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डिस्कॉम में गबन का करंट:97 लाख की मरम्मत के नाम 4 करोड़ के मेटेरियल गबन की तैयारी, SE-XEN ने फर्म को दी हरी झंडी

नागौर13 दिन पहले
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  • }4 अरब घाटे में चल रहे नागौर डिस्कॉम के मेडता खंड में मेटेरियल घोटाले का बड़ा खुलासा

चार अरब के घाटे में चले रहे नागौर डिस्कॉम में बिना मरम्मत कार्य के 4 करोड़ रुपए के मेटेरियल के नाम पर गबन करने की तैयारी मामला सामने आया है। नागौर डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता, आरबीसिंह और मेड़ता एक्सईएन रामजीवन ने जिस कार्य को हरी झंडी दी, उसमें फर्म द्वारा गड़बड़ी की गई है। एसई ने 15 दिसंबर 2020 में मेड़ता खंड के (33/11 केवी सब स्टेशन) 35 उपकेंद्रों की 120 दिन में मरम्मत कार्य के नाम पर (सीएलआरसी रेट) 9703159 रुपए का मैसर्स श्रीराम इलेक्ट्रिक एंड कंस्ट्रक्शन को कार्य आदेश जारी किए थे। जिन 35 उपकेंद्रों के मेंटेनेंस कार्यादेश जारी किए, उसके लिए एसई व एक्सईएन ने नियमों को ताक पर रखा और मरम्मत कार्य के नाम जी शेड्यूल तैयार करवाया।

उसमें यह तक नहीं बताया कि कौनसा काम, किस उपकेंद्र पर क्या-क्या किया जाना है? इस घोटाले की कड़ियों को जब भास्कर टीम ने एक माह तक पड़ताल कर खंगाला तो चौंका देने वाले खुलासे हुए। जी शेड्यूल के अनुसार प्लेटफार्म बनाने, जीओ-डीओ व पोल लगाने, एंगल चैनल व एसीएसआर डोग कंडक्टर लेने व जमीन लेवलिंग करने जैसे कार्य तो धरातल पर हुए ही नहीं।

मौके पर फर्म ने जो काम किए उनमें सब स्ट्रक्चर के पेंटिंग व कंक्रीट बिछान और चुनिंदा जगह प्लेटफार्म बनाने के नाम पर भी लीपापोती कर डाली। बड़ा खुलासा यह हुआ कि मरम्मत के नाम जी शेड्यूल में जो मेटेरियल शामिल किया उसमें से अधिकतर नए सब स्टेशन बनाने व टॉवर फीडर बनाने में काम आने वाला मेटेरियल है। यानी 33/11 केवी पुराने उपकेंद्रों पर जो मेटेरियल उपयोग में ले ही नहीं सकते, उसके नाम पर बड़ा गबन कर डाला है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अभी पूरा भुगतान नहीं किया है, पैसा रोक लेंगे।

4 एईएन क्षेत्र के यह सब स्टेशन, जिनकी मरम्मत के नाम उठाया मेटेरियल
{मेड़ता सिटी (पवस) : आकेली ए, बड़गांव, हिरणखुरी, सातलास, भानास, कात्यासनी, लाम्पोलाई, रेण, न्यू पावार हाऊस मेड़ता।
{मेड़ता सिटी (ग्रामीण) : बासानी नेता, छापरी कलां, देशवाल, ढाढासनी, ढावा, गागुड़ा, जाजड़ावास, जारोड़ा, कोलियों की ढाणी, कुम्पड़ास, कुरड़ाया, लुणियास, मोकाला, रियां श्यामदास, सिरसला।
{गोटन (पवस) : बासनी सेजा, कड़वासरों की ढाणी, रोल चांदावतां, शिव, तालनपुर।
{रियांबड़ी (पवस) : जसनगर, लिलियां, आलनियावास, पादूकलां, बग्गड़।

