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भास्कर इन्वेस्टिगेशन:वेटिलेंटर पर गंभीर मरीज को 24 घंटे में चाहिए 25 हजार लीटर ऑक्सीजन, कमी है इसलिए उपयोग नहीं, नतीजा 169 जानें गई

नागौर5 महीने पहलेलेखक: सुभाष मुंडेल
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वेटिलेंटर चलाने के लिए एक्सपर्ट टेक्नीशियन ही नहीं, यह भी दूसरी बड़ी वजह। - Dainik Bhaskar
वेटिलेंटर चलाने के लिए एक्सपर्ट टेक्नीशियन ही नहीं, यह भी दूसरी बड़ी वजह।
  • सरकार की गैर जिम्मेदारी से किसी ने पिता, पति, बेटा खोया... अपनों से बिछुड़ रहे लोग
  • राज्य में टैक्नीशियन के 300 से अधिक पद खाली

जिले में कोरोना से अब तक सरकारी आंकड़ों के अनुसार 169 मौतें हो चुकी है जो हकीकत से कई गुणा कम है। मौतों का एक बड़ा कारण ऑक्सीजन की कमी भी सामने आई है। सरकार ऑक्सीजन प्लांट लगाने व कोविड केयर सेंटर पर जोर दे रही है मगर जो संसाधन पहले से उपलब्ध हैं उनका तो उपयोग ही नहीं हो पा रहा।

जिले में 58 वेटिलेंटर हैं मगर इनमें से कुछ वेटिलेंटर को ही मुश्किल से काम ले रहे है। जानकारी अनुसार 50 वेटिलेंटर तो संसाधनों के अभाव और प्रशासनिक अनदेखी के चलते शुरू ही नहीं किए। भास्कर ने इसकी पड़ताल की और एक्सपर्ट से जानकारी ली तो चौंकाने वाली बातें सामने आई। जिले में वेटिलेंटर तो हैं मगर उन्हें चलाने वाला स्टाफ व पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं।

अगर नागौर के 58 वेटिलेंटर चालू स्थिति में होते तो मौतों को आंकड़ा इतना तो नहीं होता। कोरोना संक्रमण के गंभीर मरीज को जब सामान्य ऑक्सीजन भी काम नहीं करती, तब उसे वेंटिलेटर पर रखा जाता है। इसे लाइफ-सपोर्ट कहते हैं क्योंकि ये लगभग ठहर चुके फेफड़ों को सांस लेने में मदद देता है। लेकिन जीवन रक्षक वेंटिलेटर नहीं मिलने के कारण कई मरीजों की मौत हो रही है। स्टाफ व संसाधानों की कमी से लाखों की मशीनें बर्बाद हो रही हैं। खुद जेएलएन अस्पताल के स्टाफ की मानें तो यहां चलाने के लिए टैक्नीशियन व देख-रेख करने की कोई व्यवस्था भी नहीं है। यही वजह है कि वेंटिलेटर काम नहीं ले रहे।

ऑक्सीजन सप्लाई के सिस्टम में सफाई की कमी तो संक्रमण : डब्लूएचओ

डब्ल्यूएचओ के अनुसार 7 दिन पर सिलेंडर, वॉल्व और फ्लोमीटर की मान्य डिस्इंफेक्टेंट युक्त गीले कपड़े से सफाई होनी चाहिए। ह्यूमिडिफायर में डिस्टिल या स्टराइल वाटर का ही इस्तेमाल होना चाहिए। नल या मिनिरल वाटर से संक्रमण का खतरा होता है। सिलिंडर से ऑक्सीजन के डिलिवरी ट्यूब और मास्क को रोज साफ करना चाहिए। ह्यूमिडिफायर से लगी पानी की बोतल को दोबारा भरने के पूर्व डिस्इंफेक्ट करना चाहिए।

सिस्टम चलाने की सुविधांए ही नहीं, टैक्नीशियन के पद खाली, तो कैसे चले वेटिलेंटर, एक आईसीयू में 4 डॉक्टरों की पड़ती है जरूर

