम के दौरान नमक उद्यमी विष्णु गोयल ने कहा कि सांभर झील में जो फास्ट ट्रेक बनाया गया है इससे झील में पानी की आवक रुकेगी। यह ट्रेक झील में पानी की आवक का अवरोध बनेगा तथा ट्रेक में जो पुलिए बनाए गए है उनसे झील में पानी की आवक नहीं हो सकती है।

ऐसे में इस वेटलैंड भूमि का संरक्षण व पक्षियों की सुरक्षा कैसे हो पाएगी। इस ट्रेक से जब ट्रेन गुजरेगी तो उसकी तेज आवाज से भी पक्षियों को नुकसान होगा। इस पर अरविन्द कुमार ने उच्च अधिकारियों से इस मुद्दे पर चर्चा करने की बात कही।

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