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आपदा में देखा अवसर:झाड़ियों की जगह बना गार्डन, बंजर भूमि पर 1 हजार पौधे लगा बनाया ऑक्सीजन ट्रेक

नागौर8 दिन पहले
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  • लॉकडाउन का सदुपयोग कर शिक्षकों ने जनसहयोग से स्कूलों की तस्वीर ही बदल दी, अब बच्चों के लिए बढ़ेगी कई प्रकार की मशीनें

आपदा बनकर आए कोरोना ने स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई पर ताले लगा दिए। सरकार ने निजी स्कूल की तर्ज पर ऑनलाइन एजुकेशन के लिए स्माइल प्रोजेक्ट शुरू किया, मगर इंटरनेट कनेक्टिविटी और हर छात्र के पास मोबाइल नहीं होने से सफल नहीं हो पाया। कोरोना काल में शिक्षक तो आ रहे मगर बच्चों की पढ़ाई पर स्कूलों में ब्रेक लगा हुआ है। इसी बीच कई शिक्षक ऐसे भी सामने आए जो इस आपदा को अवसर में बदल दिया है।

भास्कर ने ग्राउंड से रिपोर्ट जुटाई तो सामने आया कि स्कूलों में रुटीन काम करने के बाद अब कई शिक्षकों ने जनसहयोग से स्कूल हित के लिए कई नवाचार करके स्कूलों की तस्वीर ही बदल दी। किसी ने बंजर जमीन पर पौधे लगा ऑक्सीजन ट्रैक खड़ा कर दिया। स्कूल परिसर में जहां झाड़ियां उगी थी वहां गार्डन विकसित हाे रहा है। पढ़िए भास्कर की खास रिपोर्ट...

माह में स्कूल की बदली तस्वीर देख सहयोग के लिए भामाशाह आगे आ रहे है। अब जिलेभर के शिक्षक व अभिभावक समझने लगे है और खुद भी बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना चाहते है। ताकि विद्यार्थियेां की शिक्षा पर कोई विपरित असर नहीं पड़े। गौरतलब है कि लंबे समय से स्कूल व कॉलेज बंद पड़े है। जबकि इस समय तक अर्द्धावार्षिक कोर्स हो जाता है।

1. जहां डालते थे कचरा, वहां 15 माह में 15 लाख जुटा बदली दी सूरत
शहर के संत बलराम दास कॉलोनी की यह राउप्रावि संख्या-2 की तस्वीर है। 15 माह पहले यहां स्कूल परिसर में लोग गंदगी डालते थे और कंटीली बबूल की झाडिय़ां उगी थी। मगर जुलाई-2019 में जैसे ही यहां प्रधानाध्यापक लगे धर्मपाल डोगीवाल अपने जोश-जुनून के बदौलत 15 माह में ही शिक्षा और विकास में पिछड़े इस सरकारी स्कूल की तस्वीर बदल कर रख दी। उन्होंने भामाशाह के सहयोग से पूरे स्कूल परिसर से जेबीसी की सहायता से झाड़ियां और गंदगी हटवाई।

मिशन तय कर हर माह सघन पौधरोपण करवाकर ईंटों के ट्री गार्ड भी बनवाए, जो अब पेड़ का रूप ले रहे है। यहां बूंद-बूंद सिंचाई की व्यवस्था की। बिजली फिटिंग, स्कूल भवन की मरम्मत और रंगरोगन करवाया। बच्चों के बैठने कक्ष कम थे तो भामाशाह को प्रेरित कर 10 लाख के सहयोग से दो कक्ष और बरामदा बनवा दिया। कंप्यूटर लैब को सुधारा। अब राशि जुटा स्कूल परिसर वाटिका कुछ है

2. ये 1000 पेड़ों का ऑक्सीजन ट्रेक, पहले जहां थी बंजर जमीन

तस्वीर बालवा राेड स्थित स्वामी विवेकानंद माॅडल स्कूल के खेल मैदान की है। यहां कुछ माह पहले जमीन बंजर थी। उसमें जगह-जगह कंटीली झाडिय़ां उगी थी। मगर यहां स्कूल के प्रधानाचार्य मनीष पारीक व अन्य स्टाफ ने बीड़ा उठाते हुए भामाशाह के सहयोग से बंजर भूमि की तस्वीर बदल दी। करीब 12 बीघा जमीन पर दीवार के पास कतारबद्ध एक हजार नीम सहित अन्य किस्म के पौधे लगाए। अब वो पेड़ का रूप ले चुके है।

साथ ही स्कूल परिसर में भामाशाह के सहयोग से ट्यूबवेल खुदवा पौधों में सिंचाई के लिए पूरे परिसर में पाइप बीछा कर बूंद-बूंद तकनीकी की व्यवस्था की। बारिश संचय के लिए दो टैंक भी बनवा दिया। साथ ही पौधों के पास लंबा ट्रैक भी भामाशाह के सहयोग से बनवा रहे है। ताकि स्कूल आने वाले विद्यार्थी भ्रमण सहित दौड़ लगा सके। साथ ही ग्राउंड के अंदर धोब लगा गार्डन भी विकसित किया जा रहा है। बंजर स्थल भूमि हरियाली में बदल गई।

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