भास्कर खास / मकान मालिक व गांव वालों ने तक बोलना बंद कर दिया था, सभी अजीब सा बर्ताव करने लगे थे, मुझे तो अपराध बोध सा होने लगा था

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  • कोरोना को हराने वाली एएनएम संगीता ने साझा किए अनुभव, कहा- इस बीमारी से डरें नहीं, सकारात्मक रहें

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

नागौर. ये हैं एएनएम संगीता तांडी। बासनी में कोरोना के सर्वे काम में लगी थी कि  22 अप्रैल को खुद को कोरोना हो गया। अब स्वस्थ हैं और अस्प्ताल से छुट्‌टी मिल गई। संगीता बताती हैं, बासनी में सर्वे के दौरान एक दिन तो नीचे गिरने जैसी हालत हो गई थी। पता चला मुझे ही कोरोना हो गया। लेकिन मैं आपको बताऊं कि यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है। यह संक्रमण अगर किसी को हाेता भी है तो पॉजिटिविटी बनाए रखें और ऐसा  खाना  खाएं जिससे इम्युनिटी पावर बढ़े।  घबराना बिल्कुल नहीं। यही सोंचे कि आप जल्द ठीक हो जाएंगे।
अपील: किसी मरीज के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए, ये महामारी है किसी को भी हो सकती है, आप बीमारी से डरें, बीमार से नहीं, उसे प्यार दीजिए
14 दिन क्वारेंटाइन सेंटर में बिताने के बाद जब मैं वापस किराए के मकान और घर पहुंची तो दोनों ही जगह काफी भेदभाव देखने को मिला। महिलाओं ने तो जैसे बात करना ही बंद कर दिया था। कोई देखता भी नहीं था। सब अजीब सी नजरों से देखने लगे। इससे काफी अनकंफर्ट महसूस होता था। सबनेे बोलना भी बंद कर दिया था। किसी ने हाल चाल तक नहीं पूछा। यहां से जब गांव पहुंची तो वहां भी ऐसा ही माहौल देखने को मिला। कुछ लोग तो घर के पास से भी नहीं गुजरते थे। ऐसा लगता मानो मैंने कोई अपराध कर दिया हो। हालांकि अब हालात सामान्य होते जा रहे हैं। लोग समझ भी रहे हैं। भगवान न करे कि आपको कोरोना हो मगर हो जाए तो डरें नहीं। डॉक्टर की सलाह मानें और सकारात्मक सोच रखें, जल्द ठीक हो जाएंगे।
किसी भी स्थिति में भूखे न रहें 
संगीता ने कहा, किसी भी स्थिति में भूखे नहीं रहें। बासनी में 25 चिकित्साकर्मियों का स्टाफ है, पॉजिटिव वही हुई। क्योंकि सारा स्टाफ भोजन के बाद कार्य करता था, लेकिन वह सुबह कुछ भी खाकर नहीं जाती थी।  भूखे पेट ही रहती थी। इससे इम्यूनिटी  कमजोर पड़ी और कोरोना ने घेर लिया।  

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