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श्रीरामदेव पशु मेला:प्रतियाेगिता में सोशल डिस्टेंस असंभव बता निरस्त कर दिया पशु मेला

नागौरएक महीने पहले
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  • मेला निरस्त किया ताे विराेध में उतरे पशुपालक, सांसद बेनीवाल ने सीएम व पशुपालन मंत्री काे लिखा पत्र

अधिकारियों की लापरवाही की एक बानगी देखिए, पशु प्रतियोगिता व सांस्कृतिक कार्यक्रम में सामाजिक दूरी बनाए रखना असंभव बता नागौर में आयोजन होने वाले विश्व प्रसिद्ध श्री रामदेव पशु मेले को ही निरस्त करवा दिया। इसका खुलासा नागौर के अधिकारियों द्वारा पशुपालन विभाग को भिजवाई गई रिपोर्ट में हुआ है, जिसके आधार पर संयुक्त शासन सचिव डॉ. वीरेंद्र सिंह ने मेले के अायाेजन काे निरस्त किया है। जबकि हकीकत यह है कि विश्व प्रसिद्ध श्री रामदेव पशु मेले काे लेकर पशुओं का आवागमन शुरू हाे गया है।

वैक्सीन आने के साथ ही कोरोना की स्थिति कंट्रोल में है और सरकार ने भी स्कूल, कॉलेज, होटल, गार्डन सहित मैरिज गार्डन खोलने तक की अनुमति दे चुकी है। जबकि पशु मेला स्थल पर पहुंचने वाले पशुओं के साथ-साथ पशुपालकों के बीच दूरी बनी रहती है। मेले स्थल पर कोरोना गाइडलाइन की आसानी से पालना करवाई जा सकती है।

जरूरी नहीं है कि पशु मेले के दौरान पशु प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करवाएं जाए। मेले का मूल उद्देश्य केवल पशुओं की बिक्री होना हैं। जबकि लापरवाह अधिकारियों ने गलत रिपोर्ट भिजवा विश्व प्रसिद्ध मेला निरस्त करवाने की सिफारिश कर दी, जिसे लेकर आर्थिक संकट से जूझ रहे पशुपालकों में भारी आक्रोश हैं।

सांसद बेनीवाल से मिले पशुपालक, बाेले- काेराेना के नाम पर अधिकारियों ने अन्याय किया, पशु मेले का हाे आयाेजन

पशु मेले के आयोजन करवाने की मांग को लेकर शनिवार को किसानों व पशुपालकों ने सांसद हनुमान बेनीवाल से मुलाकात की। सांसद ने कृषि एवं पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया से दूरभाष पर वार्ता की। वहीं जिला प्रशासन के अधिकारियों व पशुपालन विभाग के उपनिदेशक को दूरभाष पर मेले के आयोजन करवाने सकारात्मक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। पत्र में बताया की विश्व प्रसिद्ध श्री रामदेव पशु मेले का हर साल आयोजन होता है। मेले न केवल नागौर बल्कि राजस्थान के अन्य जिलों व देश के अन्य प्रदेशों के किसानों व पशुपालकों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सभाएं और सामाजिक कार्यक्रमों की अनुमति दी जा सकती है ताे पशु मेले की क्याें नहीं?

सांसद बेनीवाल ने कहा कि कोरोना के संकट काल में किसान व पशुपालक भी आर्थिक रूप से प्रभावित हुए ऐसे में इस तरह मेले के आयोजन को कोरोना का कारण बताकर रद्द करना किसी भी दृष्टि से न्याय संगत नहीं है, क्योंकि जब कोरोना के काल में सरकार के निर्देशानुसार तय गाइडलाइन से सभाओं, सामाजिक कार्यक्रमों व अन्य आयोजनों की अनुमति दी जा रही है तो कोरोना की आड़ में पशु मेले के आयोजन को रद्द करना किसानों व पशुपालकों के हितों के खिलाफ होगा सांसद ने कहा की उक्त मेला नागौरी बेलों को लेकर प्रसिद्ध है ओर मेले के आयोजन को लेकर कई राज्यों के पशुपालक टकटकी निगाहों से देख रहे है। कोरोना के संकट के बाद मेले के आयोजन से निश्चित तौर पर पशुपालकों को आर्थिक लाभ भी होगा साथ ही कहा की पशु मेले भी हमारी सांस्कृतिक धरोहर है ऐसे में पशु मेले के आयोजन की अनुमति देना अत्यंत जरूरी है।

ऊंटों की यह कदमताल बता रही है पशु मेला भरेगा, बाहरी जिलों से पहुंच रहे पशुपालक

नागौर। जिले के ग्रामीण क्षेत्र सहित बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर सहित कई जिलाें से पशुपालक रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले ऊंटों के काफिले के साथ नागौर पहुंच रहे हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी मेले में सर्वाधिक ऊंटों की आवक हो सकती है। बैल भी पहुचेंगे।

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