जुनून और मेहनत ने दिलाई सफलता:पति चाहते थे पत्नी अफसर बने, उनके निधन का सदमा झेल 3 साल पढ़ाई कर बनी आरएएस

नागौर3 महीने पहले
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  • ठाकरियावास की सरिता ने इससे पहले कभी कोई प्रतियोगी परीक्षा नहीं दी थी

यह डीडवाना के ठाकरियावास गांव निवासी 23 वर्षीय सरिता चौधरी हैं। इनके पति प्रशांत इशरावां का निधन 3 साल पहले हार्टअटैक आने से हो गया था। पति के अचानक इस तरह चले जाने से सरिता को बड़ा सदमा लग गया। वह करीब एक साल तक डिप्रेशन की स्थिति में रही। फिर अपने आप को संभाला और खड़ा किया। क्योंकि जिंदा रहते पति प्रशांत चाहते थे उनकी पत्नी सरिता आरएएस बने। इसे लेकर वह उन्हें गाइड भी करते थे। पति भले ही जीवन के इस सफर में उनका साथ बीच में छोड़ गए, मगर सरिता ने पति प्रशांत के सपने को पूरा करने का मन में ठान लिया था।

उन्होंने अपने जेठ प्रदीप (प्रधानाध्यापक) के हौसला अफजाई व सहयोग से जयपुर में रहकर स्प्रिंग बोर्ड कोचिंग से 3 साल तक लगातार तैयारी की। सरिता की मेहनत रंग लेकर आई और आरएएस- 2018 के अंतिम परिणाम में उनका विधवा कैटेगरी में 75वीं रैंक के साथ चयन हुआ है। डीडवाना के ठाकरियावास निवासी प्रशांत इशरावां पढ़ाई में होशियार थे। वह मात्र 18 वर्ष की आयु में ही सरकारी शिक्षक बन गए थे।

21 आयु में उनका हार्टअटैक आने से निधन हो गया था। उनकी शादी सरिता चौधरी नेतड़ों की ढाणी डीडवाना के साथ हुई थी। प्रशांत व सरिता के साढ़े 4 साल की एक बच्ची भी है। सरिता व उनकी बड़ी बहन की एक ही घर में शादी हुई थी। 20 वर्ष की आयु में पति के निधन के बाद 23 वर्ष की आयु में सरिता का आरएएस में चयन हो गया।

बीएड के साथ आरएएस परीक्षा की करी तैयारी
सरिता चौधरी ने आरएएस बनने से पहले कोई भी प्रतियोगी परीक्षा में भाग नहीं लिया था। उन्होंने बीएड करने के साथ-साथ आरएएस की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने पहले ही प्रयास में 3 साल तैयारी कर आरएएस बनने के सपने को पूरा किया है। सरिता की यह सफलता हर किसी के लिए प्रेरणादायक है।

हौसला बढ़ाया तो मुकाम हासिल किया : प्रदीप
जेठ प्रदीप इशरावां बताते हैं कि छोटे भाई प्रशांत का अचानक निधन से उनके परिवार को ही नहीं, सरिता को सबसे ज्यादा सदमा लगा। वह करीब 1 साल तक डिप्रेशन में रही। उन्होंने हौसला अफजाई की और पा ली सफलता।

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