इंसानियत का जज्बा, जो मिसाल है:कोरोना से जीते शुभम ने प्लाज्मा डोनेट कर दो मरीजों की बचाई जान, बोले- यह मेरी खुशनसीबी

नागौर7 महीने पहले
प्लाज्मा डोनेट करते हुए शुभम श

पिछले साल कोरोना संक्रमित होकर इससे उबरने के बाद शुभम शर्मा ने अब जोधपुर के MDM अस्पताल में 2 संक्रमित मरीजों के लिए प्लाज्मा डोनेट किया हैं। शुभम को पिछले साल कोरोना की पहली लहर में संक्रमण हुआ था। अब प्लाज्मा डोनेट करने के बाद उनका कहना है, जब तक शरीर स्वस्थ है तब तक नियमित अंतराल से प्लाज्मा डोनेट कर लोगों की जान बचाने की कोशिश करता रहूंगा।

जिले के मेड़ता रोड स्थित अस्पताल में बतौर मेल नर्स काम करने वाले शुभम ने दैनिक भास्कर को बताया कि पिछले साल उनकी ड्यूटी कोविड सेक्शन में लगाई गई थी। यहीं से संक्रमण हुआ और रिपोर्ट पॉजिटिव आई। मैं असिम्प्टोमेटिक था, लिहाजा कोविड-19 के लक्षण नहीं दिख रहे थे। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद आइसोलेशन में रहा। असिम्प्टोमेटिक होने के कारण चीजें सामान्य थीं। मेरे पास काफी समय था इसलिए मैं वहीं योग और वर्कआउट करता था। इलाज के बाद रिपोर्ट्स निगेटिव आई । मैंने वापस ड्यूटी जॉइन कर ली।

MDM अस्पताल में डॉक्टरों ने बताई प्लाज्मा डोनेशन की अहमियत
शुभम ने बताया कि अभी 2 दिन पहले मेरे एक बीमार रिश्तेदार से मिलने जोधपुर स्थित MDM अस्पताल पहुंचा तो वहां कुछ डॉक्टर्स प्लाज्मा थेरेपी के बारे में बाते कर रहे थे। वो कह रहे थे कि अगर प्लाज्मा मिल जाए तो मरीजों की जान बचाई जा सकती है। वैसे मेडिकल डिपार्टमेंट से जुड़ा होने के कारण में इसके बारे में थोड़ा तो जानता था। इसकी पूरी प्रोसेस के बारे में मेंने डॉक्टरों से पूछा तो उन्होंने बताया कि इसमें पहले डोनर का एंटीबॉडी टेस्ट किया जाता है। अगर टेस्ट में उसकी एंटीबॉडी बेहतर आती है तो वो प्लाज़्मा डोनेट कर सकता है। इसमें कोई ख़तरा भी नहीं है।

जोधपुर स्थित MDM अस्पताल में प्लाज्मा डोनेट करते हुए शुभम शर्मा।
जोधपुर स्थित MDM अस्पताल में प्लाज्मा डोनेट करते हुए शुभम शर्मा।

एंटीबॉडी टेस्ट में रिपोर्ट बेहतर आई तो किया प्लाज्मा डोनेट
शुभम ने बताया कि उन्होंने डॉक्टरों से तुरंत उसका एंटीबॉडी टेस्ट करने को कहा। एंटीबॉडी टेस्ट में उसकी रिपोर्ट बेहतर आई। डॉक्टरों ने उसे बताया कि आप प्लाज्मा डोनेट कर सकते है। इसके बाद शुभम ने वहीं MDM अस्पताल में ही डॉक्टरों कि निगरानी में अपना प्लाज्मा डोनेट कर दिया। MDM हॉस्पिटल जोधपुर में भर्ती कोरोना व श्रीराम हॉस्पिटल जोधपुर में भर्ती दो कोरोना संक्रमित महिलाओं को ये प्लाज्मा चढ़ाया गया है। दोनों ही मरीजों के परिजनों ने शुभम का धन्यवाद दिया।

शुभम ने बताया कि ब्लड और प्लाज्मा बैंक में बरती जा रही सावधानी के बीच मुझे बिल्कुल भी संक्रमण का खतरा महसूस नहीं हुआ। मुझे खुशी हुई कि मैं जिस संक्रमण से गुजरा उससे जूझ रहे मरीजों की मदद कर पा रहा है। इस समय एक-दूसरे की मदद करना बेहद जरूरी है। जब तक शरीर स्वस्थ है, मैं प्लाज्मा डोनेट करता रहूंगा। ताकि किसी दूसरे मरीज को महामारी के संकट से उबार सकूं।

कोरोना मरीजों में कैसे काम करती है प्लाज्मा थैरेपी
ऐसे मरीज जो हाल ही में बीमारी से उबरे हैं उनके शरीर में मौजूद इम्यून सिस्टम ऐसे एंटीबॉडीज बनाता है जो ताउम्र रहते हैं। ये एंटीबॉडी ब्लड प्लाज्मा में मौजूद रहते हैं। इनके ब्लड से प्लाज्मा लेकर संक्रमित मरीजों में चढ़ाया जाता है। इसे प्लाज्मा थैरेपी कहते हैं। ऐसा होने के बाद संक्रमित मरीज का शरीर तब तब तक रोगों से लड़ने की क्षमता यानी एंटीबॉडी बढ़ाता है। जब तक उसका शरीर खुद ये तैयार करने के लायक न बन जाए।

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