शर्मनाक सिस्टम:जरूरत 200 ऑक्सीजन सिलेंडर की, काम 80 से चला रहे, नतीजा; कोराेना के गंभीर मरीजों की उखड़ रही सांसें

नागौर6 महीने पहले
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2 घंटे तक मरीज को भर्ती नहीं किया तो परिजन ले जाने लगे। सांसद पहुंचे तब भर्ती किया। (इनसेट) 2 घंटे परिजन ड्रिप पकड़े रहे। - Dainik Bhaskar
2 घंटे तक मरीज को भर्ती नहीं किया तो परिजन ले जाने लगे। सांसद पहुंचे तब भर्ती किया। (इनसेट) 2 घंटे परिजन ड्रिप पकड़े रहे।
  • सांसद हनुमान बेनीवाल के औचक निरीक्षण में डॉक्टरों-स्टाफ ने ही सांसद के सामने स्वीकारा

सांसद हनुमान बेनीवाल गुरूवार दोपहर अचानक जेएलएन हाॅस्पिटल का निरीक्षण करने पहुंच गए। वहां की अव्यवस्थाओं को देखकर नाराज हो गए। कहा- भास्कर ने सच ही लिखा था, हालात बिल्कुल वही हैं। सीएमएचओ डॉ. मेहराम महिया को फटकार लगाते हुए कहा कि आपस में लड़ने की बजाय मरीजों के लिए काम करो तो बेहतर होगा। नहीं तो आपको कोई माफ नहीं करेगा। इस दौरान सीएमएचओ सहित पीएमओ डॉ. शंकरलाल सांसद के सवालों के जवाब तक नहीं दे पाए, बस बगलें झांकते रहे। भास्कर में चिकित्सा विभाग की अव्यवस्थाओं पर लगातार छपी खबरों का जिक्र करते हुए सांसद ने कहा कि जिले में चिकित्सा विभाग जिम्मेदारी से काम नहीं कर रहा है। प्रशासन भी लापरवाही पर उतर आया है जो गलत है। पूरे निरीक्षण के दौरान सांसद हनुमान के सवालों का पीएमओ और सीएमएचओ के पास कोई जवाब ही नहीं था।

सांसद ने हाॅस्पिटल में डिमांड अनुसार सारी चीजों के सूची बनाकर कलेक्टर के माध्यम से सरकार को भेजने के लिए कहा। चेतावनी भी दी कि आप जो भी मांगो, मिलेगा लेकिन मरीजों की समस्या को दरकिनार नहीं करें। उन्होंने वेटिलेंटर चालू कराने, आईसीयू में स्टाफ बढ़ाने, वार्डबाॅय व सफाईकर्मी लगाने, ऑक्सीजन सिलेंडरों की संख्या बढ़ाकर 200 करने, वेटिलेंटर के लिए ऑपरेटर रखने, सीएचसी पर सुविधाएं बढ़ाने आदि को लेकर प्रस्ताव बनाने तथा सरकार से मांग करने के लिए पीएमओ को निर्देश दिए।

सांसद ने कहा कि उन्होंने पहले भी अस्पताल के लिए बजट दिया है और कमी हो रही है तो बताएं, हम व्यवस्था करेंगे और जरूरत पड़ी तो भामाशाहों से करवाएंगे। आप बताओ तो सही?

सांसद ने सीएमएचओ को लगाई फटकार, कहा- आपस में लड़ना छोड़ो, व्यवस्थाओं पर ध्यान दो, हालात बहुत विकट हैं

