अव्यवस्था / 2018 में भर्ती किए 75 में से 22 सफाईकर्मी मूल काम को छोड़ दूसरी जगह कर रहे कार्य

In 2018, out of 75 recruited, 22 sweepers are doing work other than original work
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In 2018, out of 75 recruited, 22 sweepers are doing work other than original work

  • पौने दो लाख की आबादी पर मात्र 253 सफाईकर्मी, शहर की सफाई व्यवस्था चरमराई

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 07:22 AM IST

नागौर. अनेक विवादों के बीच नगर परिषद द्वारा वर्ष 2018 में 75 नए सफाई कर्मचारियों की भर्ती की थी। नई भर्ती के बाद दावा किया गया कि अब शहर की सफाई व्यवस्था सुधर जाएगी। लेकिन वो सभी दावे खोखले साबित हुए हैं। करीब पौने दो लाख की आबादी वाले शहर में सफाई व्यवस्था कायम रखने के लिए 253 सफाई कर्मी लगाए गए हैं। इनमें से 22 सफाई कर्मी डेपुटेशन के नाम पर अन्य जगहाें पर लगकर दाे साल से मूल काम काे छाेड़कर दूसरे कार्य कर रहे हैं। इनमें से कई जनों को तो कार्यवाहक जमादार तक का पद दे दिया गया है। जबकि सफाई कर्मचारियों को सफाई के ही काम में लगाने के आदेश भी डीएलबी ने दे रखे हैं। इन दिनों शहर में सफाई व्यवस्था ज्यादा खराब हो चली है। सफाई के अभाव में गली- मोहल्ले के अलावा मुख्य बाजार में भी गंदगी पसरी नजर आ रही है। गली मोहल्लों की साफ-सफाई को तो अर्सा बीता है। वर्षों से पंप हेल्पर का कार्य कर रहे एक कार्मिक ने मूल काम छोड़कर कार्य कर रहे कार्मिकों की जानकारी सूचना के अधिकार से मांगी तो उसको वापस सफाई के कार्य में लगा दिया है। जिसकी शिकायत कार्मिक ने कलेक्टर और डीएलबी को की है।

सफाई कार्मिक ने ही उठाया है कार्रवाई का मुद्दा, जांच की मांग
स्वायत शासन विभाग और कलेक्टर को ज्ञापन देकर कार्मिक हनुमान गांछा ने बताया कि नगर परिषद में सफाई कर्मचारी भर्ती 2012 व 2018 में सफाई कर्मियों के पद पर नियुक्ति की थी परंतु कई कर्मचारियों ने सांठगांठ करके मूल पद से हटकर सफाई कर्मचारी का कार्य नहीं कर रहे हैं। कार्यवाहक जमादार, कार्यालय सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर, इत्यादि में अन्य कार्य में लगे हुए हैं। इस संबंध में 11 मार्च 2020 को जनसुनवाई में परिवाद भी दिया था। वरीयता और अनुभव के आधार पर कार्य कर रहा था। 5 माह पहले सूचना के अधिकार के तहत नकल मांगने पर पंप हेल्पर से हटाकर जूनियर सफाई कर्मचारी को पदोन्नति कर लगा दिया है जो बिना कैडर चेंज किए हुए लगाया गया है। कार्मिक ने डेपुटेशन पर लगे सफाई कार्मिकों की जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में नगर परिषद आयुक्त जोधाराम बिश्नोई ने बताया कि भर्ती किए गए सभी कार्मिकों को उनके मूल काम में लगा रखा है। हो सकता है एक-दो जनों को चौकीदारी में लगा रखा हो और कुछ को ऑफिस की सफाई में लगा रखा है वह भी सफाई कार्य ही है। नियम विरुद्ध जमादारी का चार्ज करने के आरोप पर बताया कि कुछ समय के लिए जमादारी में लगाते हैं, क्योंकि वे सफाई कर्मचारी हैं। जानकारी अनुसार नगर परिषद ने डीएलबी के आदेश पर जिन सफाई कर्मियों की भर्ती की थी उनमें अधिकांश वे लोग आए जो सफाई करना नहीं चाहते थे। नगर परिषद के रास्ते डेपुटेशन के आधार पर दूसरे जगह लगना चाहते थे। इधर, बाकी जो कार्मिक मूलरूप से सफाई के कार्य में लगे हैं उनको शहर में जहां कहीं पर भी सरकारी कार्यक्रम या चुनाव ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जाते हैं तो बाकी बचे सफाई कर्मचारियों को उस जगह की साफ-सफाई करने के लिए लगाया जा रहा है।

नतीजा-एक साल में रैंकिंग में 96 अंक पिछड़े, लोग हो रहे हैं परेशान और नाराज
नगर परिषद स्वच्छता समिति की बैठक जब भी आयोजित होती है ऐतिहासिक प्रस्ताव लेकर इतिश्री की जाती है। बोर्ड बैठकों में लिए गए निर्णय के अनुसार कचरा संग्रहण वाहन पर जीपीएस लगाने, सड़क पर निर्माण सामग्री फैलाने पर जुर्माना, सड़क पर कचरा फेंका तो 500 रुपए जुर्माना, सड़क किनारे पशुओं को हरा चारा खिलाने पर जुर्माना, गलियों की सफाई के लिए हाथ ठेले लगाने थे। लेकिन यह सब निर्णय धरातल पर आज तक गौण है। इसके विपरीत जो व्यवस्था है वो ही नहीं संभल पा रही है। उधर, आम लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता के अभाव में इस वर्ष स्वच्छता रैंकिंग में नागौर पिछड़ गया है। वर्ष 2018 की रैंकिंग के मुकाबले 2019 में 96 अंको से पिछड़ा है। इस वर्ष कोरोना के कारण स्वच्छता रैंकिंग की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि शहर के हालाता देखे जाए तो आंकड़ों में कमी ही आएगी। शहर के कई वार्डो में गदंगी हालात से बेकाबू है।

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