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बढ़ रहा खतरा:वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के 2 माह बाद लाडनूं पीएमओ और एक स्वास्थ्यकर्मी कोरोना संक्रमित

नागौरएक महीने पहले
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कोरोना की दूसरी लहर डराने लगी है। चौंकाने वाली बात तो ये है कि कोवीशील्ड वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने के बाद भी जिले के हैल्थ वर्कर्स की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। टीके की दो डोज दो माह पहले ही लगवाने के बाद भी मंगलवार को जेएलएन हॉस्पिटल के एक स्वास्थ्य कार्मिक की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इससे चिकित्सा महकमे में हड़कंप मच गया।

यही नहीं, इसी 10 अप्रैल को लाडनूं पीएमओ भी इसी तरह कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। उन्होंने भी दो माह पहले दो डोज ले ली थी। ऐसे में कोरोना वैक्सीन लगवाकर संक्रमण मुक्त होने की सोचकर मास्क एवं सोशल डिस्टेसिंग से किनारा करने वालों को कोविड-19 के नियमों की तत्काल प्रभाव से पालना करनी चाहिए। साथ ही वैक्सीन लगवाने पर जोर देना चाहिए। इससे वेदना एवं जान का खतरा कम होगा।

दूसरी लहर में कोराेना और ज्यादा घातक है। जिले में एक और शख्स की मौत के साथ ही अप्रैल में मौतों का आंकड़ा 7 तक पहुंच गया है। सोमवार की रिपोर्ट में 58 लाेगों की कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आई। इसी तरह कोरोना के एक्टिव केस 406 पहुंच गए हैं। जबकि कुल संक्रमित 11039 तक पहुंच गए हैं, लेकिन इनमें से 10530 ठीक होने के बाद घर भी पहुंच चुके हैं। जिले में पॉजिटिव दर 3.80 प्रतिशत हो गई है। वहीं कोरोना से मृत्यु दर 0.93 तक पहुंच गई है।

टीका लगा है तो जान जाने का खतरा कम

हर वैक्सीन की अपनी एफीकेसी होती है। इसके आधार पर तय होता है कि कोई वैक्सीन किस हद तक प्रोटेक्शन दे सकती है। कोवैक्सीन की एफिकेसी 81% है। यानी किसी ने यह वैक्सीन लगवाई है तो उसे इन्फेक्शन होने की संभावना 81% तक कम हो जाती है। इसका मतलब यह नहीं कि वैक्सीन लगने के बाद इन्फेक्शन होगा ही नहीं।

इसी तरह कोवीशील्ड की एफिकेसी 62% से 80% तक है। यह दो डोज के अंतर पर निर्भर करती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक वैक्सीन के बाद भी वायरस इफेक्ट कर सकता है। इससे यह साबित नहीं हो जाता कि वैक्सीन खराब है। अच्छी बात ये है कि जिसे वैक्सीन लगी हो, उसे गंभीर लक्षण नहीं होते। अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं होती।

लाडनूं के पीएमओ डाॅ. कमलेश कस्वां ने 16 जनवरी को पहली और 14 फरवरी को दूसरी डोज लगवाई थी। 29 फरवरी तक इनमें एंटीबॉडी बन जानी चाहिए थी। अब दो माह बाद भी इनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। डॉ. कस्वां का कहना है कि अब उन्हें 8 अप्रैल को सामान्य खांसी, जुकाम हुआ। सांस की समस्या तो बिल्कुल नहीं हुई। 10 को रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। लेकिन कह सकता हूं कि वैक्सीन के बाद कोरोना को आसानी से सहा जा सकता है। अगर वैक्सीन नहीं लगवाई तो वेदना से तो गुजरना ही पड़ेगा, जान का खतरा भी बना रहेगा। गनीमत रही कि उन्होंने वैक्सीन लगवा रखी थी इससे कोरोना का दूसरा स्ट्रेन भी घातक नहीं हुआ।

ऐसा बहुत कम मामलों में होता है

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वैक्सीन का असर दूसरी डोज के 14 दिन बाद प्रभावी होता है। यानी उसके बाद शरीर में इतने एंटीबॉडी होते हैं कि वह वायरस से लड़ सकें। कोवैक्सिन के दो डोज में 28 दिन का अंतर रखा जाता है, जबकि कोवीशील्ड के दो डोज में 6 से 8 हफ्ते का अंतर तय किया गया है।
  • पहला डोज लगने के बाद इम्युनिटी रिस्पॉन्स शुरू होता है और 2-3 हफ्तों में इम्युनिटी बननी होना शुरू होती है। कुछ हफ्तों बाद इम्युनिटी कमजोर होने लगती है, जिसे बूस्टर डोज लगाकर हम बढ़ाते हैं। इम्युनिटी मरीजों की सेहत पर भी निर्भर करती है। वैक्सीन की एफिकेसी 80% है तो भी 10 में से 2 लोगों को इन्फेक्शन होने का खतरा तो रहता ही है।
  • एंटीबॉडी एक तरह के प्रोटीन हैं, जो वायरस को पहचानते हैं और उससे लड़ने के लिए शरीर को तैयार करते हैं। अगर किसी को कोरोना इन्फेक्शन हुआ है तो उसके शरीर में एंटीबॉडी भी होगी। इसका स्तर अलग-अलग व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है। इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स के मुताबिक 10-1000 आई यू (इंटरनेशनल यूनिट) एंटीबॉडी को वायरस के खिलाफ अच्छा प्रोटेक्शन माना जाता है।
  • यह जरूरी नहीं कि हर वैक्सीन सभी लोगों पर एक-सा असर दिखाए।

पहले मरीज: सीएमएचओ
सीएमएचओ डाॅ. मेहराम महिया ने कहा- वैक्सीन लगने के बाद ये पहले संक्रमित हैं। वैक्सीन के बाद भी संक्रमित आ सकते हैं पर ऐसा बहुत कम ही होता है। वैक्सीन जरुर लगवाएं।

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