भगवान बचाए इन बसों में सफर से:नियम आधे का, फुल चल रहीं बसें; निजी गाड़ियों पर पाबंदी से और बुरा हुआ हाल

नागौर6 महीने पहलेलेखक: मनीष व्यास
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रोडवेज बस में क्षमता से अधिक सव - Dainik Bhaskar
रोडवेज बस में क्षमता से अधिक सव

राजस्थान में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच निजी और सरकारी बसें पूरी रफ्तार के साथ कोरोना की गाइडलाइन को तोड़ रही हैं। यात्रियों से खचाखच भरी बसें संक्रमण बढ़ाने की बड़ी वजह बन रही हैं। अफसोस जिले में बैठे जिम्मेदार अफसरों को यह सब नहीं दिख रहा है। निजी वाहनों पर रोक लगाने में खूब जल्दबाजी हुई, पर इन बसों को रोकने में सब नाकाम हैं। तभी तो ये बसें मुख्य मार्गों पर न जाने कितने पुलिस थानों के सामने से रोज सरपट दौड़ रही हैं। बसों की तस्वीर डराने वाली हैं। हर ओर सोशल डिस्टेंसिंग का नारा दिया जा रहा है। इन बसों में सोशल डिस्टेंसिंग की जिस तरह धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, उस पर किसी की नजर नहीं है। खास बात यह कि 50 फीसदी क्षमता से इन बसों को चलाना था, फिर भारी भीड़ ठूंसकर क्यों चलाया जा रहा है। चेकपोस्ट तो बना दी गईं, पर सख्ती कुछ नहीं। निजी वाहनों पर जरूर पुलिस का जोर चल रहा है। पूरे प्रदेश में रोडवेज बसों,राज्य सरकार से अनुबंधित बसों व लोक परिवहन बसों को मिलाकर तकरीबन 6500 बसें रोजाना चल रही हैं। इनमें 5 लाख लोग पूरे दिन में आवागमन करते हैं। पूरे प्रदेश में अभी संचालित तक़रीबन 12 हजार प्राइवेट बसों में 10 लाख लोग प्रतिदिन आवागमन कर रहे हैं।

मेड़ता से अजमेर जा आरही रोडवेज बस में खचाखच भरी सवारियां।
मेड़ता से अजमेर जा आरही रोडवेज बस में खचाखच भरी सवारियां।

कार में बैठे एक-दो लोगों पर रोक, बसों में 50-50 जा रहे

सरकार की ये गाइडलाइन ही अब प्रदेश में कोरोना संक्रमण की सबसे बड़ी वाहक बन गई हैं। इसके चलते इन बसों में लोग बिना कोई सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किये इधर से उधर आराम से घूम रहे हैं। ऐसे में अब ये भी हास्यास्पद हो गया है कि कार में बैठे एक दो लोगों को रोककर बस में बैठे 50 लोगों को अनुमति देकर सरकार कैसे कोरोना संक्रमण को रोक रही है।

गाइडलाइन का तोड़ निकाल स्कूल बस में मायरा भरने जा रहे लोग।
गाइडलाइन का तोड़ निकाल स्कूल बस में मायरा भरने जा रहे लोग।

स्कूल बसों से भी हो रहा है आवागमन
गाइडलाइन में बसों को अनुमति किए जाने के चलते अब लोग अपने निजी कार्यों जैसे शादी ब्याह, मायरा और अन्य कामों के लिए छोटे वाहनों को ले जाने के बजाय स्कूल बसों को किराया पर ले जा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला गुरुवार को अजमेर-नागौर बॉर्डर पर सामने आया जहां कुछ लोग किशनगढ़ से डेगाना मायरा भरने के लिए जा रहे थे। इन्होंने निजी स्कूल बस को किराया कर रखा था हालांकि इन्हें चेक पोस्ट पर रोका गया पर मात्र सोशल डिस्टेंसिंग की अवहेलना का 500 रुपये का चालान काटकर छोड़ दिया गया। मौके पर अधिकारियों से उन्हें जाने देने को लेकर सवाल किया तो सामने आया गाइडलाइन के अनुसार बस को नहीं रोक सकते हैं।

प्रदेश के बाहर से भी बसें आराम से आ रहीं
गाइडलाइन की कमजोरी के चलते सिर्फ प्रदेश के अंदर से ही नहीं प्रदेश के बाहर से भी बसों का आवागमन निरंतर हो रहा है। ये बसें भी खचाखच भरकर आ रही हैं। हालांकि इन में बैठी सवारियों की पूरी जांच पड़ताल की जा रही है। फिर भी वही सवाल उठता है कि कारों में बैठी इक्का-दुक्का सवारियों से कोरोना फ़ैल रहा है, पर इन बसों में आ रही भीड़ से कोरोना नहीं फ़ैल रहा है।

कोरोना काल में बसों में सफर कर रहा आंकड़ा डरावना
पूरे प्रदेश में रोडवेज बसों, राज्य सरकार से अनुबंधित बसों व लोक परिवहन बसों को मिलाकर तक़रीबन 6500 बसें रोजाना चल रही हैं। इनमें तक़रीबन 5 लाख लोग पूरे दिन में आवागमन करते हैं। वहीं, पूरे प्रदेश में संचालित तकरीबन 12 हजार प्राइवेट बसों में 10 लाख लोग प्रतिदिन आवागमन कर रहे हैं। वर्तमान में सभी निजी वाहनों को बंद किए जाने के बाद ये आंकड़ा कम होने के बजाय बढ़ता ही जा आ रहा है। जो कोरोना संक्रमण के इस भीषण दौर में ये अपने आप में ही डरावना है।
गाइडलाइन अनुसार बसों में क्षमता का पचास फीसदी यात्री भार ही अनुमति
राज्य सरकार की ओर से जारी ताजा गाइडलाइन के मुताबिक निजी वाहनों से आवाजाही पर अंकुश है। केवल इमरजेंसी में ही अपने निजी वाहनों से आधी क्षमता के साथ एक जिले से दूसरे जिले में आ जा सकते हैं, लेकिन रोडवेज बसों को इसमें छूट है। बसों में 50 फीसदी यात्री भार होना चाहिए। इसकी जांच के लिए जिले के बार्डर पर चेक पोस्ट स्थापित किए गए हैं। बसों में खडे़ होकर यात्रा करने पर भी रोक लगाई गई है। साथ ही मास्क लगाने व सोशल डिस्टेंसिंग के नियम भी पहले से ही लागू हैं

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