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  • 60 Lakh Demands Were Not Given For Repair Of MCH Wing 3 Years Ago, Now 1.5 Crore Is Needed Otherwise New Will Have To Be Made For 5 Crores

जेएलएन की मातृ एवं शिशु विंग जर्जर:MCH विंग की मरम्मत को 3 साल पहले 60 लाख मांगे... नहीं दिए, अब डेढ़ करोड़ चाहिए अन्यथा 5 करोड़ में नई बनानी होगी

नागौरएक महीने पहले
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लेबर रुम के बाहर प्लास्टर गिरा तो उसके ऊपर प्लाई लगा दी। - Dainik Bhaskar
लेबर रुम के बाहर प्लास्टर गिरा तो उसके ऊपर प्लाई लगा दी।

जेएलएन में एमसीएच विंग में घटिया निर्माण सामग्री की जांच एसीबी को सौंपने के तीन साल बाद भी अब तक न कोई नतीजा आया और न ही कोई सुनवाई है। नतीजतन दरकी हुई छत्त और दीवारों से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। पूरी तरह से जर्जर हो चुके एमसीएम विंग भवन में करीब 250 से 300 महिलाएं उपचार के तहत रहती है। वहीं इस विंग की न मरम्मत हो रही है और न ही मरीजों की जान के साथ खेलने वाले ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई। न ही जिम्मेदार इसको खाली करवाकर अन्य बिल्डिंग में शिफ्ट कर रहे है।

इधर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बिल्डिंग की मरम्मत के लिए तीन साल पहले 60 लाख रुपए का बजट मांगा गया था, जो अब तक नहीं मिला। अब बजट बढ़कर डेढ़ करोड़ रुपए तक जा पहुंचा। ऐसे में अब भी बजट नहीं मिला तो सरकार को पांच करोड़ रुपए में नई बिल्डिंग बनानी पड़ेगी।

बता दें कि जेएलएन अस्पताल की एमसीएच विंग की मरम्मत के कार्य के मामले में तीन कलेक्टर बदले जा चुके है। जिनमें पहले कुमारपाल गौतम, दूसरे दिनेश कुमार यादव, तीसरे जितेंद्र सोनी व अब पीयुष समारिया कलेक्टर के पद पर है। लेकिन कलेक्टर समारिया भी कागज ही भिजवाने में जुटे है। दूसरी ओर जेएलएन अस्पताल के तीन पीएमओ भी बदल चुके है।

परदे में रहने दो... जहां से प्लास्टर उखड़ रहा वहां जिम्मेदार लगा रहे प्लाई

​​​​​​​कई जगह से गिर रहे प्लास्टर, दीवारों में भी आई दरारें : जेएलएन अस्पताल परिसर में एमसीएच विंग का भवन हादसे को निमंत्रण दे रहा है। शुरू से ही विवादों में रहे इस भवन में आई बड़ी-बड़ी दरारें कभी भी एक बड़े हादसे में तब्दील हो सकती है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ रहे है। यहां ड्यूटी कर रहे चिकित्सकों एवं नर्सिंगकर्मियों को डर सताने लगा है।

एसीबी की जांच रिपोर्ट आई नहीं, बजट भी नहीं मिला : विंग के जिम्मेदारों की उदासीनता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भवन निर्माण में किए गए भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए एसीबी द्वारा तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई निर्णय नहीं निकल पाया। सामग्री के नमूने लेने के बावजूद आज तक जांच अधूरी है। भवन की मरम्मत कराने के लिए 60 लाख का प्रस्ताव भेजा लेकिन स्वीकृति नहीं मिली।

समय-समय पर कागज पहुंचाए, नतीजा शून्य : 4 मई 2017 को एमसीएच विंग अस्पताल को हैंड ओवर की गई थी। 5 सितंबर 2018 को बिल्डिंग में खराब मेटिरियल को लेकर शिकायत पर सैंपल लिए थे, जांच एसीबी को सौंपी। जिसका नतीजा नहीं आया। फिर 21 मई को स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी को बजट के लिए पहला पत्र भेजा था। इसके बाद 27 मई 2021 को एसीबी को जांच रिपोर्ट तैयार करने का एक पत्र लिखा था।

सिंगल फाइल थी, अब पांच गुना बन चुकी :एमसीएच विंग के लिए मरम्मत को लेकर मांग का पहला पत्र भेजा गया था। इसके बाद तो लगातार समय समय पर अस्पताल के प्रशासन की ओर से पत्र व्यवहार ही होते रहे। शुरूआत में सिंगल फाइल बनी थी, लेकिन पिछले चार सालों में पांच फाइलों के वजह के बराबर एक फाइल बन चुकी है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग से न बजट मिला न ही बिल्डिंग शिफ्ट करने का कोई आदेश मिला।

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