यहां देखिये झोलाछाप डॉक्टरों का खेल:गांव से लेकर शहरों तक झोलाछाप डॉक्टर कर रहे कोरोना का इलाज, हर मरीज को दे रहे स्टेरॉयड; दो महीने में मकराना में हो चुकी हैं 300 मौतें

नागौर2 वर्ष पहले
लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे झोलाछाप।

नीम हकीम खतरा-ए-जान कहावत कोरोना काल में सटीक साबित हुई है। गांवों-कस्बों में सालों से बंगाली, बिहारी झोलाझाप व कंपाउंडर क्लिनिक चला रहे हैं। दवाओं के साथ वे स्टेराॅयड जरूर देते हैं जो बूस्ट का काम करता है। ये तुरंत आराम तो दिलाता है लेकिन घातक इतना है कि शरीर को खोखला भी करता है। कई लोगों में सामने आई ब्लैक फंगस महामारी स्टेराॅयड की ही देन मानी जा रही है।

भोले-भाले ग्रामीण व शहरी लोग कम रुपए में जल्दी ठीक होने का लालच देखकर उनके पास जाते हैं एवं बड़ी बीमारी साथ में ले आते हैं। सरकारी अस्पतालों में सेवाएं देने वाले कंपाउंडरों ने भी गांवों में बड़े अस्पताल खोल लिए हैं एवं बड़े फिजीशियन के माफिक प्रैक्टिस करते हुए लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।

इन झोलाछापों की हकीकत सामने लाने के लिए दैनिक भास्कर जिले के मकराना क्षेत्र में ग्राउंड रिपोर्ट के लिए पहुंचा। भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट में ऐसे किस्से भी सामने आए जिसमें सरकारी कंपाउंडर मरीजों को कोरोना से नहीं डरने का सुझाव देते हुए ध्यान भटकाने के लिए एंटी डिप्रेशन की दवाएं खिला रहे हैं। बीते दो महीने में मकराना उपखंड क्षेत्र में 300 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं, इनमें कोरोना व सामान्य मौतें दोनों शामिल हैं। मगर विभाग कोरोना से सिर्फ 5 मौतें ही मान रहा है।

बंगाली झोलाछाप चला रहा है क्लिनिक, 300 रु. में भगा रहा कोरोना

मकराना शहर के मीनारा मस्जिद के पास बंगाली शरीफुल आलम उर्फ साजिद आलम पुत्र मुजीब पिछले 15 साल से झोलाझाप क्लिनिक चला रहा है। बेखौफ कोरोना सिम्पटोमेटिक मरीजों को भी देख रहा है। मकराना में इन दिनों काफी असामान्य मौतें हुईं। जिसके बावजूद सर्दी, जुकाम व बुखार के मरीजों को मामूली मर्ज का हवाला देकर कहता है थोड़ी दवाओं की मात्रा ज्यादा लेनी पड़ेगी, ठीक हो जाओगे।

एंटीबायोटिक्स के साथ स्टेरायड देता है। वहीं जल्दी असर के लिए हर दूसरे मरीज के इंजेक्शन जरूर लगाता है। मरीज को कहता है निजी या सरकारी अस्पताल में जाओगे तो खून की जांचें व सीटी करवानी पड़ेगी। तीन चार हजार का खर्च होगा। मैं तो बीमार को देखकर ही दवाओं सहित तीन सौ-चार सौ में पूरा इलाज कर देता हूं। ज्यादातर गरीब व अशिक्षित वर्ग के लोग इनके चक्कर में आते हैं। अधिकारी जानकर भी अनजान बने हुए हैं।

4 हजार की आबादी वाले भदलिया में सरकारी कंपाउंडर चला रहा अवैध क्लिनिक

मौलासर पंचायत समिति के 4 हजार आबादी वाले भदलिया गांव व आसपास क्षेत्र में पिछले 23 दिनों में 16 मौतें हुई हैं, जिनमें से 6 कोविड पॉजिटिव भी थे। अचानक मौतें बढ़ने से लोग डरे हुए हैं। गांव में अभी 30 एक्टिव कोरोना पॉजिटिव रोगी हैं

भदलिया में सरकारी चिकित्सा सेवाओं की माकूल स्थिति नहीं होने के कारण कुचामन के सरकारी अस्पताल में कार्यरत कंपाउंडर शिंभूराम चौधरी ने वहां एक जर्जर भवन में क्लिनिक खोल रखा है, और सुबह-शाम गांव के मरीजों को देखता है।

कोरोना संदिग्ध को सामान्य जुकाम, बुखार बताकर उपचार देता है व मरीजों को एंटी डिप्रेशन की प्रतिबंधित दवाएं देने से भी नहीं चूकता। ग्रामीणों की अशिक्षा का फायदा उठाते हुए उन्हें ताकत देने के नाम पर भर्ती कर ड्रिप भी चढ़ाता है।

जल्दी ठीक करने के लिए स्टेरायड भी देता है। मरीजों से कहता है- कुचामन PMO में कोरोना के ही मरीजों का उपचार करता हूं, पता है क्या दवा देनी है और क्या नहीं। डिप्रेशन मत रखो। जांच करवाकर अपनी टेंशन क्यों बढ़ाते हो। सरकारी कंपाउण्डर क्लिनिक नहीं चला सकता फिर भी चल रहा है।

इनपुट : प्रकाश प्रजापत (मकराना)

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