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  • 33 Lakh Children Of 5 Years Could Not Go To School For One And A Half Year After Admission; Millions Of Children Will Not Get Preprimary Education; Expert Said There Will Be An Effect On The Ability Of Children To Learn And Understand

33 लाख बच्चों ने एडमिशन के बाद नहीं देखा स्कूल:कोरोना काल में बच्चों को नहीं मिली प्री-प्राइमरी एजुकेशन, सिर्फ मोबाइल की स्क्रीन से मिल रहा ज्ञान

नागौर3 महीने पहलेलेखक: मनीष व्यास
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कोरोना संकट के चलते पिछले डेढ़ साल में सबसे ज्यादा असर नौनिहालों की पढ़ाई पर हुआ है। कई ने तो स्कूल का ज्ञान सिर्फ मोबाइल की स्क्रीन पर ही देखा है। इसके चलते उनकी सीखने, समझने से लेकर शारीरिक, बौद्धिक क्षमता पर भी विपरीत असर पड़ा है।

पूरे प्रदेश में 5 वर्ष की आयु वाले पहली कक्षा के 33 लाख 11 हजार 826 बच्चे ऐसे हैं, जिनका स्कूलों में पहली कक्षा में दाखिला तो हुआ लेकिन वो स्कूल नहीं जा पाए। आंकड़ों के मुताबिक 2019-20 में प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में 16 लाख 95 हजार 584 बच्चों को कक्षा एक में दाखिला दिलाया गया था। 2020-21 में यह आंकड़ा 16 लाख 16 हजार 242 रह गया, यानी 2020-21 में बच्चों को उनके परिजनों ने कोरोना के डर से स्कूलों में कम दाखिला दिलाया।

सत्र 2019-20 व 2020-21 मिलाकर 5 वर्ष की आयु वाले पहली कक्षा के जयपुर संभाग में सबसे ज्यादा 7 लाख 91 हजार 274 बच्चे इसी प्रकार जोधपुर संभाग में 6 लाख 24 हजार 37 बच्चे, अजमेर संभाग में 4 लाख 57 हजार 186 बच्चे, उदयपुर संभाग में 4 लाख 56 हजार 32 बच्चे, बीकानेर संभाग में 3 लाख 68 हजार 825 बच्चे, भरतपुर संभाग में 3 लाख 67 हजार 726 बच्चे और कोटा संभाग में सबसे कम 2 लाख 46 हजार 746 बच्चे ऐसे हैं, जिनका स्कूलों में पहली कक्षा में दाखिला तो हुआ लेकिन वो स्कूल नहीं जा पाए।

जयपुर में सबसे ज्यादा बच्चों ने लिया पहली कक्षा में प्रवेश

सत्र 2019-20 व 2020-21 मिलाकर 5 वर्ष की आयु वाले पहली कक्षा के जयपुर जिले में सबसे ज्यादा 3 लाख 48 हजार 690 बच्चे, जोधपुर जिले में 1 लाख 95 हजार 590 बच्चे, अलवर जिले में 1 लाख 66 हजार 464 बच्चे, नागौर जिले में 1 लाख 65 हजार 65 बच्चे और बाड़मेर जिले में 1 लाख 55 हजार 847 बच्चे ऐसे हैं, जिनका स्कूलों में पहली कक्षा में दाखिला हुआ।

प्रतापगढ़ जिले में सबसे कम बच्चों ने लिया पहली कक्षा में दाखिला

सत्र 2019-20 व 2020-21 मिलाकर 5 वर्ष की आयु वाले पहली कक्षा के प्रतापगढ़ जिले में सबसे कम 39 हजार 316 बच्चे, जैसलमेर जिले में 42 हजार 416 बच्चे, सिरोही जिले में 50 हजार 767 बच्चे, बूंदी जिले में 50 हजार 667 बच्चे और बारां जिले में 52 हजार 404 बच्चे ऐसे हैंं, जिनका स्कूलों में पहली कक्षा में दाखिला हुआ।

उधर, स्कूलों में दाखिला लेने के बाद ऑनलाइन क्लास ले रहे बच्चों की सोचने, समझने और सीखने की क्षमता पर असर पड़ा है। परिजनों से लेकर शिक्षक और मनोचिकित्सक तक ये मानते हैं कि स्कूल में क्लास में बैठकर पढ़ाई न कर पाने से बच्चों में अनुशासन गड़बड़ा रहा है और वे वह सब सीख, समझ नहीं पा रहे हैं, जो स्कूल कि क्लास में बैठकर सीखते थे।

प्री प्राइमरी एजुकेशन से वंचित हो रहे लाखों बच्चे

3 से 5 साल के बच्चों को प्री प्राइमरी एजुकेशन की व्यवस्था है। इसकी बदौलत बच्चे को स्कूल कल्चर के अनुकूल बनाया जाता है और उसमें पढ़ाई के प्रति ललक जगाई जाती है। कोरोना के चलते सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव इन्हीं 3 से 5 साल तक के बच्चों पर पड़ने वाला है। कोरोना काल के दौरान लाखों 3 से 5 साल तक के बच्चे प्री प्राइमरी एजुकेशन की उम्र को पार कर चुके हैं। ऐसे में अब उन्हें प्री प्राइमरी एज्यूकेशन से वंचित होना पड़ सकता है।

ऑनलाइन में दिक्कत

  • स्क्रीन से पढ़ना मुश्किल होता है, बच्चे ज्यादा समय तक एक जगह नहीं बैठते।
  • ऑनलाइन पढ़ाई में केवल बुक्स को फॉलो करते हैं। बच्चों को स्कूल का माहौल नहीं दिया जा सकता।
  • बच्चे का मूल्यांकन संभव नहीं है। बच्चों को दिया जाने वाला होमवर्क चैक करने में दिक्कत होती है।
  • टीचर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते। बच्चे भी पढ़ाई को गंभीरता से नहीं लेते।
  • स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों को आंखों से जुड़ी समस्याएं भी होती हैं।

माता-पिता बच्चों को समय दें

चाइल्ड एजुकेशन एक्सपर्ट सीताराम जांगीड़ का कहना है कि बच्चों के सीखने की प्रक्रिया 8 साल की उम्र तक बहुत तेज होती है। डेढ़ साल से स्कूल न जा पाने के कारण उनकी सीखने, समझने की क्षमता पर विपरीत असर पड़ा है। इससे ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे उन्हें ज्यादा समय दें, उनके साथ खेलें। पढ़ाएं भी और उन्हें कहानी भी सुनाएं।

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