• Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Nagaur
  • Change Came If Corona Snatched The Job Or The Earner, Women Associated With E commerce Leaving The Trust Of Others; Created Source Of Income

महिला स्वावलंबन की मिसाल:कोरोना ने रोजगार या कमाने वाले को ही छीना तो आया बदलाव, दूसरों का भरोसा छोड़ ई-कॉमर्स से जुड़ी महिलाएं; बनाया कमाई का जरिया

नागौर10 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं। - Dainik Bhaskar
कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं।

कहते हैं कि हर समस्या या आपदा कोई न कोई अवसर भी साथ लेकर आती है। एक तरफ जहां कोरोना ने जनजीवन प्रभावित किया है और लोगों की जिंदगी बदल दी है वहीं दूसरी तरफ महिलाएं अब ई-कॉमर्स से अपना घर परिवार भी चला रही हैं।

कोरोनाकाल में पति का रोजगार छूटा तो महिलाएं ऑनलाइन रोजगार से जुड़ने लगी हैं। एक प्रकार से इसे ऑनलाइन उद्योग जगत में महिलाओं का पदार्पण भी कह सकते हैं। कोरोनाकाल से बनी परिस्थितियां, घर से काम करने का अवसर और इंटरनेट की आसान पहुंच ने महिलाओं को ई-कॉमर्स से जोड़ा है। अनेक महिलाओं ने सोशल मीडिया को व्यापार का प्लेटफॉर्म बनाया है। ई-कॉमर्स कंपनियां लाखों व्यवसायियों को रोजगार देने, अपना ब्रांड बनाने और ऑनलाइन बिक्री करने में मदद कर रही हैं।

इस ऑनलाइन व्यापार ने इस कोरोनाकाल में विशेष रूप से उन महिलाओं की मदद की है जो विभिन्न परिस्थितियों के कारण व्यवसाय चलाने के अपने सपने को पूरा करने में सक्षम नहीं थीं, जिनके लिए परिवार से दूर जाना एक बड़ी चुनौती था।

महिला उद्यमी मोनिका व्यास।
महिला उद्यमी मोनिका व्यास।

राजस्थान की एक महिला उद्यमी मोनिका व्यास पारीक जो एक ऑनलाइन स्टोर हार्ट क्राफ्ट फैशंस की संस्थापक और सीईओ भी हैं, ने भास्कर को बताया कि नए जमाने के उद्यमी एक भौतिक स्टोर के प्रबंधन की परेशानी नहीं चाहते हैं क्योंकि आप ग्राहकों से घर बैठे ऑनलाइन जुड़ने में सक्षम हैं, इससे बेहतर और क्या होगा? मोनिका ने कहा, अपने बिजनेस को एआईबीए और शॉपर्स बाजार जैसे मंच से जोड़ना उनके लिए सपने साकार करने जैसा साबित हुआ।

ऑल इंडिया बिजनेस वुमन एसोसिएशन (एआईबीए) की संस्थापक अर्पिता श्रीवास्तव ने बताया कि यह एक ऐसा मंच है जो महिलाओं को अपनी ऑनलाइन उपस्थिति बढ़ाने और बड़ी संख्या में ग्राहकों से जुड़ने में मदद करता है। एआईबीए मंच ने महत्त्वाकांक्षी व्यवसायी महिलाओं के साथ-साथ उन महिलाओं की भी घर से लघु उद्योग शुरू करने में मदद की है जिन्होंने कोविड में अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले को खो दिया अथवा उसका रोजगार छीन लिया हो।

मोनिका पारीक का कहना है कि सोशल मीडिया पर इनके अलावा भी बहुत से व्यवसायिक ग्रुप हैं जिनसे जुड़कर रोजगार किया जा सकता है। हाल ही में शॉपर्स दरबार ने दिल्ली में 5वीं वर्षगांठ मनाई जिसमे इस मंच से जुड़ी अनेक महिला उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा किए।

तीन सहेलियां सेजल पालीवाल, गरिमा भटनागर और अर्पिता श्रीवास्तव।
तीन सहेलियां सेजल पालीवाल, गरिमा भटनागर और अर्पिता श्रीवास्तव।

फौजी परिवारों के लिए की थी शुरूआत, अब सबके लिए अवसर
शॉपर्स दरबार की शुरूआत 2016 में तीन सहेलियां सेजल पालीवाल, गरिमा भटनागर और अर्पिता श्रीवास्तव ने मिलकर की थी। ये तीनों फौजी परिवेश से ताल्लुक रखती हैं। इनका उद्देश्य उन महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराना था जिनके फौजी पति दूर-दराज के इलाकों में तैनात हैं। क्योंकि अमूमन देखा गया है कि फौजी पत्नियों के पास कॅरिअर बनाने के ज्यादा विकल्प नहीं होते। ऐसी महिलाओं को घर बैठे आय प्राप्त कराने का जरिया बना शॉपर्स दरबार। अब यह बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है। इस ग्रुप में लाखों महिलाएं जुड़ी हैं और 200 से अधिक अपना रोजगार कर रही हैं।

खबरें और भी हैं...