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साध्वियों के सान्निध्य में वरघोड़ा निकाला:पर्यूषण पर्व; तीसरा दिन जैन समाज ने सभी मंदिरों में उत्तम आर्जव धर्म की पूजा अर्चना

नागौर8 दिन पहले
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जैन मंदिर में उत्तम आर्जव धर्म की पूजा अर्चना करते हुए। - Dainik Bhaskar
जैन मंदिर में उत्तम आर्जव धर्म की पूजा अर्चना करते हुए।

मन वचन और काम की सरलता को आर्जव कहते हैं। इसी सरलता को प्राप्त करने के लिए रविवार को जैन समाज ने सभी मंदिरों में उत्तम आर्जव धर्म की पूजा अर्चना की गई, ताकि पूरे समाज में पूरे देश में आपस में एक सरलता का रिश्ता इंसान और इंसान के बीच कायम हो सके। नथमल बाकलीवाल ने बताया कि ऋजुता का अभाव ही आर्जव है। छल कपट करने वाले का मन अशांत रहता है, इसके विपरीत जो सरल रहते हैं वे निश्चिन्त रहते हैं। .

सरलता से सफलता आर्जव धर्म का परिणाम है। सरल व्यक्ति हंस की प्रवृति जीता है, जबकि कपटी बगुले का आचरण अपनाता है। वर्ण दोनों के समान है, लेकिन स्वभाव दोनों का भिन्न है। हंस सरोवर में मोती चुगता है जबकि बगुले की दृष्टि मछली पर ही बनी रहती है। जैन धर्म कहता है कि संसार की वासना, कामना, तृष्णा ये सब मछलियां है।

आज हम सब जगह यही बिखरते रिश्तों का आलम देख रहे हैं और हर व्यक्ति अंदर से बहुत ही बिखराव महसूस कर रहा है। नथमल बाकलीवाल ने बताया कि एक बार गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि प्रभु हम सब आपसे इतनी आत्मीयता भरा संबंध रखते हैं और आपके प्रति अनन्य प्रेम है, फिर भी काली कलूटी छिद्र वाली बांसुरी ही आपको सर्वाधिक प्रिय क्यों है? इस पर श्रीकृष्ण ने कहा मेरी बांसुरी में तीन गुण है, जो तुम में नहीं है।

निकला सामूहिक अठ्ठाई तपस्यार्थियों का वरघोड़ा
नागौर के जैन श्वेताम्बर समाज की ओर से रविवार को सुबह 9.30 बजे से सामूहिक अठ्ठाई तपस्या करने वाले का गांधी वाड़ी से जैन साध्वियों के सानिध्य में इन्द्र ध्वजा, भगवान की सवारी के साथ में भव्य वरघोड़ा निकाला गया। इस भव्य वरघोड़ा के लाभार्थी तोलाराम, सुरेश कुमार चौधरी परिवार ने इसका लाभ लिया।

तपस्यार्थियों का भव्य वरघोड़ा शहर के गांधी वाड़ी से शुरू होकर माही दरवाजा, नाईवाड़ा, डागा वाड़ी, लोढ़ा का चौक, सिघंवियों की पोल, कांच का मंदिर, तोलावतों की पोल, मच्छियों का चौक, काठडिय़ों का चौक, सावा की गली, लोहियों का चौक होते हुए बोहरावाड़ी स्थित जैन उपासरे में पहुचा।

जहां जैन साध्वियों ने धर्मसभा को सं‍बोधित किया। इस अवसर पर जैन समाज के पुरुष महिलाओं एवं बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ में भाग लिया। उसके बाद में स्वामीवात्सल्य का आयोजन गांधी वाड़ी में सुरेन्द्र कुमार, राजेश कुमार, प्रवीण कुमार बांठिया परिवार की ओर से किया गया।

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