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घरों पर ही अदा की जुम्मातुल विदा की नमाज:जाजोलाई में 8 साल के शेफान ने रखा जीवन का पहला रोजा, देश में अमन-चैन की दुआएं की

नागौर2 महीने पहले
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मूण्डवा - Dainik Bhaskar
मूण्डवा

शुक्रवार को देश भर में रमजान के आखिरी जुम्मे की नमाज पढ़ी गई। इसके लिए रोजेदारों ने सुबह से ही तैयारियां शुरू कर दी। ऐसा माना जाता है कि रमजान के आखिरी जुम्मे की नमाज को अदा करने से दुआएं कबूल होती है। खुदा रोजेदारों पर रहमतों की बारिश करता है और लोगों में प्यार और भाईचारा बढ़ाता है। इस बार कोविड-19 के कारण शुक्रवार को इस पाक महीने के चौथे जुम्मे यानी अलविदा की नमाज लोगो नें घरों पर ही अदा की। अ.सतार देवडा, जाकीर हुसैन देवड़ा, अ.रहमान देवड़ा, लाड मोहम्मद खोखर, आसिफ देवड़ा, रेहान, अमन व रूहान देवड़ा सहित परिवार के लोगों ने शाम को इफ्तार कर रोजा खोला व अमन चैन की दुआ मांगी।

बासनी| माहे रमजान के आखिरी जुम्मे की नमाज शुक्रवार को बासनी में घरों में अदा की गई। माहे रमजान का आखिरी जुम्मा ईबादत के लिहाज से सबसे खास और अहम माना जाता है। इस दिन को जुम्मातुल विदा भी कहा जाता है। यानी माहे रमजान अब रूखसत की ओर है। आयशा मस्जिद के ईमाम मौलाना जावेद अमजदी ने बताया कि अल्लाह के नेक बंदे आखिरी जुम्मे को माहे रमजान की जुदाई समझकर गमगीन और संजीदा हो जाते है। वह महसूस करते है कि माहे रमजान में रोजे और तरावीह की बरकतें एवं सहरी और इफ्तार की फजीलते पूरी हो रही है।

मौलाना ने कहा कि एतबार खात्मे का है। यानी जो आखिरी लम्हें बचे है उनकों गनीमत जानकर उनकी कद्र ही जाए और गफरत हुई तो उसकी माफी के लिए इन आखिरी लम्हों से फायदा उठाया जाए। खुदा की बारगाह में सजदा रेंज होकर अपने, अपने वालिदैन और दोस्त अहवाब की बख्शिष की दुआं करें। मौलाना अमजदी ने बताया कि कोरोना बीमारी की वजह से जो लोग हलाक हो जाए है उनके लिए इसाले सवाब करें। जो लोग इस बीमारी से ग्रीस्त है उनके लिए खास तौर से दुआं करें।

बासनी में जुम्मातुल विदा के मौके पर 7 साल की अफसा बानो ने पहला रोजा रखा उसके पिता मोहम्मद साद्विक ने बताया कि कोरोना के चलते अफसा ने सादगी से रोजा इफ्तार किया ना तो फूल-माला पहनी और ना ही परिजनों में मिठाईयां बांटी। असफा बानो ने बताया कि जब देश में लोग कोरोना के मर रहे है तो ऐसे में हम खुशी कैसे मना सकते हैं।

नागौर| जाजोलाई क्षेत्र में रहने वाले वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ताज मोहम्मद खान के पुत्र 8 वर्षीय शेफान खान ने शुक्रवार को अपनी जिंदगी का पहला रोजा रखा। मूलतया: कुचेरा के रहने वाले डॉ. खान के पुत्र शेफान को रोजा रखने की प्रेरणा अपने माता-पिता से मिली। शेफान के नाना वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी कुचेरा डॉ. शौकत खान ने उसकी हौसला अफजाही की।

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