झूठ बोले- निरीक्षण के दौरान ही खुल गई अधिकारियों की पोल...सांसद गंभीर मरीजों की स्थिति जान रहे थे तभी मरीज पूनम विश्नोई की बहन दौड़कर आई और बोली- मेरी बहन के वेटिलेंटर की आवश्यकता है लेकिन पीएमओ केवल यह कहकर बात टाल रहे हैं कि हो जाएगा लेकिन अब तक वेटिलेंटर दिया नहीं गया। सांसद ने पीएमओ डॉ. शंकरलाल से पूछा तो सर झुकाकर चुप्पी साध ली। सांसद बोले- फिर मैंने इन वेटिलेंटर के लिए पैसे क्यों दिए जब आप काम ही नहीं ले रहे हो। …और गंभीरता जानने के लिए भास्कर ने मरीज के परिजनों को चार घंटे बाद पूछा तो जवाब मिला कि अभी तक उसकी बहन को वेंटिलेटर नहीं दिया गया है। जबकि सांसद के सामने पीएमओ ने कहा था, सर अभी दे देंगे वेंटिलेटर। जगह नहीं- बेड नहीं मिलने के कारण बरामदों में चल रहा है इलाज...सांसद जब वार्डों का निरीक्षण करने गए तो बरामदों में ही मरीज सो रहे थे। वहीं परिजनों के हाथों में ड्रिप थमाकर खड़ा किया हुआ था। मरीजों से बात की तो पता चला कि एडमिट नहीं कर रहे हैं। इस पर भी सीएमएचओ और पीएमओ ने चुप्पी साधे रखी। किसी स्टाफ ने कहा कि यह तो अभी आए ही हैं। ...और सच जानने के लिए भास्कर ने पड़ताल की तो सामने आया कि जो मरीज बरामदों में लेट रहे थे वो दो से 3 घंटे पहले हाॅस्पिटल आ गए थे। एक मरीज को एडमिट कराने के लिए सांसद को हस्तक्षेप करना पड़ा। लापरवाही- मीटिंग के दौरान दौड़कर आया मरीज, बोला- साहब रेफर कर दो यहां व्यवस्थाएं नहीं हैं...निरीक्षण के बाद बेनीवाल ने पीएमओ, सीएमएचओ व अन्य जेएलएन स्टाफ की मीटिंग ली तथा व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। इस दौरान मरीज सीमा का परिजन आया और रोने लगा कि साहब मरीज गंभीर है, यहां व्यवस्था नहीं। आप जल्दी बीकानेर या जोधपुर रेफर कर दो। सांसद ने मीटिंग रोककर मरीज की सुध लेने के लिए कहा तब जाकर जिम्मेदारों ने मरीज के पास स्टाफ को भेजा।

भास्कर लाइव-व्यवस्था में सुधार कर लो
सांसद बोले जिले में सीएचसी में भी मरीजों को भर्ती करने के लिए सुविधाएं बढ़ाओ ताकि जेएलएन में भार नहीं बढ़े और सारे डाॅक्टर्स मिलकर आराम से सेवाएं दे सकें। वेटिलेंटर दे दिए लेकिन इंस्टाॅल नहीं किए और न ही चलाने वाला है। बच्चे तो चलाएंगे नहीं।

यह सीएमएचओ और पीएमओ को ही करना है। वार्ड बाॅय लगाने की बात पर सांसद ने कहा कि आप लड़कों को 5 की बजाय 20 हजार, सफाईकर्मियों को 15 हजार व नर्सिंगकर्मी 30 हजार रुपए महीने हिसाब से देकर स्टाफ बढ़ाओ।

आप संक्रमितों और मौत के आंकड़े छिपाते क्यों हो? यह गंभीर लापरवाही है। सांसद ने भास्कर को बताया कि जिला प्रशासन कम मरीज दिखाकर नाकामी छिपाने का प्रयास कर रहा है जो गलत है। उन्होंने सीएमएचओ और पीएमओ काे कहा कि व्यवहार भी अपना सही कर लाे, लाेगाें की शिकायतें आ रही है कि आप उनसे बात तक नहीं करते।

60 मरीज ऐसे जिनको हर मिनट चाहिए 10-15 लीटर ऑक्सीजन...अस्पताल में 60 मरीज ऐसे हैं जिनको प्रति मिनट 10 से 15 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत है जबकि ऑक्सीजन जरूरत से कम है। आरोप है कि लॉ प्रेशर रखा जा रहा है। सीएचसी से हर घंटे 20 मरीज रेफर होकर आ रहे हैं...सीएचसी में ऑक्सीजन वेटिलेंटर जैसी सुविधाएं नहीं होने के कारण सारे मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। रोज प्रति घंटे औसत 20 से 25 संक्रमित मरीज रेफर होकर यहां आ रहे हैं।

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