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  • Congress Government Removes Educational Qualification, 37% Of Candidates Enter Thumb Impression, 15 Business Men And 6 Lawyers Are Also Contesting Elections

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पंचायत चुनाव:कांग्रेस सरकार ने शैक्षणिक योग्यता हटाई तो 37% प्रत्याशी अंगूठा छाप मैदान में उतरे, 15 बिजनेस मैन और 6 वकील भी लड़ रहे चुनाव

नागौर3 दिन पहले
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  • जिला परिषद के 46 वार्डों पर 4 चरणों में होंगे चुनाव
  • नतीजा- पढ़े- लिखे नहीं होंगे जनप्रतिनिधि तो अन्य हाथों कठपुतली बनकर रहे जाएंगे

पंचायतीराज में सरपंच से लेकर प्रधान और जिला प्रमुख तक को चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं है। कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही भाजपा के इस फैसले को पलटते हुए शैक्षणिक योग्यता को हटा दिया था। बिना पढ़े लिखे जनप्रतिनिधियों को डिजिटल क्रांति के इस युग में काम करना आसान नहीं होगा। देश में चुनाव लड़ने का अधिकार सभी को है लेकिन गांव, पंचायत और जिले की सरकार चलाने वाले जनप्रतिनिधियों के लिए शिक्षा बेहद जरूरी है।

यदि ये पढ़े लिखे नहीं होंगे तो ये किसी अन्य के हाथों की कठपुतली बनकर ही रह जाएंगे। इनकी शक्तियों का दुरुपयोग भी होगा। दरअसल, जिला परिषद के 47 में से 46 वार्डों में होने वाले चुनाव को लेकर साढ़े तीन गुणा, कुल 165 प्रत्याशी मैदान में डटे है। क्षेत्र में अपने भाषणों में वाेटराें के सामने बड़े-बड़े वादे कर लुभाने वाले प्रत्याशियों की योग्यता क्या है? दैनिक भास्कर ने इन सभी प्रत्याशियों द्वारा दाखिल नामांकन फार्म से जानकारी जुटाकर विश्लेषण किया शैक्षणिक योग्यता की चौंकाने वाली स्थिति सामने आई।

जिला परिषद सदस्य के लिए मैदान में उतरे 165 में से 36.36 फीसदी प्रत्याशी ऐसे हैं, जो कभी स्कूल ही नहीं गए, यानी वो अंगूठा छाप है। वहीं 05 प्रत्याशी केवल साक्षर हैं। फार्म भरने वाले करीब 21.81 फीसदी उम्मीदवार 9वीं से 12वीं पास हैं। 5 से 8वीं पास केवल 6.6 फीसदी प्रत्याशियों ने ही फार्म भरा है। 46 सीटों में 10.90 फीसदी प्रत्याशी ही स्नातक और 20.60 फीसदी स्नातकोत्तर हैं। प्रथम चरण में जायल, नागौर, खींवसर व मूंडवा में 23 नवंबर को चुनाव होंगे।

  • 46 सीटों पर साढ़े 3 गुणा प्रत्याशी लड़ रहे है चुनाव, 94 पुरुष और 71 महिलाएं भी मैदान में उतरी
  • 91.51 फीसदी शादीशुदा तो 8% कुंआरे मैदान में उतरे
  • 46 वार्डों के लिए हो रहे चुनाव में बड़ी संख्या में इस बार शादीशुदा प्रत्याशी मैदान में उतरे है। 165 में से 151 प्रत्याशी शादीशुदा है। जबकि 14 प्रत्याशी कुंआरे युवा चुनाव लड़ रहे है।

09% बिजनेसमैन 35.75% किसान 33.33% गृहिणी
जिला परिषद के 46 वार्डों के चुनाव में 59 कृषि का कार्य से जुड़े किसान वर्ग से प्रत्याशी मैदान में उतरे है। वहीं चुनाव लड़ने वालों में छह एडवोकेट भी है। वहीं 15 प्रत्याशी ऐसे जो खुद का व्यवसाय करते है, यानी वो बिजनेसमैन है। इसी तरह चुनाव में 55 गृहिणी भी मैदान में उतरी है।

पहले यह था : पंचायत समिति सदस्यों के लिए 10वीं, सरपंचों के लिए 8वीं थी योग्यता
भाजपा सरकार ने पंचायत और जिला परिषद सदस्य के लिए 10वीं पास की योग्यता अनिवार्य की थी। इसी तरह सरपंच के लिए टीएसपी क्षेत्र में 5वीं पास और नॉन टीएसपी में 8वीं पास की योग्यता रखी थी, लेकिन कांग्रेस सरकार ने पंचायतीराज चुनाव में इस योग्यता को विधेयक पास करके इसे समाप्त कर दिया। अब पंचायत व जिला परिषद सदस्य ही नहीं, बल्कि सरपंच से लेकर प्रधान और प्रमुख को चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं है।

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