बदहाल सड़कें:टाेल चुकाने के बाद भी वाहन चालकों को क्षतिग्रस्त सड़क पर चलना पड़ रहा है

जिलिया9 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
राणासर-कोटपुतली मेगा हाइवे सड़क पर गड्ढे बने हुए। - Dainik Bhaskar
राणासर-कोटपुतली मेगा हाइवे सड़क पर गड्ढे बने हुए।

करोड़ों की लागत से बना राणासर-कोटपूतली मेगा हाइवे मार्ग खस्ताहाल होकर गड्ढों में तब्दील हो गया है। इससे रोजाना वाहन चालकों में दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। टोल सड़क का निर्माण 6 वर्ष पहले ही हुए कि सड़क जगह-जगह से टूट चुकी है। दैनिक भास्कर ने 2 सितम्बर के अंक में प्रकाशित खबर ‘रोड के बीच बने गड्ढे, 1 किमी में तीन से ज्यादा जानलेवा घुमावदार मोड़’ के बाद रोड कंपनी ने बने गड्ढ़ों में सूखी कंकरीट डाल कर इतिश्री कर ली थी।

वाहन चालकों व ग्रामीणों के लम्बे इंतजार के बाद इस मार्ग का निर्माण तो हुआ, लेकिन यह सुविधा वाहन चालकों के लिए दुविधा साबित हो रही है। निर्माण में गुणवत्ता खराब होने के कारण सङक उखड़ चुकी है। इस हाइवे पर हर 200 मीटर पर बड़े-बड़े गड्ढे में तब्दील हो चुकी है। जोखिम भरा सफर चुनौती से कम नहीं है। राणासर से लोसल की दूरी करीब 27 किमी है।

सड़क निर्माण के बाद राणासर से लोसल जाने के लिए 35 मिनट लगते थे, लेकिन अब खस्ताहाल मार्ग से सफर करने में करीब 1 घंटा लग जाता है। इससे समय व धन दोनों का नुकसान होता है। बारिश होने के बाद तो स्थिति ओर ज्यादा खराब हो जाती है। गड्ढों में पानी भरने के बाद गड्ढे दिखाई नहीं देते और वाहन चालक चोटिल हो जाते हैं।

कोई संकेतक बोर्ड भी नहीं लगाए, सड़क दुर्घटनाओं में हो रही है बढ़ोतरी

हाइवे मार्ग से कई गांव व ढाणियां जुड़ी हुई है, लेकिन कहीं भी सांकेतिक बोर्ड नहीं लगे होने के कारण हर कोई वाहन चालक दुविधा में पड़ जाते हैं। स्कूली बच्चों की भी आवाजाही इधर से लगी रहती है। गांवों से आने वाले निजी विद्यालयों के वाहन व अन्य गाडियां संकेतक बोर्ड व ब्रेकर नहीं होने के कारण सीधे हाइवे मार्ग पर आ जाते हैं। मेगा हाईवे सड़क के निर्माण में गुणवत्ता की कमी साफ नजर आती है,क्योंकि इस टोल हाइवे सड़क पर पिछले छः सालों में 10 बार सड़क रिपेयरिंग का काम होता है।

हर एक किलोमीटर में तीन घुमाव मोड़ :

इस सड़क का नाम कागजों मात्र में हाइवे का नाम दिया है। इस सड़क मार्ग को धरातल पर देखा जाए तो हर एक किलोमीटर में 3 से अधिक घुमाव मोड़ मिल जाते है। जिससे आए दिन वाहन चालक दुर्घटनाओं के शिकार हो जाते है। वही हाइवे सड़क पर राणासर से लोसल के बीच मे ऐसे कई खतरनाक घुमाव मोड़ दिए हुए है कि वाहन चालक कुछ भी समझता है उससे पहले ही दुर्घटना हो जाती है।

जिस 16 किमी की दूरी में क्षतिग्रस्त, उसी पर चुकाते हैं टोल

करोड़ों की लागत से बने मेगा हाइवे ओर टोल के नाम पर वाहन चालकों से ऐंठी जाने वाली भारी धन राशि मंगलाना से परबतसर के बीच मेगा हाइवे पर दौड़ने वाले वाहन मालिकों के लिए गले की फांस बन गई है। यह समस्या टोल नाके से परबतसर व टोल नाके से कुचामन तक है। इन दोनों स्थानों के बीच की दूरी 16 किमी है लेकिन इस दूरी में 10-10 खड्डे है।

औसतन सामान्य गति से चलने वाले वाहन को यह दूरी पार करने मे मात्र 20 मिनट लगते है लेकिन फिलहाल यह सफर दुगुना समय ले रहा है। वाहन चालकों को केवल समय ही नहीं समय के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों ने बताया कि माल से भरे भारी वाहनों के खड्डों के कारण पत्ते टूट जाते है।

पत्ता नया डलवाने पर मुख्य पत्ते की लागत व मजदूरी 5000 रुपए आती है। चक्के की लागत भी बेरिंग टूटने पर 1 हजार प्रति चक्का आती है। छोटे वाहनों का एलाइनमेंट बिगड़ना आम बात हो गई है। दुपहिया वाहन भी सड़क टूटी होने के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो रहे है।

खबरें और भी हैं...