नमक के अवैध कारोबार पर लगेगी लगाम:कलेक्टर ने अवैध बोरवेल कल से विशेष अभियान चलाने के दिए निर्देश

नागौरएक महीने पहले

देश की दूसरी सबसे बड़ी नमक की झील सांभर झील में चल रहे नमक के अवैध धंधे पर मंगलवार को भास्कर खुलासे के बाद माफियाओं से लेकर अधिकारियों तक में हड़कंप मचा हुआ है। कलेक्टर पीयूष समारिया ने सांभर झील क्षेत्र में गुरुवार से विशेष अभियान चलाकर अवैध बोरवेल कर भूमिगत पाइपलाइन लगा के व केबल बिछाकर खारड़ा व नमक क्यार में अवैध रूप से ब्राइन चोरी कर परिवहन करने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिये है। इससे एक दिन पहले नावां तहसीलदार सतीश राव ने आउ गांव के पास झील किनारे करीब 21 बीघा जमीन पर बनी नमक की अवैध क्यारियों को JCB से तहस-नहस किया था।

कलेक्टर पीयूष समारिया ने मीटिंग कर राजस्व, परिवहन, विद्युत व पुलिस अधिकारियों की जॉइंट टीम का गठन कर झील क्षेत्र में लगातार पेट्रोलिंग करने के निर्देश दिये है। गिरदावरों के नेतृत्व वाली ये तीन टीमें कलेक्टर पीयूष समारिया के निर्देशानुसार अवैध बोरवेल व केबल पर कार्रवाई करेगी। कलेक्टर समारिया ने रात के समय रिफाइनरी द्वारा अपशिष्ट झील में छोडने या डालने पर प्रतिबंध लगाने एवं बड़े वाहनों को झील क्षेत्र की सीमा में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने को कहा।

जिला कलेक्टर पीयूष समारिया ने नावां SDM बृह्मलाल जाट को पारदर्शी कार्रवाई करने व दुबारा अतिक्रमण न हो, इसे सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। पुलिस विभाग के अधिकारियों को कार्रवाई के लिए एक्स्ट्रा जाप्ता उपलब्ध करवाने एवं SHO को पाबंद करने के लिए निर्देशित किया। परिवहन विभाग के अधिकारियों को झील क्षेत्र में फ्लाइंग लगाकर बोरिंग मशीन, बडी ड्रिलिंग मशीन व निजी वाहनों के झील क्षेत्र में परिवहन को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित करने व लॉग बुक की जांच करने एवं मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिये।

भास्कर पड़ताल में सामने आया ये सच
गौरतलब है कि भास्कर पड़ताल में सामने आया था कि जयपुर,अजमेर व नागौर तीन जिलों में फैली सांभर झील के पास लोगों ने सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे कर रखे हैं। खाली जमीन पर पाइपों के जरिए खारे पानी को लाया जाता है। यहां पानी को क्यारियों में इकट्ठा किया जाता है। पानी सूखने के बाद पीछे नमक बच जाता है। जिस जमीन पर नमक बनाते है, उसे खारड़ा कहते हैं। इस नमक को एकत्रित कर जेसीबी से ट्रैक्टर और डम्पर में भरकर रिफाइनरी तक पहुंचाया जाता है। रिफाइन होने के बाद नमक को कट्‌टों में पैक कर देशभर में सप्लाई किया जाता है।

साल्ट लेक एरिया में बोरिंग बैन
भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में ये भी सामने आया था कि सांभर झील के पास बोरिंग करने पर प्रतिबंध है, लेकिन अगर ‘महेंद्र टैक्स’ दे देते हैं तो बेरोकटोक बोरिंग कर सकते हैं। बिना ये टैक्स दिए न तो कोई बोरिंग कर सकता है और न ही खारे पानी को निकाल सकते हैं। भास्कर को राधेश्याम नाम के शख्स ने बताया था कि एक बोरिंग के लिए करीब 20 हजार रुपए देने होते हैं। यह टैक्स प्रशासन से लेकर हर जगह बंटता है।