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  • Last Year, 81% Of The Area Was Sown In 167 Mm Of Rain, This Time Only 70 Mm Of Rain Fell, 52 Percent Of The Area Was Not Cultivated

मानसून की बेरुखी से 48.12% हिस्से में ही खेती:पिछले साल 167 एमएम बारिश में 81% क्षेत्र बोया, इस बार 70 एमएम ही बरसा, 52 फीसदी क्षेत्र में नहीं हुई खेती

नागौर13 दिन पहले
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मेड़ता क्षेत्र में बारिश के अभाव में खेतों में खड़ी फसल सूखने के कगार पर। - Dainik Bhaskar
मेड़ता क्षेत्र में बारिश के अभाव में खेतों में खड़ी फसल सूखने के कगार पर।
  • 11.25 लाख में से 5.41 लाख हैक्टेयर में ही बुआई

मानसून की बेरुखी से कृषि प्रधान नागौर जिले के आधे किसान भी अब तक खेती नहीं कर पाए। 20 जुलाई गुजर चुका है मगर जिले में बारिश का औसत आंकड़ा 70 एमएम (मिलीमीटर) काे भी नहीं छू पाया है। चौंकाने वाले हालात यह है कि बारिश में देरी की वजह से इस बार जिले में खरीफ की बुआई लक्ष्य से 52 प्रतिशत पिछड़ गई है। क्योंकि पिछले साल 20 जुलाई तक 81 प्रतिशत हिस्से में बुआई हाे चुकी थी। यानी में जिले में सूखे के हालात पैदा हो गए है।

भास्कर टीम ने पड़ताल की तो सामने आया कि वर्ष 2020 में 20 जुलाई तक 167.34 एमएम मानसूनी बारिश हो चुकी थी और किसान 11.68 लाख हैक्टेयर में से 9.43 लाख हैक्टेयर में खरीफ की बुआई कर चुके थे। मगर...इस बार 20 जुलाई तक जिले में मात्र 69.81 एमएम ही बारिश हुई। ऐसे में किसान लक्ष्य 11.25 लाख हैक्टेयर में से 5.41 लाख हैक्टेयर में ही बुआई, यानी खेती कर पाए। हालात ये है कि 52 फीसदी क्षेत्र 5.83 लाख हैक्टेयर में नागौर के किसान बारिश के इंतजार में अब तक खेती नहीं कर पाए है।

...और चिंता : 2 अरब की फसलें तबाह, बची फसलें भी मुरझाने लगी

प्री-मानसून की बारिश में किसानों ने 9 जुलाई तक 4.51 लाख हैक्टेयर में 413 करोड़ रुपए खर्च कर खरीफ फसलों की बुआई की थी। किसानों ने फसलें बोई मगर...15 से 18 दिनों तक बारिश नहीं होने के चलते 41 डिग्री भीषण गर्मी में 50 फीसदी 2 अरब से ज्यादा की फसलें झुलस गई।

इसके बाद 11 जुलाई को आए मानसून के बाद हुई बारिश के चलते किसानों ने 19 जुलाई तक कुल बुआई 5.41 लाख हैक्टेयर कर दी। किसानों ने 10 दिनों में ही 1.10 लाख हैक्टेयर में बुआई की। मगर मानसून से पहले बची 50 फीसदी में से अधिकतर हिस्से बारिश नहीं होने के चलते दम तोड़ रही है। करीब 2 अरब की फसलें मुरझाने लगी।

तहसीलवार बारिश के आंकड़ों पर नजर डाले तो नागौर में 139 एमएम, परबतसर में 77, डेगाना में 72, खींवसर में 84.6, डीडवाना में 63, जायल में 93, कुचामन में 65, लाडनूं में 51, मेड़ता सिटी में 53, मूंडवा में 68, नावां में 64, रियांबड़ी में 35, मकराना में मात्र 24 एमएम बारिश हुई।

अधिकारी बोले- कम समय में पकने वाली फसलें बोएं

​​​​​​जिले के अधिकतर हिस्से में बारिश नहीं होने के चलते 50 फीसदी क्षेत्र में बुआई नहीं हो पाई। मूंग, बाजरा, तिल, ग्वार जैसी फसलों की सीजन निकल चुका है। अगर बारिश होती है तो कम समय में पकने वाले किस्म के बीज की बुआई कर सकते है। मोठ बुआई कर सकते है।

.....श्योपाल सियाग, सहायक कृषि अधिकारी नागौर।

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