कांसे की खनक दूर तक:हमारे कांसे के बर्तनों की ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और दुबई-पेरिस तक मांग

नागौर14 दिन पहले
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मार्बल, जीरा, हैंड टूल्स के साथ ही यहां बनने वाले कांसे के बर्तनों ने भी नागौर को विदेशों तक पहचान दी है। यहां बने कांसे के बर्तनों में पेरिस के एक नामी होटल में वहां आने वाले लोगों को खाना परोसा जा रहा है। यही नहीं, नागौर में बने कांसे के बर्तन अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और दुबई तक एक्सपोर्ट हो रहे हैं। गाेविंदगढ़ निवासी हंसराज कंसारा बताते हैं,

नागौर में 20-25 पार्टियां कांसे के बर्तन बना रही हैं। आए दिन 1000 किलो माल तैयार होता है यानी हर माह 30 टन माल यहां बन जाता है जो प्रदेश सहित देशभर के विभिन्न हिस्सों में बैठे एक्सपोर्टरों तक पहुंचता है। विदेशों में एक थाली, तीन कटोरी, एक गिलास और एक चम्मच का सैट उसके वजन और फिनिशिंग के लिहाज से 2500 से 6000 रुपए तक में बिकता है। यहां भी कांसे के तैयार बर्तन 2000 रुपए किलो तक में बिक रहे हैं।

पीतल के मेज और स्टूल भी भेजे पेरिस
जोधपुर से एक्सपोर्टर कमल किशोर कंसारा बताते हैं, कोरोना काल से पहले पेरिस से कांसे के बर्तनों का ऑर्डर आया था। वहां एक होटल में कांसे के सारे बर्तन भेजे थे। उन्हें माल इतना पसंद आया कि उन्होंने वहां के सारे मेज और स्टूल भी पीतल के बनवाए थे।

ये बर्तन नागौर-जोधपुर में बने भेजे गए थे। कंसारा बताते हैं कि उनके पिता घासीलाल ऐसे डिजाइनर थे कि कटोरी उन्हीं की डिजाइन की हुई आज तक चल रही है।

बर्तनों को नया लुक देने का श्रेय पिता घासीलाल को ही जाता है। इसके लिए उन्हें बाकायदा प्रशासन ने एक बार सम्मानित भी किया था। घासीलाल की ही पंक्तियां हैं, ‘पीतल में पकाओ, कांसे में खाओ, तांबे में पीओ और स्वस्थ रहकर जीओ।’

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