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  • In The Pre monsoon Rains, The Farmers Of Nagaur Had Sown 4.51 Lakh Hectares, Now The Decisions Standing In The Field Are Being Destroyed By The Scorching Heat In July

बिन बारिश सब सुन:प्री मानसून की बारिश में नागौर के किसानों ने 4.51 लाख हैक्टेयर में कर दी थी बुआई; जुलाई में पड़ रही तेज गर्मी से खेत में खड़ी फसलें हो रही तबाह

नागौर5 महीने पहले
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बारिश के अभाव में खेत में बर्बाद होती फसलें। - Dainik Bhaskar
बारिश के अभाव में खेत में बर्बाद होती फसलें।

प्री-मानसून की ठीक-ठाक बारिश होती ही किसानों ने 4.51 लाख हैक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई कर दी लेकिन अब बारिश नहीं होने से उनकी अच्छी पैदावार की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। भास्कर टीम की पड़ताल में सामने आया कि 4.13 अरब रुपए खर्च कर जिले के किसानों ने मूंग, बाजरा, ग्वार-ज्वार सहित अन्य फसलों की बुआई की थी। 15 से 18 दिनों से जून-जुलाई माह में पानी नहीं मिलने, यानी समय पर बारिश नहीं होने के चलते 2.06 अरब की फसलें जमीन से बाहर निकलते ही 41 डिग्री तापमान में झुलस गई है।

खेत दोबारा खाली-खाली से नजर आने लगे हैं।
खेत दोबारा खाली-खाली से नजर आने लगे हैं।

खेत दोबारा खाली-खाली से नजर आने लगे हैं। कर्ज लेकर तेज धूप, उमस में ट्रैक्टर से बिजाई कर खेतों में भविष्य की किस्मत लिखने वाले अन्नदाता की 50 फीसदी फसलें उगते ही तबाह हो गई। ऐसा तब है जब डीजल के भाव 100 के रुपए के करीब तथा बीज के दाम रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। अगर किसान दोबारा भी खेतों में बुवाई करेंगे तो भी कोई गारंटी नहीं है कि अच्छी पैदावार होगी। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो जल्द ही बारिश नहीं हुई तो 80 फीसदी फसलें झुलसना तय है। फसलें सूखने का मतलब इन किसानों के 4.13 अरब रुपए डूबने के साथ 2.68 अरब रुपए नई बुआई पर खर्च करने पड़ेंगे।

बारिश के अभाव में खेत में बर्बाद होती फसलें।
बारिश के अभाव में खेत में बर्बाद होती फसलें।

बुआई करने 1 लाख किसान ले चुके 323.41 कराेड़ का कर्ज
खरीफ फसल की बुआई करने सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक नागौर से जिले के 1 लाख 2516 किसान अब तक 323.41 कराेड़ का ऋण ले चुके हैं। प्रबंध निदेशक पीपी सिंह ने बताया कि बैंक का इस बार अल्पकालीन फसली ऋण खरीफ सीजन में 450 कराेड़ ऋण वितरण का अगस्त 2021 तक टारगेट है। 345 ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को ऋण वितरित किया जा रहा है। 31 जुलाई 2021 तक ऋण प्राप्त करने वाले ऋणी सदस्यों को फसली सीमा का लाभ मिलेगा। इसके अलावा किसानों ने अन्य निजी बैंकों से भी बड़ा कर्ज लिया है।

4.51 लाख हैक्टेयर में जुताई पर कर दिए 2.61 अरब रूपये खर्च
किसानों ने सबसे पहले प्रति हैक्टेयर औसतन 3200 रुपए खर्च कर खेत में मिट्टी पलटने तवी से खड़ाई की। इसके बाद बारिश होते ही सीड ड्रिल से समतल करने (भाणी देने पर) व बीज बुआई पर प्रति हेक्टेयर 1300-1300 रुपए के हिसाब से खर्च किए। यानी 4.51 लाख हैक्टेयर में खड़ाई, समतलीकरण से लेकर बुआई पर प्रति हैक्टेयर 5800 रुपए खर्च के हिसाब से कुल 2 अरब, 61 करोड़ 62 लाख 58, 200 रुपए का खर्च आया।

  • मोठ की 4729 हैक्टेयर में बुआई हुई और प्रति हैक्टेयर 10 किलो बीज पर हजार रुपए खर्च हुए। यानी 4729 हैक्टेयर में 47.29 लाख खर्च हुए।
  • वहीं चाैला फसल की 849 हैक्टेयर में बुआई हुई और प्रति हैक्टेयर 15 किलो बीज के हिसाब से 1500 रुपए खर्च हुए। 849 हैक्टेयर में 12.73 लाख का खर्च आया।
  • तिल की 700 हैक्टेयर में बुआई हो चुकी, प्रति हैक्टेयर 4 किलो बीज के हिसाब से 250 रुपए खर्च आया। अकेले बीज पर ही किसानों के 1.75 लाख रुपए खर्च हुए।
  • ज्वार की 13680 हैक्टेयर में बुआई हुई। प्रति हैक्टेयर 20 किलाे बीज के 1600 रुपए के हिसाब से जिलेभर के किसानों के 2.18 कराेड़ रुपए खर्च हुए।
  • बाजरा की 1.79 लाख हैक्टेयर में बुआई हुई। प्रति हैक्टेयर 1080 हिसाब से 1.79 लाख हैक्टेयर में 19.36 करोड़ रुपए खर्च हुए। खाद प्रति हैक्टेयर 100 किलो के हिसाब से 1.79 लाख हैक्टेयर में 43.04 कराेड़ रुपए खर्च आया।
  • गवार की 58568 हैक्टेयर में बुआई हाे चुकी है और प्रति हैक्टेयर 20 किलों बीज 1600 रुपए के हिसाब से 9.37 कराेड़ रुपए खर्च हुए। प्रति हैक्टेयर खाद पर 1680 रुपए के हिसाब से 58568 हैक्टेयर में 9.83 कराेड़ रुपए खर्च अाया। किसानों के बीज व खाद पर 19.21 कराेड़ रुपए खर्च हुए।
  • मृूंग की 1.93 लाख हैक्टेयर बुआई हुई और प्रति हैक्टेयर 15 किलो बीज के हिसाब से 1800 रुपए खर्च किए। 1.93 लाख हैक्टेयर में 34.77 करोड़ खर्च हुए। खाद प्रति हैक्टेयर 1680 रुपए के हिसाब से 1.93 लाख हैक्टेयर में 32.45 करोड़ का खर्च आया।
जल्द ही बरसात नहीं हुई तो किसानों का 4.13 अरब रुपए डूबना तय।
जल्द ही बरसात नहीं हुई तो किसानों का 4.13 अरब रुपए डूबना तय।

फोटो : राजूराम कड़वा (लादड़िया)

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