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अच्छी खबर:नागौर में लगेगी पान मैथी की प्रोसेसिंग यूनिट, प्रोड्क्ट विदेश में बिकेंगे

नागौर12 दिन पहले
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20 से 25 क्विंटल : पान मैथी का उत्पादन प्रति हैक्टेयर  
80-1 लाख क्विंटल सालाना उत्पादन जिले का - Dainik Bhaskar
20 से 25 क्विंटल : पान मैथी का उत्पादन प्रति हैक्टेयर 80-1 लाख क्विंटल सालाना उत्पादन जिले का
  • एक जिला एक प्रमुख उत्पाद काे बढ़ावा देने के मकसद से चिह्नित किए जिलेवार कृषि जिंस, किसानों को उपज की पूरी कीमत दिलाने की तैयारी

अपनी महक के कारण नागौर को विश्व में अलग पहचान दिलाने वाली (कसूरी) पान मैथी उत्पादक किसानों के दिन अब बदल सकते है। नागौर में किसानों को फायदा देने के लिए उत्पादक प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जाएगी। किसानों से पान मैथी खरीद कर मार्केट डिमांड के अनुसार प्रोड्क्ट तैयार करवाए जाएंगे। जिससे किसानों को भी उपज की पूरी कीमत मिल सकेगी। जानकारी के मुताबिक नागौर जिले में सालाना 1 लाख क्विंटल से ज्यादा पान मैथी की उपज हाेती है।

मगर... किसानों से फैक्ट्री मालिक व कंपनी के लोग कम दाम पर खरीद पान मैथी के प्रोड्क्ट तैयार कर 90 फीसदी मुनाफा कमा रहे है। ऐसे में अब प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित होने से किसानों को बड़ी राहत मिलने वाली है। इधर, दूसरी अच्छी खबर यह है कि पड़ोसी सीकर जिले तथा अलवर में भी प्याज की उत्पादक प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित होगी।

जिससे सर्वाधिक प्याज उत्पादक जिले सीकर, अलवर, झुंझुनूं व नागौर के किसानों को उपज की पूरी कीमत मिल सकेगी। ऐसे में नागौर और झुंझुनूं के करीब एक लाख किसानों को भी प्याज प्रोसेसिंग यूनिट से सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। दरअसल, कृषि मार्केटिंग बाेर्ड प्रदेश के सभी जिलों में वहां की प्रमुख कृषि उत्पाद की प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करेगा।

प्रत्येक जिले में एक व्यक्ति काे ही कृषि जिंस स्थापित करने के लिए सहायता दी जाएगी। प्रदेशभर में चिह्नित सभी कृषि जिंसाें की प्रोसेसिंग यूनिट लगाने से पहले उपयोगिता एवं गुणवत्ता के जांच करने के लिए अनुसंधान कराया जा रहा है। इसके आधार पर प्रोजेक्ट इकाई स्थापित की जाएगी। यदि अनुसंधान में प्याज की गुणवत्ता सही रही ताे सीकर व अलवर के प्याज से पाउडर बनाया जा सकता है।
पान मैथी : किसान 60 से 150 रुपए प्रति किलो बेच रहे, मगर...कंपनियां 1500 रुपए तक बेच कमा रही बड़ा मुनाफा
शोधार्थी डाॅ. विकास पावड़िया के अनुसार किसान वर्षों से नागौरी पान मैथी का उत्पादन कर 60 से 150 प्रति किलो के हिसाब से बेचने को मजबूर हैं। जबकि देश-दुनिया के मार्केट में यही नागौरी पान मैथी कंपनियों के लोग 700 से 1500 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचकर 90 फीसदी मुनाफा कमा रहे हैं।

शोध पत्र में 150 में से 85 फीसदी किसानों ने मंडी की कमी बताई तो 90 फीसदी किसानों का कहना था सही मूल्य नहीं मिलते। इससे किसानों काे बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। सामने आया कि जिले में करीब 4 हजार किसान 5 हजार हैक्टेयर में इसकी वर्तमान में बुवाई कर रहे हैं।

नागौर में 8500 हैक्टेयर में प्याज का उत्पादन, मगर भाव नहीं मिल रहे प्याज : नागौर जिले में साढ़े 8 हजार हैक्टेयर में देशी प्याज का उत्पादन होता है। प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में नागौर में गोगोर, मौलासर, धनकूड़ी, अड़कसर, कुचामन शामिल है। यहां के 5 से 7 हजार किसान बड़े स्तर पर प्याज उगाकर मंडी में बेचते रहे हैं। हालात ये है कि मार्केट में एक साथ फसल की आवक शुरू हाेते ही प्रोसेसिंग यूनिट एवं अन्य विकल्प नहीं हाेने की स्थिति में भाव कम हाे जाते हैं। इस वजह से किसानों काे उपज का लागत मूल्य तक भी नहीं मिल पाता है।

इकाई लागत का 35% तक सरकार देगी सहायता: अावेदकाें काे महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर में प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। सरकार की तरफ से इकाई लागत का 35 प्रतिशत तक की सहायता दी जाएगी। याेजना में नाबार्ड की ओर से किसानों काे सहायता दी जाएगी। प्रदेश के सभी जिलाें में कृषि जिंसाें के लिए इकाई चिह्नित की जा चुकी है। अब पात्र आवेदकों का चयन कर प्रत्येक जिले में जल्द इकाई स्थापित की जाएगी।​​​​​​​

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