सामान्य मरीज को 3-4 प्रति लीटर ऑक्सीजन सप्लाई से सुरक्षित रखा जा सकता है। मगर वेटिलेंटर पर एक्सपर्ट टैक्नीशियन व स्टाफ जरूरी है। वेटिलेंटर पर मरीज को पूरी ऑक्सीजन मिल पाती है लेकिन इसके लिए सिस्टम तैयार होना चाहिए। वहीं ऑक्सीजन खपत की मात्रा भी बढ़ जाती है। आईसीयू में प्रति दस बेड ऑन डयूटी 4 डॉक्टर चाहिए। एयर कंडिशनर, लाइट की हर पल जरूरत पड़ती है। इतनी सुविधाएं हर जगह मिलना मुश्किल है इसी कारण से संभवत वेटिलेंटर चलाए नहीं जा रहे हैं। - डॉ. गणेशराम, निश्चेतना विशेषज्ञ।

प्रदेश में सैकड़ों पैरामेडिकल, निश्चेतना डॉक्टर व एक्सपर्ट टैक्नीशियन के पद खाली हैं। कई जगह तो नर्सिंगकर्मियों के भरोसे आईसीयू चल रहे हैं। वेटिलेंटर के लिए विशेष टैक्नीशियन की जरूरत है। अगर टैक्नीशियन हाेते तो ऑक्सीजन की किल्लत भी नहीं आती। जानकारी के अभाव में जितना ऑक्सीजन मरीज को देते हैं उसमें से 40 फीसदी तो खरीब कर दी जाती है। इनटयूबेशन जैसे प्रोसेस में स्टेरलाइजेशन टैक्निक तभी संपूर्ण हो पाती है जब उसके साथ एक पूर्ण ट्रेंड ओटी टैक्नीशियन उपलब्ध हो। - गौरव जैन, पूर्व पैरामेडिकल यूनियन अध्यक्ष, बीकानेर।

असावधानी व अधूरा ज्ञान भी मरीजों के लिए बन जाता घातक

जानकारी अनुसार एनेस्थेसिया के डॉक्टर व ट्रेंड टैक्नीशियन का आईसीयू में होना जरूरी है। क्योंकि मरीज को वेटिलेंटर पर रखने के लिए पूर्णत सावधानी बरतनी होती है। जिसके लिए पूर्ण ट्रेंड व्यक्ति चाहिए। अगर आवश्यकता से ऑक्सीजन की मात्रा कम ज्यादा होती है या संचालन में हल्की सी चूक होती है तो मरीज के लिए घातक बन जाती है। मगर परेशानी यह है कि नागाैर के अस्पतालों में एक्सपर्ट टैक्नीशियन ही नहीं है।

सरकार की नाकामी से मौतें हो रही, सरकार से बात करूंगा : बेनीवाल

  • कोविड आईसीयू के लिए मैंने 50 लाख रुपए पिछले कोरोना काल में ही दे दिए थे। इसके बाद वेटिलेंटर खरीदे भी गए मगर अब तक इंस्टाॅल नहीं किया जाना सरकारी व सीएमएचओ की लापरवाही है। मांग अनुसार किट भी दिए है। खाली पदों के लिए संविदा पर कार्मिक लेने चाहिए, योग्याताधारी नौजवान बैठै है। चलाने वाले नहीं है तो सरकार ने खरीदे क्यों? - हनुमान बेनीवाल, सांसद।
  • डॉक्टरों की सलाह व आवश्यकतानुसार वेटिलेंटर चलाए जा रहे हैं। जिला मुख्यालय पर स्थित हॉस्पिटल में जितनी आवश्यकता होती है उतना डॉक्टर काम में ले रहे हैं। वहीं बच्चों के लिए जिले में भी पूरी तैयारियां की हुई है। पदों को भरने का काम सरकार का है, इसको लेकर हम तैयारी कर रहे हंै। कोई समस्या नहीं आने देंगे। - जितेंद्र कुमार सोनी, कलेक्टर।
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