आटा-साटा कुप्रथा रोकने के लिए गहलोत सरकार बनाएगी कानून:महिला बाल विकास मंत्री बोलीं- सरकार रिसर्च कर रही है; अभी जहां-जहां ये कुप्रथा है वहां स्पेशल टीम के माध्यम से इसे रोकेंगे

नागौर4 महीने पहले
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आटा-साटा कुप्रथा को रोकने के लिए गहलोत सरकार जल्द कानून बनाएगी। दैनिक भास्कर ने सीरीज चलाकर राजस्थान में चल रही आटा-साटा कुप्रथा को उजागर कर बताया था कि इसके चलते कई बेटियों को जीते जी मौत दी जा रही है। उनकी जिंदगियां बर्बाद की जा रही है। अब इस पूरे मसले पर प्रदेश सरकार की महिला बाल विकास मंत्री ममता भूपेश ने बताया है कि राज्य सरकार आटा-साटा कुप्रथा को लेकर बेहद गंभीर है। इस पर लगातार रिसर्च किया जा रहा है। जल्द ही इस पर कानून भी बनाया जाएगा। इसके अलावा महिला बाल विकास मंत्री ममता भूपेश ने कहा कि जहां-जहां ये कुप्रथा चल रही है, वहां स्पेशल टीम के माध्यम से इसे रोकने का पूरा प्रयास किया जाएगा।

मंत्री ममता भूपेश ने ये भी कहा कि महिला बाल विकास विभाग पहले से ही कन्या भ्रूण हत्या और बाल विवाह को लेकर सतर्कता और सतत रूप से कार्य कर रहा है और सरकार प्रयासरत है कि बच्चियां ज्यादा से ज्यादा पढ़ लिख पाएं और उनके परिजन उनकी बालिग उम्र में उनकी शादी करें।

दैनिक भास्कर पड़ताल में ये आया था सामने
राजस्थान के नागौर जिले में 21 साल की ग्रेजुएट लड़की सुमन ने सुसाइड कर लिया था। उसकी मौत के बाद एक सुसाइड नोट सामने आया, जिसमें उसने अपनी मौत का जिम्मेदार समाज और आटा-साटा की कुप्रथा को बताया। साथ ही उसने सभी भाइयों को कसम दी कि कोई भी अपनी बहन की चिता पर अपना घर नहीं बसाए। दैनिक भास्कर की टीम ने राजस्थान में फैली इस कुप्रथा के बारे में पड़ताल की। सामने आया कि आटा-साटा एक ऐसी कुप्रथा है, जहां लड़कियों की दो नहीं तीन से चार परिवारों के बीच सौदेबाजी होती है। वह भी सिर्फ इसलिए ताकि उनका नकारा और उम्रदराज बेटे की शादी हो जाए।

उनके घर-परिवारों में दूसरे जो लड़के हैं, जिनकी किसी कारण से शादी नहीं हो पा रही है उनकी भी शादी हो जाए। इस प्रथा का एक दर्दनाक सत्य यह भी है कि बेटी होने से पहले ही उसका रिश्ता तय कर दिया जाता है। यानी तय हो जाता है कि अगर बेटी हुई तो उसकी शादी इस भाई के बदले करेंगे। कई बार ऐसा भी होता है कि बेटी नहीं होती तो रिश्तेदार की बेटी को दबाव पूर्वक दिलाया जाता है, इस शर्त पर कि उन्हें भी वे बेटी दिलाएंगे। इस तरह यह कुप्रथा परिवार में कभी खत्म ही नहीं होती है।

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लड़की के बदले लड़की का लेनदेन होता है इस प्रथा में
माता-पिता कई बार अपने लड़के की शादी न होने पर ये शर्त रखते हैं कि यदि आप हमें बेटी देंगे तो हम अपनी बेटी की शादी आपके बेटे से कर देंगे। सीधे-सीधे शब्दों में समझें तो लड़की के बदले लड़की लेना और देना एक आटा–साटा है। यह कुरीति राजस्थान के सभी क्षेत्रों में कई सालों से चली आ रही है। बाल विवाह के मामलों में अधिकतर आटा-साटा ही होता है।

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