वराह भगवान की सबसे बड़ी रम्मत:प्रवासी राजस्थानी भी पहुंचे दर्शन करने, वराह अवतार 30 दिन तक निभाता है ब्रह्मचर्य

नागौर2 महीने पहले

नागौर स्थित नगरसेठ बंशीवाला मंदिर में सोमवार को वराह अवतार का मेला भरा गया। वराह अवतार का ये उत्सव जयपुर के बाद सिर्फ नागौर में ही होता है। वहीं इस मेले की सबसे बड़ी रम्मत भी नागौर में होती है। इस बार यहां मेले के प्रति उत्साह का ऐसा रहा कि मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद सहित कई अन्य शहरों से प्रवासी ये मेला देखने नागौर आए। शाम होते-होते नगरसेठ बंशीवाला मंदिर परिसर का पूरा मैदान श्रद्धालुओं से खचाखच हो गया। श्रद्धालु मंदिर और आस-पड़ोस के मकानों की छत पर भी चढ़ गए। पूजा अर्चना के बाद शाम को वराह अवतार धारण किए दीक्षांत पुजारी निज मंदिर से बाहर आए। उन्होंने अपने धरती को अपने नथुनों पर उठाकर धरती की रक्षा की। इसके बाद रात तक यहां वराह भगवान की रम्मत जारी रही।

मंदिर पुजारी ने बताया कि वराह अवतार का उत्सव नागौर शहर में 1970 से शुरू हुआ था। इस आयोजन में सबसे बड़ी रम्मत नागौर शहर में होती है। इस बार भी मेला आयोजन के दौरान बंशीवाला में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। वराह भगवान की झलक पाने के लिए सभी उत्साहित रहे।
मंदिर पुजारी ने बताया कि वराह अवतार का उत्सव नागौर शहर में 1970 से शुरू हुआ था। इस आयोजन में सबसे बड़ी रम्मत नागौर शहर में होती है। इस बार भी मेला आयोजन के दौरान बंशीवाला में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। वराह भगवान की झलक पाने के लिए सभी उत्साहित रहे।

दरअसल वराह अवतार लेकर विष्णु भगवान ने पृथ्वी को राक्षसों से बचाया था। बंशीवाले भगवान काे आज शृंगारित किया गया। वहीं वराह भगवान के उत्साह के लिए झालर और ढोल नगाड़े बजाए गए।वराह भगवान स्वरूप नगर सेठ बंशीवाले भगवान के दर्शन कर रम्मत के लिए मंदिर प्रांगण में निकले। इसके बाद धरती को बचाया और उसे गोद में लेकर रम्मत की गई। इसके बाद वराह भगवान द्वारा मंदिर के नौबतखाना की छत्रियों में जाकर रम्मत की गई।

शहर के बंशीवाला मंदिर में होने वाले इस बड़े मेले में कोई प्रबंधन टीम कार्य नहीं कर रही थी। बल्कि इसमें सभी भक्तों ने अपने स्तर पर व्यवस्था संभाली। शहर को एक अलग पहचान देने वाले इस मेले में हजारों की संख्या में लोग उमड़े।
शहर के बंशीवाला मंदिर में होने वाले इस बड़े मेले में कोई प्रबंधन टीम कार्य नहीं कर रही थी। बल्कि इसमें सभी भक्तों ने अपने स्तर पर व्यवस्था संभाली। शहर को एक अलग पहचान देने वाले इस मेले में हजारों की संख्या में लोग उमड़े।

वराह अवतार का स्वरूप धारण के लिए करनी पड़ती है कड़ी तपस्या
आपको बता दें कि वराह अवतार निभाने वाले युवक को 30 दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है। साथ ही बंशीवाला मंदिर में वराह अवतार का स्वरूप धारण करने के लिए पूरे विधि विधान से युवक को तैयार किया जाता है। इसमें युवक को स्वरूप धारण करने से पहले स्नान कर, नई जनेऊ धारण कर चंदन, कपूर और गुलाब के इत्र से शरीर पर लेप किया जाता है। इसके बाद वराह भगवान की पोशाक पहनाकर वराह भगवान का मुखौटा पहनाया जाता है। इसके बाद वराह भगवान के स्वरूप धारण करने वाले की पूजा अर्चना की जाती है।