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खेती-किसानी:डेढ़ माह बाद आएगा मानसून, कृषि वैज्ञानिक बोले- गर्मी में गहरी जुताई से बढ़ेगी फसलों की पैदावार

नागौर2 महीने पहले
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नागौर. खेत में जुताई करते हुए किसान। - Dainik Bhaskar
नागौर. खेत में जुताई करते हुए किसान।
  • साढ़े 12 लाख हैक्टेयर में होती है खरीफ की बुवाई, अभी खेतों में खड़ाई का उपयुक्त समय

1 जून से देश में मानसून की एंट्री की संभावना है। वहीं नागौर में मानसून 20 से 25 जून तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। नागौर जिले में साढ़े 12 लाख हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में खरीफ फसल की हर वर्ष बुवाई औसतन होती है। मगर किसान खेतों की जुताई अक्सर फसलों की बुवाई के समय करते है। जबकि फसलों में लगने वाले विभिन्न कीड़े एवं बिमारियों की रोकथाम की दृष्टि से गर्मी की गहरी जुताई बहुत अधिक लाभदायक है।

सहायक कृषि अधिकारी श्योपाल सियाग ने बताया कि किसानों को गर्मी में गहरी जुताई करने की तकनीकी सलाह दी गई। उन्होंने बताया कि गर्मी की गहरी जुताई करने से भूमि का तापमान बढ़ जाता है। जिससे कीड़ों के अंडे, प्यूपा और लार्वा काफी हद तक नष्ट हो जाते है, साथ ही मृदा जनित रोगों के रोगकारक भी तेज धूप से नष्ट हो जाते है।

गर्मी की जुताई मिट्टी पलटने वाले हल करने पर खेत को मिट्टी ऊपर नीचे हो जाती है। जुताई से मिट्टी की सतह पर पड़े पत्तियां पौधों की जड़े हुए हैं खेत की मिट्टी में खाद की मात्रा में बढ़ोतरी करते हैं जिसमें की खेतों की दशा में सुधार होता है। '

कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से गर्मी के मौसम में खेती को लेकर किसानों को जारी की गई है एडवाइजरी
कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों को गर्मी के दिनों में खड़ाई कर अच्छी फसल को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है। केंद्र प्रभारी डॉ. गोपीचंद सिंह ने बताया कि ग्रीष्मकालीन जुताई अच्छी फसल उत्पादन के लिए अति आवश्यक है। किसानों को खेती की गहरी जुताई की सलाह दी है। साथ ही बताया कि मृदा स्वास्थ्य के लिए गर्मी की जुताई का बहुत महत्व है।

मृदा उर्वरता सुधार के साथ फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े मकोड़ों को भी नष्ट कर देती है। गहरी जुताई और मिट्टी पलटने से खरपतवार नियंत्रण कर के पौधे के पोषक तत्वों के बीच प्रतिस्पर्धा कम हो जाती हैं, जिससे फसल उत्पादकता में वृद्धि होती है।फसल की अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए रबी की फसल को कटाई के तुरंत बाद गहरी जुताई करनी चाहिए।

सुबह का समय गहरी जुताई के लिए रहता है सबसे अच्छा : कृषि वैज्ञानिक
केंद्र प्रभारी के सस्य वैज्ञानिक डॉ. हरिराम चौधरी ने बताया कि सुबह का समय गहरी जुताई के लिए सबसे अच्छा रहता है। उन्होंने बताया कि किसी भी मिट्टी पलटने वाले हल को ढलान के विपरीत दिशा में 25 से 45 सेंटीमीटर गहराई तक जुताई करनी चाहिए। ज्यादातर किसान ढलान के साथ-साथ जुताई करते हैं जिसके कारण बारिश के साथ मर्दा कणों के बहने की क्रिया बढ़ जाती है, जिसके कारण मर्दा अपर्दन होता है।

ग्रीष्मकालीन में गहरी जुताई से मिट्टी की ऊपरी परत के टूटने से मिट्टी की पारगम्यता बढ़ जाती है। जिससे इन सीटू नमी सरंक्षण दर भी बढ़ जाती है। फल स्वरुप पौधे की जड़ों को आसानी से पानी उपलब्ध होता है। ग्रीष्मकालीन जुताई क्रम बंद, सुखाने और शीतलन के कारण मिट्टी दानेदार हो जाती है इसकी संरचना में भी सुधार आता है और वायु संचार बढ़ जाता है। जिससे सूक्ष्म जीवों की अभिक्रिया सक्रिय हो जाती है, जैविक तत्व का अपघटन तेजी से होता है।

जिससे पौधों को अधिक पोषक तत्व मिलते हैं। खरपतवारों व शाकनाशी सहित कीटनाशक अवशेषों और हानिकारक रसायनों के क्षय में भी मदद मिलती है। वर्षा जल को अवशोषित करने से मिट्टी में वायुमंडलीय नाइट्रेट क्षमता बढ़ती है जो उर्वरता में वृद्धि करती हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को गर्मी में गहरी जुताई करने की तकनीकी सलाह दी गई है। कृषि वैज्ञानिकों ने जानकारी देते हुए बताया कि गर्मी में गहरी जुताई करने से भूमि का तापमान बढ़ जाता है। जिससे कीड़ों के अंडे, प्यूपा और लार्वा काफी हद तक नष्ट हो जाते है, साथ ही मृदा जनित रोगों के रोगकारक भी तेज धूप से नष्ट हो जाते है।

गत वर्ष 12.46 लाख हैक्टयेर में था बुआई का लक्ष्य
खरीफ बुआई 2020-21 के तहत कृषि विभाग द्वारा जिले में कुल 12.46 लाख हैक्टेयर में बुआई का लक्ष्य रखा था। जिसमें सर्वाधिक 5.40 लाख मूंग तो 3.40 लाख हेक्टेयर में बाजरा बुआई का लक्ष्य तय किया गया था। इस वर्ष अग्रिम बुआई का लक्ष्य अभी तय नहीं किया गया है

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