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जेल के बाहर बैठे 3 मासूम:पत्नी की हत्या के आरोप में पिता जेल में बंद, दर-दर की ठोकरें खा रहे 5 भाइयों में से 2 की हुई मौत; 3 बच्चे पिता की तलाश में जेल के बाहर बैठे

नागौर4 महीने पहले
डीडवाना सब जेल के बाहर बैठे दो मासूम भाइयों से बात करती चाइल्ड लाइन टीम सदस्य बबिता कंवर।

नागौर के डीडवाना में 3 मासूम भाई जेल के बाहर बैठे हुए हैं। 3 साल पहले उनकी मां की हत्या हो गई थी। हत्या के आरोप में पिता जेल में बंद हैं। दोनों के कुल 5 बेटे थे। मां की हत्या और पिता की जेल के बाद सभी बेसहारा हो गए। दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हुए पांचों भाइयों में से एक भाई हादसे का शिकार हो गया। उसकी मौत हो गई। थोड़े समय पहले दूसरे भाई की भी मौत हो गई। इसके बाद बचे 3 मासूम भाई पिता की तलाश में डीडवाना सब जेल के बाहर आ पहुंचे।

इस बात की जानकारी जब सब जेलर हेमराज के जरिए डीडवाना SDM कार्तिकेय मीणा को मिली तो उन्होंने तत्काल जेल के बाहर बैठे मासूम भाइयों को अपने कार्यालय में बुलाया। जेलर हेमराज ने उनसे आपबीती सुनी। जेलर ने उन्हें नागौर चाइल्ड लाइन टीम के सदस्यों को बुलाकर सौंप दिया। अब इन मासूम बच्चों को चाइल्ड लाइन टीम ने CWC नागौर के समक्ष पेश किया है। जहां अब CWC नागौर इनका लालन-पालन सुनिश्चित करेगी।

सबसे बड़े भाई भाणिया बनबागरिया के रेस्क्यू के बाद उसके साथ चाइल्ड लाइन टीम।
सबसे बड़े भाई भाणिया बनबागरिया के रेस्क्यू के बाद उसके साथ चाइल्ड लाइन टीम।

नागौर जिले के चितावा थाना क्षेत्र में बनबागरिया जाति की एक महिला की मौत मामले में उसके पति समंदरिया बनबागरिया पर हत्या का आरोप था। वो 3 साल से जेल में बंद है। समंदरिया बनबागरिया के 5 बच्चे बेसहारा हो गए। एक बूढ़ी दादी के अलावा परिवार में कोई नहीं था। सभी बच्चे भीख मांगकर अपना जीवन यापन करने लगे। इस बीच एक भाई की सड़क हादसे में मौत हो गई। वहीं, दूसरे की बीमारी से मौत हो गई। अब 5 भाइयों में से 3 भाई बचे हैं।

दो छोटे भाई रामदेव बनबागरिया और सुखिया बनबागरिया के रेस्क्यू के बाद उसके साथ चाइल्ड लाइन टीम।
दो छोटे भाई रामदेव बनबागरिया और सुखिया बनबागरिया के रेस्क्यू के बाद उसके साथ चाइल्ड लाइन टीम।

पिता की तलाश में तीनों भाई पहुंच गए जेल के बाहर, वहीं बैठ गए

आखिरकार अपने पिता की तलाश करते-करते तीनों मासूम भाई रामदेव बनबागरिया(9), सुखिया बनबागरिया(6) और भाणिया बनबागरिया (12) कई दिनों पहले डीडवाना सब जेल के बाहर पहुंच गए। यहीं बैठ गए। वो दिन भर जेल प्रहरियों से अपने पिता के बारे में पूछते रहते। मासूम बच्चों की हालत देखकर जेल प्रहरियों का दिल पसीज गया। वो इन बच्चों को रोजाना खाना खिलाते और वहीं जेल के बाहर साइड में सोने भी देते।

सब जेलर ने SDM को बताई बच्चों की पीड़ा

जब सब जेलर हेमराज को इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत डीडवाना SDM कार्तिकेय मीणा को बच्चों की पीड़ा बताई। जेलर ने SDM से बच्चों की सहायता करने का अनुरोध किया। डीडवाना SDM कार्तिकेय मीणा ने तुरंत ही मासूम बच्चों को अपने पास बुला लिया। इसके बाद नागौर चाइल्ड लाइन टीम के सदस्यों को इनके रेस्क्यू और लालन-पालन के निर्देश दिए। नागौर से नागौर चाइल्ड लाइन टीम कोर्डिनेटर करणी सिंह व टीम सदस्य बबिता कंवर ने तीनों बच्चों का रेस्क्यू किया। उन्हें नागौर CWC के समक्ष पेश कर दिया है। अब इनका लालन-पालन CWC सुनिश्चित करेगी।

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