वेतन और सेवा की शर्तें:लोक सभा में जन धन खाता धारकों की पीड़ा व कोर्ट में पिछड़ों, को प्रतिनिधित्व दे : सांसद

नागौर2 महीने पहले
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हाईकोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन और सेवा की शर्तें) संशोधन विधेयक, 2021 की चर्चा में भाग लेते हुए सांसद बेनीवाल ने न्यायपालिका में न्यायाधीशों के पद पर ओबीसी, दलित व पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व की मांग भी उठाई। सांसद ने कहा कि दलित-आदिवासी-पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की बात नहीं सुनी जाती, उन्हें न्याय नहीं मिलता। लोकतंत्र के दो स्तंभ विधान पालिका और कार्यपालिका में आरक्षण है तो न्यायपालिका में क्यों नहीं। कोलीजियम पद्धति में न्यायाधीश ही न्यायाधीश की नियुक्ति करते हैं। देश में संविधान का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए बनी यह संस्था अपने यहां नियुक्तियों पर एकाधिकार क्यों चाहती है? क्या कारण है कि आरक्षण जैसी समावेशी व्यवस्था को न्यायपालिका में तरजीह नहीं दी गई? उन्होंने कहा कि बात सिर्फ आरक्षण का नहीं है, बल्कि सबके लिए अवसर होने चाहिए। बेनीवाल ने कहा कि शोषित वंचित जातियों के साथ तो भेदभाव तो है ही, लेकिन गरीब स्वर्ण या गरीब ब्राह्मण का लड़का-लड़की भी वहां तक पहुंचने का सपना नहीं देख सकता है। सांसद ने कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति संघ लोकसेवा आयोग की परीक्षा पास करके भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा आदि में जा सकता है और देश के शीर्ष प्रशासनिक पद संभाल सकता है, लेकिन वह देश की शीर्ष न्यायपालिका का न्यायाधीश नहीं बन सकता है,उन्होंने कहा कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में 400 से अधिक रिक्तियां हैं, किंतु वहां भी न्यायाधीशों की नियुक्ति की दिशा में कोई उल्लेखनीय पहल नहीं की गई। यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब निचली अदालतों में करीब 3.8 करोड़ और उच्च न्यायालयों में 57 लाख से अधिक तथा उच्चतम न्यायालय में एक लाख से अधिक मामले लंबित हैं। डिजिटल ट्रांजेक्शन के नाम पर शुल्क काटना न्यायोचित नहीं : लोक सभा में शून्य काल में रालोपा राष्ट्रीय संयोजक व सांसद हनुमान बेनीवाल ने पीएम जन-धन योजना के अन्तर्गत खाता धारकों से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सहित अन्य बैंकों द्वारा डिजिटल ट्रांजेक्शन के नाम पर गलत रूप से काटे गए शुल्क का मुद्दा उठाते हुए गलत रूप से काटी गई राशि पुन: लौटाने की मांग की है। सांसद ने सदन में आईआईटी बॉम्बे की ट्रांजेक्शन शुल्क की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2017 से 2019 तक महीने में 4 से अधिक डिजिटल लेन देन पर 12 करोड़ जन धन खाता धारकों से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा वसूले गए 164 करोड़ रुपए की तरफ सरकार का ध्यान आकर्षित किया। साथ ही उन्होंने पीएम व वित्त मंत्री से कहा कि एसबीआई सहित अन्य बैंकों द्वारा भी वसूले गए इस प्रकार के गलत शुल्क की स्टेट्स रिपोर्ट मंगवाकर वापिस खाता धारकों को राशि लौटाने की मांग की।

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