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खुलासा:नागौर का युवा अब एमडी ड्रग्स की गिरफ्त में, एक ग्राम की कीमत 2500 रुपए ‘चावल’ कोडवर्ड से बिकता है

नागौर14 दिन पहलेलेखक: चेतन द्विवेदी
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  • भास्कर टीम ने जाने जमीनी हालात, कस्बाें तक फैला हुआ है नशे का नेटवर्क

नशीले पदार्थ अफीम और स्मैक के बाद अब नागौर का युवा खतरनाक ड्रग्स एमडी की जकड़ में आने लगा है। एमडी यानी एमडीएमए। फिल्म नगरी मुंबई में यह ड्रग्स बॉलीवुड पार्टियों में उपयोग में ज्यादा आता है। नागौर में भी सर्वाधिक सप्लाई मुंबई से ही हो रही है। बताया जा रहा है कि मुंबई में यह यूरोप से तस्करी करके लाया जाता है। दरअसल नागौर व आसपास के हजारों लोगों का मुंबई से सीधा संपर्क है।

नागौर एवं इसके आस-पास के इलाकों में यह मादक पदार्थ एमडी 2500 से 3000 हजार रुपए प्रति ग्राम में बिक रहा है जो कोकीन के बाद सबसे महंगा है। युवा इसका सेवन विभिन्न वैरायटी के गुटखा के साथ कर रहे हैं। कुछ पानी में घोलकर भी पीते हैं यह क्रिस्टल जैसा होता है और घुलनशील है। भास्कर पड़ताल में सामने आया है कि नागौर में यह एमडी चुनिंदा दुकानों एवं होटलों पर कोडवर्ड से बिक रहा है।

इसे चावल का दाना कहा जाता है। कोई भी दुकानदार इसे एमडी के नाम से नहीं देता। हां, चावल कहते ही मिल जाता है। अकेले नागौर शहर में इस एमडी की रोजाना की खपत 4 लाख रुपए से भी अधिक की बताई जा रही है, जिसको शहर के आठ-दस लोग ही मुख्य रूप से संचालित करते हैं। इन 8-10 लोगों के नीचे कई दुकानदार एवं होटल-ढाबा संचालक हैं जो इसकी बिक्री करते हैं। पुलिस की अब इन पर पैनी नजर है। पुलिस कार्रवाई की फिराक में है।

बढ़ते नशे से जिलेभर में बढ़ रही हैं चोरी की वारदातें, युवा पीढ़ी ज्यादा आ रही है नशे की चपेट में

कोकीन के बाद सबसे महंगा नशा, बॉलीवुड में इसी का सबसे ज्यादा उपयाेग

यह चावल के दानों से बड़ा होता है। कोडवर्ड से मांगने पर ही और मांगने वाले की नशेड़ी शक्ल देखकर ही विक्रेता इसे बेच रहे हैं। बेचते वक्त भी पूरी सावधानी बरतते हैं ताकि पकड़े न जाएं। यह चीनी जैसा सफेद होता है, जिसका सेवन करते ही नशा करने वाले शख्स का शरीर सुन्न पड़ जाता है। इसका एक बार सेवन करने से कई घंटे नशा रहता है।

नागौर में यह एक ग्राम, दो ग्राम, 8 ग्राम, 13 ग्राम, 15 ग्राम, 20 ग्राम व 50 ग्राम या इससे अधिक वजन में पुड़िया में बिक रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार एमडी मतलब एक्सटैसी को कोकीन के बाद सबसे महंगा नशा बताया जाता है जो खासतौर से बॉलीवुड की पार्टियों में नशे के रूप में उपयोग किया जाता है।

नागौर पूरे जिले में इसका जाल फैलता जा रहा है। कुल मिलाकर नागौर का युवा नशे की जकड़ में है और खास तौर पर यहां पर स्मैक, अफीम और एमडी का नशा सबसे अधिक हो रहा है। इसी का परिणाम ये भी है कि यहां पर चोरी की वारदातें लगातार बढ़ती जा रही हैं। आदत पूरी करने के लिए युवा पीढ़ी चोरी जैसे काम में फंस रही है। कुछ शौकीन भी इसकी गिरफ्त में हैं।

पकड़े न जाएं इसलिए सतर्कता बरत रहे हैं
एमडी नशे को नागौर शहर एवं इसके 20-25 किलोमीटर के एरिया में इसको चावल के कोडवर्ड के नाम से बेचा जाता है। वहीं जिले के अन्य क्षेत्रों में इसके मुख्य सप्लायरों ने अलग-अलग कोडवर्ड रख रखे हैं। इससे इनके मुख्य तस्कर एवं निचले स्तर पर बिक्री करने वालों के बारे में किसी को भनक तक नहीं लगे।

भास्कर टीम ने शहर से लेकर देहात के कई थाना इलाको में पड़ताल की तो उसमें पाया कि शहर से लेकर कस्बों तक नशे का पूरा नेटवर्क फैला है। एमडी नशे के बारे में जानता हर कोई है, लेकिन इसकी खरीद कोडवर्ड से ही होती है। अगर बगैर कोर्ड वर्ड के इसको मांगा जाता है तो कोई भी इसको नहीं देता है।

इस नशे के बाद खुदकुशी की सोच आती है

एक्सपर्ट बोले- सेवन से सोच नकारात्मक होती है

नशा छुड़ाने वाले डॉक्टर्स का कहना है कि एमडी (मिथाइलीनडाईऑक्सी मैथाम्फेटामाइन यानी एक्सटैसी) का नशा सिर में चढ़ जाता है। लगातार इसके सेवन से तनाव रहने लगता है। यह नशा करने वाला धीरे-धीरे डिप्रेशन में चला जाता है और बाद में खुदकुशी करने की सोचने लगता है। जीवन में नकारात्मकता आने लगती है।

मनोचिकित्सक डॉ. शंकरलाल

शुरुआत में स्फूर्ति एवं उत्साह महसूस होता है, लेकिन आदत पड़ने पर दिमागी बीमारियां व चिड़चिड़ापन रहने लगता है। नशा करने वाला आत्महत्या की सोचने लगता है। नशों से बचें।

बड़ा सवाल
नशे का इतना नेटवर्क तो पुलिस पकड़ती क्यों नहीं

जिलेभर में अफीम, स्मैक व एमडी नशे का नेटवर्क फैला हुआ है। गांवों कस्बों तक में नशा बिक रहा है फिर भी थाना पुलिस की ओर से कार्रवाईयां नही की जाती हैं। इसके चलते डीएसटी को कार्रवाईयां करनी पड़ती हैं। हालत ये है कि एमडी नशे के खिलाफ जिले में अभी तक एक भी कारवाई नहीं हुई है। पुलिस अधीक्षक श्वेता धनखड़ ने बताया कि पुलिस समय-समय पर इस ओर कार्रवाई कर रही हैं। सूचना मिलते ही टीमों को एक्टिव कर दिया गया है। हालांकि नशे के खिलाफ लंबे समय से डीएसटी लगी हुई है, जिसने कार्रवाईयां की हैं। एमडी नशे पर भी कार्रवाई होगी।

कार्रवाई करेंगे: आईजी

  • रोकथाम के लिए डीएसटी का गठन किया है। मादक पदार्थ एमडी के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसपी से बात कर कार्रवाई करेंगे। - एस सेंगाथिर, आईजी, अजमेर रेंज
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