शहादत को न्याय का सलाम:25 वर्ष पुराना भूमि विवाद एक घंटे में सुलझाया

नागौर2 महीने पहले
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14 अक्टूबर 1995 को नागौर जिले के गोटन थाने में कार्यरत हैड कांस्टेबल हरसौर निवासी मोहम्मद मनवर आलम बदमाशों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे। शहीद परिवार इस घटना से उबरा ही नहीं था कि हरसौर के आदर्शनगर बाईपास पर स्थित चल रहे भूमि विवाद की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन में उक्त बेशकीमती जमीन का कुर्की आदेश रिलीज कर दिया।
उस समय शहीद के महज ढाई वर्षीय पुत्र परवेज आलम को शौर्य चक्र व मेडल के सम्मान की बजाय कुर्की का तमगा मिला।
फाइलों में दफन हो गए कुर्की आदेश
1997 से शहीद परिवार एवं मिदीयान निवासी प्रभुराम के बीच प्रकरण चल रहा था। गम और मासूमियत के इन वर्षों में कुर्की से संबंधित दस्तावेज फाइलों में दफन हो गए। 23 सालों बाद दोनों पक्षों ने उपखंड कार्यालय से कुर्की आदेश के दस्तावेजों को खंगाला तो कुछ नहीं मिला। भूखण्ड को लेकर 2019 में शहीद पुत्र परवेज आलम ने न्यायालय की शरण ली।

दो वर्षों तक न्यायालय के चक्कर काटने के उपरांत इन दिनों मामला थांवला थाने पहुंचा। एसएचओ हीरालाल ने केस स्टडी कर दोनों पक्षों को थाने बुलाया तथा 25 वर्षों से चले आ रहे विवाद को महज 1 घंटे की मशक्कत के बाद सुलझा दिया।

न्याय पाकर शहीद के पुत्र ने परिवार के साथ थानाधिकारी हीरालाल का साफा एवं माला पहनाकर स्वागत भी किया। इस दौरान प्रकरण के निस्तारण के दौरान शहीद पुत्र परवेज आलम, प्रभुराम डूडी, बाबु खा दायमा, जलालुद्दीन देशवाली, भंवराराम चोपड़ा मौजूद रहे।
विश्वसनीयता बनाए रखने की जरूरत
पुलिसकर्मियों पर सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी होती है। एक तरफ पुलिस अपराधियों से निपटती है तो दूसरी तरफ आम जनता को न्याय दिलाने का काम भी करती है।
हीरालाल, एसएचओ थांवला।

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