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हाथ से फिसला ऑक्सीजन प्लांट:लाडनूं में बनना था 1000 ली. प्रति मिनट क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट

नागौरएक महीने पहले
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ऑक्सीजन प्लांट का प्रस्तावित फोटो। - Dainik Bhaskar
ऑक्सीजन प्लांट का प्रस्तावित फोटो।
  • आठ जिलों में 16 जगह बनने थे, लाडनूं सहित 11 प्लांट अटके

देशभर में ऑक्सीजन की कमी के शोर-शराबे के बीच खबर आई थी कि लाडनूं में 1000 लीटर प्रति मिनट की उत्पादन क्षमता का मेडिकल ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट लगेगा। इसकी सारी तैयारियां हो चुकी थी। जगह तक चिह्नित हो गई थी। इस प्लांट को यहां लाने के लिए सांसद हनुमान बेनीवाल लगातार केंद्र के संपर्क में थे।

सांसद के प्रयास सफल भी हुए लेकिन जब 6 मई को काम शुरू होना था तो अधिकारियों को मौखिक आदेश पर इसका काम अटक गया। इससे पूरे जिले में मायूसी है क्योंकि यदि ये बन जाता तो ऑक्सीजन का संकट बिल्कुल नहीं रहता।

प्रदेश के 8 जिलों के 16 चिकित्सा संस्थानों में भारत सरकार द्वारा ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाने थे जिसमें सांसद हनुमान बेनीवाल एक लाडनूं में लाने में सफल रहे लेकिन अब निर्माण अटक गया है। कलेक्टर और एनएचएआई की टीम ने यहां मौका मुआयना करके इसके लिए जमीन तक का निर्धारण कर लिया था और नक्शे वगैरह भी बन चुके थे।

लेकिन ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण शुरू नहीं किया जाना पूरे जिले के लिए धक्का लगने वाली बात लग रही है। अब जयपुर, सीकर और जोधपुर में एक-एक और कोटा में दो ऑक्सीजन प्लांट प्रथम फेज में स्वीकृत हुए हैं। इनमें लाडनूं को छोड़कर अन्य स्थानों पर मंजूरी हो जाने के बाद यहां इस पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं।

डीआरडीओ व एनएचएआई के जिम्मे है कार्य, 6 मई को शुरू होना था काम, अब अटका
यह प्लांट भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अन्तर्गत गठित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा लगाया जाना था। इस प्लांट के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर का सिविल एवं इलेक्ट्रिक का काम राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआईए) द्वारा करवाया जाना था।

एनएचआईए टीम द्वारा यहां प्रशासन के साथ अस्पताल परिसर में प्लांट के लिए स्थान चिह्नित किया जा चुका था। यहां 30 गुणा 20 फीट में इसका ढांचा तैयार होना प्रस्तावित था। एनएचआईए ने पूरा प्लान तैयार करके मुख्यालय को भिजवाया, जिसकी स्वीकृति मिलते ही आगामी 7 दिनों की अवधि में पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर बनकर तैयार कर देने की बात थी।

इसके बाद डीआरडीओ द्वारा यहां पर प्लांट स्थापित किया जाना था, परन्तु अभी इसके आगे की प्रगति अटकी हुई है। अब अधिकारी यह कह रहे हैं कि इसे आगे के चरण में लिया जाएगा लेकिन संशय है।

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