कोरोना के चलते मजबूरी का पलायन:घर जाने के लिए दोस्त से मांगी बाइक, 5 दिन में पूरा किया 2 हजार किमी का सफर, लॉकडाउन के चलते बंद हो गया था काम

नागौर6 महीने पहले
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बेंगलोर से बाइक पर पहुंचे दोनों युवक। - Dainik Bhaskar
बेंगलोर से बाइक पर पहुंचे दोनों युवक।

कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के चलते अलग-अलग राज्यों में लॉकडाउन सहित कई तरह की पाबंदियां लगाईं जा रही है। इसके चलते देश भर मे काम कर रहे मजदूरों का भी अपने गांवों की और पलायन जारी है। इस बीच गुरुवार को अजमेर-नागौर बाढ़ी घाटी बॉर्डर पर बाइक पर दो मजदुर डूंगर सिंह पुत्र पप्पू सिंह निवासी नोखा व राजवीर सिंह पुत्र भवानीसिंह निवासी सोनियासर पहुंचे। इन्हें यहां अधिकारियों ने रोका तो इन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि तकरीबन 2 हजार किलोमीटर दूर बैंगलोर से मोटरसाइकिल पर सफर तय किया है।

दोनों मजदूरों डूंगर सिंह व राजवीर सिंह ने अधिकारियों को बताया कि बैंगलोर में हालात डरावने हो गए है। मालिक मजदूरों को फैक्ट्रियों से निकाल रहे है। गांव आने के लिए ट्रेनों में जगह खाली नहीं है और प्राइवेट बसों में मनचाहा किराया वसूला जा रहा है, जो देने कि हिम्मत नहीं है। इसलिए दोनों दोस्त अपने किसी साथी से उसकी मोटरसाइकिल मांग कर उसी से घरों की ओर निकले हैं।

भोजन की नहीं परवाह, बस गांव पहुंचना जरुरी
दोनों युवाओं ने बताया कि पिछले 5 दिनों से बाइक पर लगातार चल रहे है। जब थकान ज्यादा हो जाती है तो हाइवे पर कहीं छाया देखकर रुक जाते है। अब सफर में उनके पास पड़े रूपये भी लगभग ख़त्म हो गए है। दोनों ने बताया कि उन्हें भोजन की परवाह भी नहीं है। कहीं भोजन मिलता है तो खा लेते हैं। नहीं मिलता है तो भूखे पेट ही आगे बढ़ रहे हैं। उन्हें तो बस जल्द से जल्द गांव पहुंचना है।

बैंगलोर में ग्रेनाइट फैक्ट्री में करते थे काम
मोटरसाइकिल पर बेंगलोर से बीकानेर के नोखा के समीप अपने गांव जा रहे इन युवाओं ने बताया कि ये बैंगलोर स्थित ग्रेनाइट फैक्ट्री में काम करते हैं। अब काम तो बन्द हो गया, मालिक मजदूरों को फैक्ट्रियों से निकाल रहे है। गांव आने के लिए ट्रेनों में जगह खाली नहीं है और प्राइवेट बसों में मनचाहा किराया वसूला जा रहा है, जो देने की उनकी हिम्मत नहीं थी।

रोजाना चला रहे 400 किमी साइकिल
डूंगर सिंह व राजवीर सिंह ने बताया कि मोटरसाइकिल से गांव के लिए निकले। बैंगलोर से उनका गांव करीब 2 हजार किलोमीटर दूर है। रोजाना 350 से 400 किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं। ऐसे में अब आज रात तक ये दोनों अपने गाँव पहुँच सकते है।

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