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अक्षय कुमार का किरदार निभा रहे पैडमैन महेंद्र:रील नहीं रियल लाइफ के पैडमैन हैं हरसौर के महेंद्र, मां से प्रेरणा ले अब तक 15 हजार सेनेटरी नैपकिन बांट चुके

नागौर8 दिन पहलेलेखक: जुगल दायमा
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गांवों में महिलाओं को सेनेटरी नैपकिन बांटते हुए महेंद्र। - Dainik Bhaskar
गांवों में महिलाओं को सेनेटरी नैपकिन बांटते हुए महेंद्र।
  • 2018 में रिलीज हुई मूवी पैडमैन ने भी माहवारी के प्रति महिलाओं को जागरूक किया था
  • अब साइकिल से सेनेटरी नैपकिन बांट रहा नागौर का हीरो

साल 2018 में रिलीज हुई फिल्म “पैडमैन’ में अक्षय कुमार ने पर्दे पर माहवारी के समय स्वच्छता बनाए रखने का संदेश दिया था मगर भास्कर ने पड़ताल की तो सामने आया कि नागौर जिले के हरसौर कस्बे के 23 साल के महेंद्र सिंह राठौड़ रियल के “पैडमैन”। 3 साल पहले मां उषा कंवर की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद से ही रियल लाइफ में कैरेक्टर रोल प्ले कर रहे हैं। महेंद्र वास्तविक जीवन में पीरियड से जुड़ी समस्याओं पर काम कर रहे हैं। उन्हें पैडमैन के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं उनके बारे में...

राजस्थान के नागौर जिले के हरसौर कस्बे में रहने वाले मेडिकल स्टूडेंट महेंद्र सोल्जर्स ऑफ होप इंडिया के वन विलेज एट ए टाइम प्रोजेक्ट के तहत अब तक गांवों में महिलाओं को निशुल्क 15 हजार सेनेटरी पैड बांट चुके हैं। तीन साल पहले सड़क दुर्घटना में मां की मौत हो गई थी। मां से मिली प्रेरणा पर ही महेंद्र ने महिलाओं के प्रति लोगों का नजरिया बदलने की जिद ठानी। महेंद्र महिलाओं को जागरूक कर रहे हैं।

मदद के लिए खुद ने एनजीओ चलाया, लगन देख दूसरे एनजीओ भी कर रहे सहयोग

मां के देहांत के बाद महेंद्र ने ‘मदर्स हैंड’ नाम का एनजीओ शुरू किया। महेंद्र के समर्पण और प्रतिबद्धता को देखते हुए अन्य एनजीओ भी उसके साथ जुड़ते गए। महेंद्र ने बताया कि सोल्जर्स ऑफ होप इंडिया के वन विलेज एट ए टाइम प्रोजेक्ट के तन्मय मिश्रा, शरा अशरफ, वीणापानी सेस्करिया, अच्युतन कानन ने बेहतर मार्गदर्शन दिया।

इस समूह से फिल्म अभिनेता, फैशन डिजाइनर, पुलिस अधिकारी और वकील जुड़े हुए हैं। उन्होंने कई और गांवों की मदद की है। मुहिम को सफल बनाने के लिए सोनल कालरा, डीआईजी नाजनीन भसीन, कर्मा फाउंडेशन, जीवन स्तम्भ फाउंडेशन, जीवन ही उद्देश्य फाउंडेशन, लिटिल इंडिया फाउंडेशन, महिमा सभरवाल, इंदू कोहली, डिम्पल जुनेजा, हरप्रीत आदि की टीम से स्पोर्ट मिला।

जागरूकता पाठ्यक्रम में शामिल होनी चाहिए: महेंद्र

महेंद्र ने भास्कर से बातचीत में बताया कि ग्रामीण इलाके की युवतियां सैनेटरी नैपकिन के इस्तेमाल से दूर है। बेटियां माहवारी के समय कपड़ा इस्तेमाल करने की जगह सैनेटरी नैपकिन का इस्तेमाल करें। महिलाएं व्यक्तिगत स्वच्छता को आत्मसात कर विभिन्न रोगों से स्वयं की रक्षा कर सकती है। ग्रामीण छात्राओं में मासिक धर्म की जागरूकता जरूरी है। यह जागरूकता उनके पाठ्यक्रम में शामिल की जानी चाहिए।

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