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  • 47 Years Ago, 19 Hours A Day Labor Had To Be Done In Iron Factory For 4 Rupees, Today One Of The Most Talked About MLAs Of The State

मजदूर से MLA बने मुरावतिया:47 साल पहले कारखाने में 13 रुपए में 19 घंटे काम किया, 68 की उम्र में बॉडी पहलवान जैसी

नागौर6 महीने पहलेलेखक: मनीष व्यास
विधायक रूपाराम मुरावतिया। 

राजस्थान के नागौर जिले की मकराना सीट से विधायक रूपाराम मुरावतिया रविवार को अपनी एक फोटो सोशल मीडिया पर शेयर कर चर्चा में आ गए। जिसमें उन्होंने लिखा कि उन्होंने तकरीबन 10 सालों तक लौहे के कारखाने में मजदूरी की। उन दिनों 1974 में उन्हें 13 रुपए रोजाना मिलता था और 19 घंटे तक काम करना पड़ता था।

इसके साथ मुरावतिया ने अपनी एक फोटो भी शेयर की। इसमें उन्होंने अपनी 47 साल पुरानी और आज की फोटो पोस्ट की है। दोनों ही फोटों में MLA मुरावतिया फिट दिख रहे हैं। जो 68 साल की उम्र में भी फिट हैं। जो रोज योग के साथ पुशअप्स भी लगाते हैं। फुटबॉल खेलते हैं। अनूठे अंदाज और सुरीली गायकी के चलते प्रदेश भर में चर्चाओं में बने रहते है। भास्कर ने मुरावतिया से ही उनकी कहानी जानी..

MLA रूपाराम मुरावतिया ने भास्कर को बताया कि उन्होंने तक़रीबन 10 सालों तक लौहे के कारखाने में मजदूरी की। 1974 में उन्हें 13 रुपए रोजाना मिलता था। 19 घंटे तक काम करना पड़ता था। यहीं उन्होंने मार्बल कटिंग की देशी मशीनें बनानी सीखी।

हमेशा से फुटबॉल खेलने के शौकीन रहे रूपाराम मुरावतिया।
हमेशा से फुटबॉल खेलने के शौकीन रहे रूपाराम मुरावतिया।

11वीं पास रूपाराम ने खुद बना दी मार्बल कटिंग मशीन
रूपाराम महज 11वीं पास थे, लेकिन साल 1976 में राजस्थान वित्त निगम से उन्होंने 1.25 लाख रुपए का लोन लेकर मार्बल कटिंग की देशी मशीन बनाने का काम शुरू किया। इस देसी मशीन को बनाने में उन्हें लगभग 2 साल लगे। 7 जुलाई 1978 को इसका शुभारंभ कर दिया गया। इसके बाद साल 1984 में खुद का लोहे का वर्कशॉप शुरू कर लिया।

मार्बल काटने की अपनी मशीन और साथियों के साथ रूपाराम मुरावतिया (नीचे बच्चे को गोद में लिए)
मार्बल काटने की अपनी मशीन और साथियों के साथ रूपाराम मुरावतिया (नीचे बच्चे को गोद में लिए)

उन्होंने बताया कि ये मशीन उस समय की मार्बल चीरने की सबसे अच्छी मशीन थी। इसमें मार्बल चीरने के लिए बजरी, पानी एवं लोहे की पत्तियों का इस्तेमाल होता था। 11वीं पास रूपाराम की बनाई गई 110 डायमंड और गैंगसा मशीनों से देश भर में मार्बल कटिंग का काम हुआ।

मुरावतिया स्कूली दिनों में भी दो बार स्टूडेंट प्रेसिडेंट बने। स्कूली संसद में वो प्रधानमंत्री भी रहे। बड़े होकर दिग्गज किसान नेता नाथूराम मिर्धा के समर्थक बन पॉलिटिक्स में आ गए। एक-दो बार मकरना सीट से विधायकी का टिकट भी मांगा, लेकिन मिला नहीं। साल 1993 में रूपाराम ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर MLA का नामांकन दाखिल कर दिया। जीत भी गए। इसके बाद साल 2018 के चुनावों में इस बार वो दुबारा बीजेपी से MLA चुने गए।

मेहनत ने रखा फिट और तंदुरूस्त, अब योग और फुटबॉल सेहत का सहारा
MLA रूपाराम मुरावतिया ने बताया कि वो अपने जीवन में कभी भी जिम में नहीं गए। न ही कोई नियमित कसरत की। वे संघर्ष के दिनों में की गई मेहनत और ग्रामीण परिवेश के चलते फिट हैं। आर्थिक स्थिति थोड़ी ठीक होने और MLA बनने के बाद अब नियमित योग और फुटबॉल खेलकर सेहत को मेंटेन रख रहा हूं।

परिवार के साथ विधायक मुरावतिया (बीच में)
परिवार के साथ विधायक मुरावतिया (बीच में)

68 साल के MLA मुरावतिया पुश अप लगाते हैं, विधानसभा में तेजा गायन भी कर चुके
मकराना विधायक रूपाराम मुरावतिया 68 साल की उम्र में भी पुशअप लगाते हैं। पिछले दिनों कुछ ग्रामीण युवाओं के साथ पुशअप और उनके साथ दौड़ लगाते हुए भी उन्होंने एक वीडियो बनाया था। उनकी संगीत में भी रूचि है। वे विधानसभा में तेजा गायन भी कर चुके हैं। भजन संध्या और कार्यक्रमों में भजन गाते हैं।