सेवा ही जिंदगी का मकसद:पति अपनी दोनों पेंशन का 80% गोशालाओं में देते हैं, पत्नी बैग सीलकर कमाई से करा रही जरुरतमंद बेटियों की शादी

नागौर9 महीने पहले
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आनंद कंवर बैग सीलकर 22 बेटियों के विवाह में 3 लाख का आर्थिक सहयोग कर चुकी हैं। - Dainik Bhaskar
आनंद कंवर बैग सीलकर 22 बेटियों के विवाह में 3 लाख का आर्थिक सहयोग कर चुकी हैं।
  • नावां के मूल निवासी करणी कॉलोनी में रहते हैं
  • पति रिटायर फौजी हैं साथ ही एलआईसी से भी रिटायर हैं
  • 9 साल में पति 40 लाख तो पत्नी 6 साल में कर चुकी 3 लाख की सेवा

ये हैं नावां तहसील के गांव हुड़ील चारणावास के मदनदान किनियां व उनकी पत्नी आनंद कंवर। उम्र होगी कोई 68 वर्ष। दोनों का मकसद एक ही है- सेवा। पति गोसेवा में तल्लीन हैं तो पत्नी जरुरतमंद बेटियों की शादी में सहयोग देने में। पति मदनदान अब तक पांच जिलों की 25 गोशालाओं में 15 ट्यूबवैल खुदाने व छप्पर और चारे आदि में 40 लाख का दान दे चुके तो पत्नी घर पर ही बैग सीलकर उन्हें बेचकर होने वाली आय से जरुरतमंद 22 बेटियों की शादी में अच्छा-खासा सहयोग कर चुकी हैं।

यूं तो इनके खुद की कोई संतान नहीं हैं लेकिन विभिन्न गोशालाएं जहां इन्होंने ट्यूबवैल खुदवाए हैं और चारा पानी दिया है उनमें रहने वाली 5 हजार से ज्यादा गायें और जिन बेटियों की शादी में इन्होंने सहयोग दिया है, उन्हें अपनी मानते हैं। बकौल मदनदान, उनका कुनबा पांच हजार से ज्यादा गायों व 22 बेटियों का है। दोनों के जीवन का मुख्य मकसद अब बस सेवा ही रह गया है। यही उनका परिवार है। जानिए कैसे हुई शुरूआत...

नकद पैसा कहीं नहीं देते, जरुरत की वस्तु पहुंचाते हैं

मदनदान बताते हैं कि वे सेना से 1989 में रिटायर हो गए थे। फिर एलआईसी में नौकरी की। यहां से 2013 में रिटायर हुआ। एलआईसी में जहां मैं बैठता था,उसके सामने सालों से एक तस्वीर टंगी थी जिसमें एक गाय को भगवान श्रीकृष्ण चूम रहे थे। यह तसवीर मैं रोज देखता था लेकिन कभी कुछ ज्यादा सोचा नहीं।

रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले मन में विचार चल रहा था कि आखिर इस पैसे का करूंगा क्या? तभी वह तस्वीर दिख गई। उसे देखकर मन में उथल-पुथल मचने लगी। ठाना कि जिस गाय की सेवा भगवान ने की है, क्यों न उसी की सेवा की जाए। तभी से गोसेवा शुरू कर दी। हां, मैंने कभी किसी गोशाला में नकद राशि नहीं दी। जरुरत की वस्तु ही दी है। देने से पहले वहां स्थिति भी देखता हूं।

जज्बा- 15 ट‌्यूबवैल व 25 छप्पर बनवा चुके हैं

अब तक नागौर, चूरू, जोधपुर, सीकर सहित छत्तीसगढ़ की गोशालाओें में 15 ट्यूबवैल बनवाए हैं। 25 गोशालाओं में चारा डालने के छप्पर बनावा चुके हैं। 10 श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन करवाया है। मदनदान अपनी दोनों पेंशनों का 80 प्रतिशत हिस्सा और पूरी आय का ब्याज गोसेवा में ही लगाते हैं।

निशुल्क सीलकर देती हैं लड्डूगोपाल की पौशाकें

आनंद कंवर बैग सीलकर 22 बेटियों के विवाह में 3 लाख का आर्थिक सहयोग कर चुकी। अब लड्‌डूगोपाल की पोशाक सिलती हैं। खास बात यह है कि पोशाक सिलाई के लिए कोई शुल्क नहीं लेती हैं। आनंद कंवर बताती हैं, पति की सेवा भावना देखकर ही मैंने सोचा कि क्यों न मैं जरुरतमंद बेटियों का जीवन सुगम बनाऊं।

कहा, कई साल पहले मेरी एक दूर की रिश्तेदार की बेटी को ससुराल में इसीलिए दुख झेलना पड़ा कि वह दहेज में घरेलु वस्तुएं ज्यादा नहीं ले जा सकी थी। मैंने सोचा, किसी जरुरतमंद बेटी को उसकी जरुरत का सामान देने से अगर उसका जीवन सुखमय होता है तो मैं ऐसा ही करुंगी और मैं शादियों में जरुरत का सामान ही देती हूं।

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