मेहमान परिन्दों के लिए झील में डाला जा रहा जहर:पक्षी त्रासदी के बाद भी सांभर झील में डाल रहे हैं अपशिष्ट

नागौर2 महीने पहले
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सांभर झील में हजारों प्रवासी पक्षी विदेशों से यहां इसका सौन्दर्य बढ़ाने आते है। सांभर झील सूखने के साथ ही धरातल पर एलगी आ जाती है। झील में बारिश के पानी की आवक शुरु होने के साथ ही यह एलगी पक्षियों के लिए भोजन बन जाती है। उसी भोजन के लिए विदेशी पक्षी हजारों कोष की यात्रा कर सांभर झील में आते है। झील में नमक रिफाइनरियों का अपशिष्ट डालने पर पक्षियों के लिए यह भोजन खत्म होता है साथ ही यह अपशिष्ट पक्षियों के लिए खतरा है।

गत दिनों प्रदूषण नियन्त्रण विभाग व वन विभाग की ओर से वेटलैंड सेलिब्रेशन के दौरान नमक रिफाइनरी संचालकों की बैठक आयोजित कर अपील की गई कि झील में अपशिष्ट व कचरा नहीं डाले। बैठक के दौरान रीजनल ऑफिसर अरविन्द कुमार ने झील संरक्षण के लिए विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कचरा व वेस्टेज डालने से पक्षियों के लिए खतरा उत्पन्न होता है। इसीलिए झील में पर्यावरण प्रदूषण, पानी प्रदूषण नहीं पहुंचने के साथ ही अपशिष्ट भी नहीं डालना चाहिए। जिस पर सभी नमक रिफाइनरी संचालकों ने बताया कि कोई भी झील में वेस्टेज नहीं डालते है।

आश्चर्य की बात यह है कि यदि कोई भी नहीं डालता है तो झील में अपशिष्ट कहां से आता है। सांभर झील में रात के अंधेरे में आए दिन अपशिष्ट के डम्पर खाली होते है लेकिन प्रशासन की ओर से नमक उद्यमियों को अपशिष्ट डालने की मौन स्वीकृति दी हुई है। गत तीन वर्षों में प्रशासन की ओर से नमक का अपशिष्ट झील में डालने वाले किसी भी वाहन पर कार्रवाई नहीं की गई।

विगत दो वर्ष पूर्व सांभर झील में बड़ी पक्षी त्रासदी हुई। जिसमें लगभग पचास हजार पक्षियों की मृत्यु हो गई। इसके पश्चात प्रशासन की ओर से सांभर झील में अपशिष्ट नहीं डालने को लेकर अंकुश लगाया गया तथा नमक उद्यमियों को भी पाबन्द किया गया। लेकिन समय बीतने के साथ ही स्थानीय प्रशासन ने झील की ओर ध्यान देना कम कर दिया और नमक रिफाइनरियों की इस समस्या का समाधान हो गया। रात के अंधेरे में रिफाइनरी का अपशिष्ट झील में आना शुरु हो गया।

ठेकेदार की जिम्मेदारी अपशिष्ट का निस्तारण
नमक रिफाइनरी संचालक अपना अपशिष्ट निस्तारण के लिए ठेकेदारों को ठेका देते है। जिसमें ठेकेदार अपने डम्परों से रिफाइनरी का अपशिष्ट उठाकर सरकारी भूमि, गौचर भूमि ओर सांभर झील में डाल देते है।

नमक रिफाइनरी संचालकों ठेका देकर निश्चिंत हो जाते है। उदासीनता के कारण ठेकेदार झील में डम्पर खाली कर चांदी कूट रहे है। प्रशासन पक्षी त्रासदी के बावजूद झील में कचरे व अपशिष्ट डालने पर अंकुश नहीं लगा पाया।

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