जिले में अब तक 9 कोरोना पॉजिटिव:जीनोम सिक्वेंसिंग से पता चलेगा कि नए संक्रमितों में वैक्सीन के बाद कौनसा स्ट्रेन पनपा, जयपुर भेजे सैंपल

नागौर14 दिन पहले
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जिले में डेढ़ महीने के बाद अचानक हुई कोरोना की दस्तक ने स्वास्थ्य विभाग की धड़कनों को भी बढ़ा दिया है। कोरोना के किसी नए स्ट्रेन की संभावनाओं को दरकिनार किए बगैर ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने बगैर देरी किए मरीजों के सभी सैंपलों को जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए जयपुर स्थित प्रयोगशाला में भेज दिया है। इससे कोरोना के इस स्ट्रेन की पूरी हकीकत सामने आ सके। साथ ही पता लगाया जा सके कि जो संक्रमितों में कोरोना का अब कौनसा वायरस पनपा है। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि कुछ देशों में कोरोना महामारी की तीसरी लहर के स्ट्रेन भी मिले हैं। ऐसे में वायरस को हल्के में लेना बड़ी त्रासदी की ओर भी धकेल सकता है। क्योंकि कोरोना की दूसरी लहर में जिला बड़े स्तर पर जनहानि का सामना कर चुका है।

जिले में अब तक नागौर, कुचामन, रियांबड़ी, मेड़ता से कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं दर्जन से ज्यादा बताए हैं कोरोना के स्ट्रेन, ए-2, बी-4 तथा ए-3 जैसे स्ट्रेन शामिल चिकित्सकों के अनुसार कोरोना वायरस के अब तक एक दर्जन से ज्यादा स्ट्रेन की जानकारी सामने आ चुकी है। इनमें सार्स कोविड से लेकर कोरोना वायरस तक के स्ट्रेन शामिल हैं। इनमें ए-2, बी-4 तथा ए-3 जैसे स्ट्रेन शामिल हैं।

जिले में अब काेरोना के 9 एक्टिव केस
गुरुवार को कोरोना के दो और संक्रमित सामने आए। जो नावां क्षेत्र के हैं। इस तरह जिले में कोरोना के एक्टिव केस की संख्या 9 तक पहुंच गई है। गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग ने 959 सैंपल लिए। इनमें से 11 सैंपल की जांच आनी शेष है।

वैक्सीन वाले हुए हैं संक्रमित
सीएमएचओ डाॅ. मेहराम महिया ने बताया कि अब तक नागौर, कुचामन, रियांबड़ी, मेड़ता से कोरोना संक्रमित मिले हैं। इनमें वैक्सीन लगवाने तथा नहीं लगवाने वाले भी शामिल हैं। ऐसे में अब जांच के बाद ही कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में जानकारी सामने आएगी। वैक्सीन लगवाने वालों में कोरोना की वेदना कम होती है। उनको सांस लेने में तकलीफ बहुत कम होती है। वहीं जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई है उनको काफी वेदना से गुजरना पड़ सकता है।

मरीज बढ़ रहे हैं वैक्सीन जरूरी है: कलेक्टर सोनी
कोरोना मरीज बढ़ रहे हैं। वैक्सीन लगवाना जरूरी है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित कर दिया गया है कि वह कोविड मैनेजमेंट की गाइड लाइनों का सख्ती से पालना करे। कोरोना के किसी नए स्ट्रेन की आशंका को लेकर वैक्सीन जरूरी है।- डाॅ. जितेन्द्र कुमार सोनी, कलेक्टर, नागौर।

जीनोम सिक्वेंसिंग किसी वायरस का बायोडाटा होता है। कोई वायरस कैसा है व किस तरह से दिखता है इसकी पूरी जानकारी जीनोम से ही मिलती है। इसके अलावा इसी वायरस के विशाल समूहों को जीनोम कहा जाता है। जबकि इस वायरस के बारे में जानने की पूरी विधि को जीनोम सिक्वेंसिंग कहा जाता है, जिससे कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में पता किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार मानव कोशिकाओं के भीतर आनुवांशिक पदार्थ होता है, जिसे डीएन व आरएनए कहा जाता है। इन सभी पदार्थों को सामूहिक रूप से जीनोम कहा जाता है। वहीं स्ट्रेन को वैज्ञानिक भाषा में जेनेटिक वेरिएंट कहते हैं। हालांकि इनकी क्षमता अलग-अलग होती है। इनके आकार तथा स्वभाव परिवर्तन भी पूरी तरह से अलग होता है।

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