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  • 43% Moong Of Rajasthan Is Produced In Nagaur Alone, The Pulses Here Are Being Supplied In Patanjali, Reliance, Tata And Big Bazaar.

मिट्टी उपजे हरा सोना:राजस्थान का 43% मूंग अकेले नागौर में पैदा होता है, यहां की दालें पतंजलि, रिलायंस, टाटा व बिग बाजार में हो रही सप्लाई

नागौर16 दिन पहले
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नागौर की मिट्टी हरा सोना उगल रही है। हर साल प्रदेश का 40 से 45 फीसदी मूंग उत्पादन ( राजस्थान में 8.80 लाख मैट्रिक टन ) अकेले नागौर में होता है। गत पांच सालों में हर वर्ष यहां औसत 6.22 लाख हैक्टेयर में मूंग फसल की बुआई हुई है और 4.40 लाख टन मूंग का औसत उत्पादन भी हुआ है।

वर्तमान समर्थन मूल्य 7755 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से नागौर में उत्पादित 4405940 क्विंटल मूंग की कीमत 34.25 अरब बैठती है। हमारे मूंग और उसकी दाल प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आसाम, दिल्ली, गुजरात सहित कई राज्यों में सप्लाई होती हैं। नागौर मूंग दाल का हब बन चुका है।

दरअसल, जिले में हर साल औसत 11 से 12 लाख हैक्टेयर में किसान मूंग, मोठ, ज्वार, ग्वार और तिल जैसी खरीफ फसलों की बुआई करते हैं। इनमें 5 से 7 लाख हैक्टेयर के बीच, यानी 50 फीसदी बुआई अकेले मूंग फसल की ही होती है।

इस बार जिले में 11.82 लाख हैक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई हुई है। जिसमें से 4.88 लाख हैक्टेयर में किसानों ने केवल मूंगों की बुआई की है। नागौर जिला प्रदेश में मूंग उत्पादन में पहले स्थान पर है। इसी का नतीजा है कि वर्ष 2021-22 के दौरान प्रदेश के 47.85 फ़ीसदी मूगों की खरीद समर्थन मूल्य पर अकेले नागौर जिले के 13,524 किसानों से 274100.5 क्विंटल हुई थी।

उप रजिस्ट्रार जयपाल गोदारा बताते हैं कि इस दौरान प्रदेश के 29,620 किसानों से 572715 क्विंटल मूंगों की एमएसपी पर खरीद की गई थी। यानी प्रदेश में 4 अरब 16 करोड 65 लाख रुपए के मूंग एमएसपी पर खरीदे गए थे, जिसमें से एक अरब 99 करोड़ 41 लाख के मूंग की अकेले नागौर से खरीद हुई।

खारे पानी से होती है मूंग की बुवाई : नागौर जिले में वैसे तो लगभग पूरी मूंगों की खेती ही बारिश पर ही टिकी है। साथ ही यहां कृषि वैज्ञानिकों द्वारा क्षारीय मिट्टी व पानी के अनुकूल मूंग की उन्नत हाईब्रिड बीज जीएएम फाइव सहित अन्य किस्में भी विकसित की है। इसका फायदा यहां के ट्यूबवैल से खेती करने वाले किसानों को मिला है।

नागौर में सालाना 34.25 अरब का होता है मूंग का कारोबार

60% : जिले के लोग कृषि पर आधारित हैं। यहां के किसानों को अपनी मिट्टी से इतना प्रेम है कि वे अपने अन्य कामों के बीच सुबह-शाम खेत के लिए जरूर समय निकालतेे हैं।

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