गड़बड़ी : 2 रास्ते ऐसे भी निकाले
1. एसई-एक्सईएन ने जी शेड्यूल तैयार करवाया। जिसमें एओ के बिना साइन सीएलआरसी रेट कम बता,मेटेरियल मनचाहा दर्ज किया, ताकि घोटाले को अंजाम दे सके। जिम्मेदार ने काले कारनामों पर पर्दा डालना भी शुरू कर दिया है।
2. 30 किमी दूर से सामग्री का ट्रांसपोर्टेशन : इस घोटाले का छिपाने के लिए अधिकारियों ने जी शेड्यूल में सामग्री का ट्रांसपोर्टेशन 30 किमी से ज्यादा दूरी का लिया। जबकि उक्त 35 उपकेंद्र 25 किमी की परिधि में ही आते हैं।
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गबन की तैयारी पर एसई आरबी सिंह भास्कर से बोले- मैं इस मुद्दे पर टेलीफोन पर कुछ नहीं बोल सकता... भास्कर: 35 उपकेंद्रों की मरम्मत के आपने 97 लाख के कार्यादेश दिए, जी शेड्यूल में 4 करोड़ का मेटेरियल कैसे उपयोग में लिया? एसई : यह मुझे अभी ध्यान में नहीं, देखकर ही बता सकता हूं। भास्कर : पुराने उपकेंद्रों की मरम्मत में 7 किमी डोग कंडक्टर व 80 एमटी स्टील चैनल एंगल उपयोग में ली? एसई : पेपर देखकर बता सकता हूं, आप कल ऑफिस पधारंे। भास्कर : जी शेड्यूल में जितना आपने मेटेरियल मरम्मत के लिए लिया, उतने से 25 उपकेंद्र नए बन जाते, आपने स्वीकृति कैसे दी? एसई : ऐसा कुछ नहीं है, पुराने उपकेंद्र डेमेज भी तो होते हैं, देखो, मैं इस मुद्दे पर टेलीफोन पर कुछ बोल नहीं सकता, इसके बाद फोन कट कर दिया।

जी शैड्यूल के नियम यह : बीएसआर रेट से जी शैड्यूल सब स्टेशनवार बनता है, उसमें स्ट्रक्चर इक्यूमेंट, नगवाइज सूची बनती है। संबंधित जेईएन उप केंद्रवार शेड्यूल बनता है, एईएन चेक करता है, एक्सईएन रिकमंड करके भेजता है। एओ परमिशन के बाद एसई फाइनल अप्रूल देता है। इस गड़बड़ी में एसई, एक्सईएन, स्टोर इंचार्ज सहित अन्य अधिकारी भी जांच के घेरे में है।

एक्सईएन- हम फर्म को रुपए नहीं उठाने देंगे ^जी शेड्यूल सब स्टेशनवार ही बना है। 35 उपकेंद्रों मरम्मत का कार्य अभी रनिंग में है। आपको क्या चाहिए वो बताओ, सब बता देंगे। फर्म ने एक बिल उठाया है, हम ऐसे ही रुपए थोड़े ही उठाने देंगे।- रामजीवन जाखड़, एक्सईएन मेड़ता।

^चारों पुराने एईएन बदल चुके हैं, वर्तमान रियांबड़ी एईएन ने कहा- पुराने प्लेटफार्म की मरम्मत जरूर हुई। वहीं मेड़ता ग्रामीण बोले-यह उनके आने से पहले काम हुआ होगा, पता करेंगे। गोटन एईएन बोले-पता करके ही बता सकेंगे।

एमडी ने कहा-मामला गंभीर, कमेटी से कराएंगे जांच ^35 उपकेंद्राें की मरम्मत के जी शेड्यूल में गड़बड़ी कर मेटेरियल का गबन किया है तो मैं कमेटी से जांच करवाऊंगा। यह अच्छा मुद्दा है, इस मामले की 3 दिन में जांच करवाएंगे। वीएस भाटी, एमडी, अजमेर डिस्कॉम।

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