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रेलवे:लोको पायलेट को 11 वर्ष पहले मिलने थे एयरबैग, अभी लोहे के बक्सों का उपयोग

मेड़ता रोड3 महीने पहले
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  • रेल में लोको पायलेट व गार्ड्स 21वीं सदी में भी 18वीं सदी के नियम, देरी से हो रही है परेशानियां

रेलवे में लोको पायलेट व गार्ड के लिए अब भी भारी भरकम लोहे के बक्सें की योजना ही बरकरार है। जबकि 11 साल पहले रेलवे ने लोहे के बक्से के स्थान पर एयर बैग व सूटकेस की योजना का प्रस्ताव दिया था। मगर आज दिन तक पुराने नियमों के अनुसार लोहे के भारी भरकम बक्सें ही काम में लिए जा रहे है।

भारतीय रेल के लोको पायलेट आर गार्ड्स 21वीं सदी में भी 18वीं सदी के नियम ढो रहे है रेलवे बोर्ड की ओर से गार्ड और चालक के लोहे के बक्सों को बदलकर ट्रोली बैग देने की योजना तो बना ली गई है लेकिन रेलवे बोर्ड की लेटलतीफी की वजह से योजना हकीकत में नहीं बन पाई है और कागजों में ही अटकी है इस योजना के लिए बजट नहीं मिलने क कारण योजना सिरे नहीं चढ़ सकी।

रेल मंत्रालय ने वर्ष 2009 में एक्सप्रेस, पैसेंजर ट्रेन सहित मालगाड़ियाें के लोको पायलेट व गार्ड भारी भरकम लोहे के बक्से के स्थान पर एयर बैग व सूटकेस देने की हरी झंडी दी थी। इस नीति के तहत 21 वीं सदी के लोको पायलेट व गार्ड लोहे के बक्से के स्थान पर एयर बैग व सूटकेस रख सके। ताकि रंनिग स्टाफ अपने साथ आसानी से ले जा सके।

गार्ड अभी उठा रहे है लोहे के बक्से, एक से दूसरे प्लेट फॉर्म पर जाने में दिक्कतें

क्या है बक्सें में: बक्से में टेललेम्प, पटाखे, प्लास, चाबी, पाना, चार ताले, चैन, पूल, दो लाइट, टॉर्च, दो लाल एक हरि सहित तीन झंडी, व्हीकल बोर्ड, फस्र्ट एड बॉक्स, टाईम टेबल, किताबें, एमरजेंसी में भोजन बनाने की सामग्री, सामान्य रेल नियम, दुर्घटना नियमावली, परिचालन नियमावली, आदि, चालक के बॅाक्स में कुछ टूल अतिरिक्त होते है। यह बॉक्स चालक और गार्ड को इसलिए दिया जाता है कि आकस्मिक रूप से ट्रेन या मालगाड़ी में खराबी या बीच रास्ते ठहरने पर उपयोग किया जा सके।
बाइपास पर यह बक्सें बन गए है आफत
मेड़ता रोड के सी 99 ए के पास में बाइपास बनाया गया है। जहां पर मालगाड़ी के गार्ड, सहचालक, लोको पायलेट को ऑफ व ऑन ड्यूटी करने के दौरान इन बक्सों को इंजन व गार्ड वैगन से उतारना व चढ़ाना कोई खतरे से परे नहीं है। स्टेशन से बाइपास तक अनुबंधित बोलेरो कैंपर से ले जाने व लाने की विवशता बनी हुई है। बाइपास पर ऐसे बक्सें को इंंजन व गार्ड वैगन में उतारने व चढ़ाने में बॉक्स बॉय को भी काफी परेशानी होती है।

रंनिग स्टाफ के लोको पायलेट व गार्ड के साथ रहने वाले लोहे का बक्सा का अनुमानित वजन करीब 35 किलो है। इसे प्लेटफार्म से लेकर ट्रेन में रखने और ट्रेन से उतारने के लिए रेलवे को बॉक्स बॉय रखने पड़ते थे। हालांकि अभी तो कई बड़े स्टेशनों पर ठेका दिया हुआ है। कई बार एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर ले जाने के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

बड़े स्टेशन पर तो बक्सें ट्रेन अथवा मालगाड़ी में रखने व उतारने के लिए ठेके दे रखे है। मगर जब साईड स्टेशन पर मालगाड़ी के गार्ड को ऑन व ऑफ ड्यूटी किया जाता है। तब गार्ड को ही उतारने व चढ़ाने का कार्य करना पड़ता है। जबकि रेलवे का मानना था कि कर्मचारी के लिए भारी बक्सा ढोना उचित नहीं है। मगर उतर पश्चिम रेलवे जोन के जोधपुर मंडल में अब भी लोको पायलेट व गार्ड को सूटकेस व एयर बैंग देने की योजना अपना मूर्त रूप नहीं ले सकी है।

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