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लापरवाही:5 साल पूर्व हाईवे पर लगा था नियम विरुद्ध टावर, अधिकारी सिर्फ 1 नोटिस देकर भूले

नागौरएक महीने पहले
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  • अब अधिकारी बोले-जांच कराएंगे, ऐसे राजमार्ग पर टावर नहीं लग सकते

नियम कायदों को ताक पर रख मनमर्जी से एक कंपनी ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-89 की भूमि पर मोबाइल टावर लगाने का मामला सामने आया है। हालांकि यह टावर कुछ साल पहले लगाया गया था, लेकिन वर्ष 2015 मार्च में इस जीबीएम टावर को हटाने के लिए संबंधित कंपनी के खिलाफ राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर से पत्र भी लिखा गया था लेकिन यह महज एक औपचारिकता ही था।

इसके बाद से पूरा मामला ठंडे बस्ते में है। सार्वजनिक निर्माण विभाग राष्ट्रीय उच्च मार्ग, खण्ड नागौर के अधिकारियों ने कथित मिलीभगत से मामले को फाइलों में ही दबा दिया है। शहर के बीकानेर फाटक के पास सरस डेयरी की चारदीवारी से सटे राष्ट्रीय राजमार्ग की भूमि पर लगाए गए टावर की वजह से हादसों की भी आशंका हर वक्त बनी रहती है। इसके बावजूद अधिकारियों ने इस और ध्यान नहीं दिया है।

अब हालत ये है कि उक्त मामला विभाग की फाइलों में ही दफन होकर रह गया है। जानकारों के अनुसार कई अधिकारियों को तो उक्त प्रकरण के बारे में जानकारी तक नहीं हैं। इसके अलावा मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग पर टावर के लगे हाेने के बावजूद इस ओर अभी तक किसी का ध्यान नहीं है। इसके चलते पूरा मामला ठंड़े बस्ते में ही पड़ा हुआ है।

बीच सड़क से 75 मी. दूर लगाने का नियम पर बिना पूछे 13 मी. पर लगा दिया

सार्वजनिक निर्माण विभाग राष्ट्रीय उच्च मार्ग खण्ड नागौर के तत्कालीन अधिशाषी अभियंता सीबी खुड़ीवाल ने 8 मई 2015 को रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के अधिकृत हस्ताक्षरी राजीव गुप्ता को एक नोटिस दिया, जिसके मार्फत राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-89 (नागौर-बीकानेर-अजमेर सेक्शन) के किमी 166/117.40 पर सरस डेयरी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग प्रशासन की बगैर अनुमति से लगाए गए जीबीएम मोबाइल टावर को हटाने के लिए कहा था लेकिन यह टावर आज तक नहीं हटा और यह पहला और आखिरी पत्र था, इसके बाद कोई पत्र व्यवहार तक नहीं हुआ।
विभाग के अधिकारियों ने सर्वे तक नहीं किया :
राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़क सीमा में टावर लगाने के लिए विभाग के इंजीनियर के साथ संयुक्त सर्वे करके टावर लगाने के लिए स्थान चिन्हित कराने के लिए भी कहा गया था, लेकिन कंपनी के किसी भी प्रतिनिधि ने स्थान चयन के लिए संयुक्त सर्वे के लिए उपस्थिति नहीं दी थी। यह बात विभाग के अधिकारियों ने उस समय संबंधित कंपनी के अधिकारियों को भी लिखित रूप से बताई थी।
इस तरह उड़ाई नियमों की धज्जियां : राष्ट्रीय राजमार्ग-89 के प्रभारी सहायक अभियंता ने 24 मार्च 2015 को प्रस्तावित साइट का निरीक्षण भी किया गया। इसमें पाया कि राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़क सीमा में कंपनी ने विभाग को बताए बगैर ही बगैर किसी सूचना व अनुमति के टावर लगा दिया गया जो सड़क की मध्य रेखा से 12.75 मीटर की दूरी पर पाया गया। जबकि नियमानुसार राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़क सीमा में सड़क मध्य से कम से कम 75 मीटर की जगह छोड़कर ही कोई व्यावसायिक निर्माण किया जा सकता है।

वह भी विभाग की पूर्व अनुमति से होता है। जानकारों के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़क सीमा में किसी भी तरह का निर्माण हाईवे पर संचालित यातायात के लिए खतरनाक होता है। इसके अलावा यह अवैध निर्माण की श्रेणी में भी आता है।
तत्काल हटाने की कार्रवाई होती है :
इस तरह के निर्माण को दी कन्ट्रोल ऑफ नेशनल हाईवेज (लैंड एण्ड ट्रैफिक) एक्ट 2002 (नं. 13 आफ 2013) एवं दी हाईवेज एडमिनिस्ट्रेशन रूल्स-2003 के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग प्रशासन की ओर से तत्काल हटाने की कार्रवाई की जाती है।

नोटिस देकर हटवाएंगे, बिना अनुमति गलत
बगैर स्वीकृति के लगा है तो जांच करवांएगे। साथ ही संबंधित को लिखा जाएगा कि उन्होंने किसकी स्वीकृति से टावर लगाया है। कोई भी राजमार्ग की जमीन पर इस तरह टावर नहीं लगा सकता है। नियमानुसार अनुमति के बाद भी बीच सड़क से 75 मीटर दूर लगाया जा सकता है, उससे कम नहीं।
मुकेश शर्मा, अधिशाषी अभियंता, सानिवि राष्ट्रीय उच्च मार्ग खण्ड नागौर

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