बुआई की तैयारी:कपास फसल बुआई की तैयारियों के साथ फिर से खेतों में जुटे मेड़ता क्षेत्र के किसान

नागौर6 महीने पहले
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  • मेड़ता उपखंड क्षेत्र में सिंचित भूमि पर कपास की बुवाई का कार्य जोरों पर

किसान रबी की कटाई के बाद अब खेतों में फिर से कपास की बुआई को लेकर मेहनत के साथ जुटने लगे हैं। वे खरीफ की फसल बुआई की तैयारियां कर रहे हैं। इसके लिए खेतों में गोबर खाद देने और नई बुआई को लेकर निराई गुड़ाई की व्यवस्थाएं की जा रही है।

मेड़ता क्षेत्र में किसानों के लिए कोटन, कपास की खेती और बुआई के लिए अप्रैल के अंतिम पखवाड़ा से लेकर मई तक यह उपयुक्त समय है। मेड़ता उपखंड के सिंचित क्षेत्र लाम्बा जाटान, इंदोकीयावास, हंसियास, बासनी सेजा क्षेत्र में कपास की खेती होती है। इन क्षेत्र में वर्तमान में ट्यूबवैल से होने वाली खेती में इसकी बुआई अधिक की जाती है।

सिंचित क्षेत्रों में इसकी बहुतायत तौर पर खेती की जाती है। इन दिनों काश्तकारों के लिए राहत की बात यह है कि उन्हें सिंचाई के लिए बिजली की आपूर्ति भी समय पर मिल रही है। अप्रैल व मई माह से कपास की बुआई का उपयुक्त समय शुरू हो गया है। किसान करण सिंह भांबू ने कहा कि कपास की बुआई के लिए इस समय मौसम भी अनुकुल है।
फसल सितम्बर के अंतिम पखवाड़ा से अक्टूबर तक पककर तैयार हो जाती है
बुआई के समय इसमें बीज प्रति हैक्टेर 5 से 6 पैकिंग प्रति किलो बुआई की जाती है। इसमें किसान द्वारा हाथ से एक एक बीज निश्चित दूरी के साथ मिट्ठी में बीज बोए जाते हैं। यह फसल सितम्बर के अंतिम पखवाड़ा से अक्टूबर तक पककर तैयार हो जाती है।

बाजार में यह करीब छह हजार रुपए क्विंटल की दर से बिकती है। इसमें मई से अक्टूबर तक छह सिंचाई की जाती है। इसी तरह से अभी बीटी कोटन की बुआई के लिए समय उपयुक्त है। कपास की बुआई के बाद छह सिंचाई करनी पड़ती है।

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