आटा-साटा के कारण बेटियों को मिलती जिंदा मौत:नाकारा भाई का घर बस जाए, इसलिए 21 साल की लड़की की करा देते हैं अधेड़ से शादी; वो घुटती है, जब बर्दाश्त नहीं होता तो दे देती है जान

नागौर4 महीने पहलेलेखक: मनीष व्यास
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राजस्थान के नागौर जिले में 21 साल की ग्रेजुएट सुमन ने सुसाइड कर लिया था। उसकी मौत के बाद एक सुसाइड नोट सामने आया, जिसमें उसने अपनी मौत का जिम्मेदार समाज और आटा-साटा की कुप्रथा को बताया। साथ ही उसने सभी भाइयों को कसम दी कि कोई भी अपनी बहन की चिता पर अपना घर नहीं बसाए। दैनिक भास्कर की टीम ने राजस्थान में फैली इस कुप्रथा के बारे में पड़ताल की। सामने आया कि आटा-साटा एक ऐसी कुप्रथा है, जहां लड़कियों की दो नहीं तीन से चार परिवारों के बीच सौदेबाजी होती है। वह भी सिर्फ इसलिए ताकि उनका नकारा और उम्रदराज बेटे की शादी हो जाए और उनके घर-परिवारों में दूसरे जो लड़के हैं, जिनकी किसी कारण से शादी नहीं हो पा रही है उनकी भी शादी हो जाए। वैसे राजस्थान के ज्यादातर गांवों में इस कुप्रथा का चलन है। ऐसे में पढ़ी-लिखी लड़कियों की जिंदगी भी खराब हो रही है। इस प्रथा का एक दर्दनाक सत्य यह भी है कि बेटी होने से पहले ही उसका रिश्ता तय कर दिया जाता है। यानी तय हो जाता है कि अगर बेटी हुई तो उसकी शादी इस भाई के बदले करेंगे। कई बार ऐसा भी होता है कि बेटी नहीं होती तो रिश्तेदार की बेटी को दबाव पूर्वक दिलाया जाता है, इस शर्त पर कि उन्हें भी वे बेटी दिलाएंगे। इस तरह यह कुप्रथा परिवार में कभी खत्म ही नहीं होती।

लड़की के बदले लड़की का लेनदेन होता है इस प्रथा में

माता-पिता कई बार अपने लड़के की शादी न होने पर ये शर्त रखते हैं कि यदि आप हमें बेटी देंगे तो हम अपनी बेटी की शादी आपके बेटे से कर देंगे। सीधे-सीधे शब्दों में समझें तो लड़की के बदले लड़की लेना और देना एक आटा–साटा है। यह कुरीति राजस्थान के सभी क्षेत्रों में कई सालों से चली आ रही है। बाल विवाह के मामलों में अधिकतर आटा-साटा ही होता है।

आटा-साटा प्रथा में कैसे होते हैं रिश्ते?

आटा-साटा प्रथा में शादी होने के बाद रिश्ते भी कई तरह से होते हैं। कई बार सिर्फ दो परिवारों के बीच लड़की के बदले लड़की लेने-देने की बात होती है तो कई बार इसमें एक लड़की के बदले लड़की के घर सहित रिश्तेदारों तक की शादी हो जाती है। यानी तीन से चार रिश्ते। इनमें कई बार लड़के और लड़की के बीच उम्र को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है और 21 साल की लड़की की शादी 40 साल के व्यक्ति तक हो जाती है।

लड़के का घर बसाने के लिए लड़कियों की शादी तक रोक देते हैं

कई मामलों में घर में बहन बड़ी होती है और भाई छोटा होता है। दोनों में 5-7 साल का अंतर होता है। ऐसे में घरवाले बड़ी लड़की की तब तक शादी नहीं करते हैं, जब तक उनका छोटा बेटा शादी के लायक न हो जाए। जब वो शादी लायक हो जाता है तो बड़ी बेटी के आटा-साटा के बदले में उसकी शादी की जाती है। ऐसे में बेटियों की उम्र निकलने के बाद उम्रदराज व्यक्ति से जबरदस्ती शादी कर दी जाती है।

यह चार मामले, या तो विवाद या फिर जान जाती है

नागौर की सुमन का केस आप पढ़ रहे हैं, लेकिन कुछ मामले बता रहे हैं, जो आपको इस प्रथा का दर्द बताएंगे।

केस:1

  • 14 दिन पहले जोधपुर के सालावास में दो परिवारों में आटा-साटा प्रथा के तहत हुई शादी के बाद विवाद हो जाता है। विवाद में एक युवती के अपहरण और मारपीट की बात सामने आई। मामले की जांच की तो पता चला पीड़ित की बहन उसी के ससुराल में शादी हुई थी। पीहर आने-जाने की बात को लेकर विवाद हुआ था।

केस:2

  • बाड़मेर जिले का अर्जियाना गांव में एक परिवार का लड़का उम्रदराज था और जोधपुर जिले के बावड़ी गांव के परिवार में एक छोटा बेटा और शादी के लायक लड़की होने से बावड़ी गांव वालों से आटा-साटा कर यह तय कर लिया। उम्रदराज लड़के का उनकी बेटी से शादी करवा दें बदले में आटा-साटा के तहत जब बावड़ी गांव के परिवार का लड़का शादी के लायक होगा तब वो अपने घर की बेटी से उसकी शादी कर देंगे। दो साल पहले लड़का शादी के लायक हुआ तो घर वालों ने अपनी बेटी की उस लड़के से शादी का दबाव बनाया। इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने जांच की तो आटा-साटा की यह कहानी सामने आई।

केस-3

  • जयपुर में मालवीय नगर में एक आपसी विवाद का केस हाल में दर्ज हुआ। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि 11 साल पहले शादी हो गई थी। गृहस्थी सकुशल चल रही थी। ऐसे में विवाद का कारण क्या? जबकि परिवार आर्थिक रूप से मजबूत है। ऐसे में आटा-साटा प्रथा की कहानी ही निकल कर आई, जिसमें सामने आया कि जब युवक की शादी हुई थी तब परिवार वालों ने ससुराल वालों से लिखित एग्रीमेंट कर लिया कि युवती के चाचा के बेटे की शादी के लिए लड़की दिलाएंगे। उस वक्त लड़का छोटा था, ऐसे में एग्रीमेंट लिखित हुआ। लड़का गलत लाइन पर है और कुछ काम नहीं करता। उधर, युवक की बहन है, जो युवक की हम उम्र है और सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। ऐसे में लड़की ने मना कर दिया कि वह गांव में ऐसे लड़के से शादी नहीं करेगी। ऐसे में समाज एग्रीमेंट का दबाब बनाने लगा तो उधर घर में झगड़े बढ़ गए। पुलिस ने जैसे-तैसे घर का मामला कह कर निपटाया। इस केस में दो चीजें निकल कर आई कि परिवार ने असली कहानी को कभी कागजों में नहीं लाया। दूसरा ये कि आटा-साटा से घर में जो क्लेश है, वह सामने आ गया।

केस-4

  • बाड़मेर जिले के सिवाना थाना के मायलावास गांव में एक लड़की का आटा-साटा कर दिया गया था। इसी के तहत लड़की के भाई के लिए दुल्हन लाई गई थी। इसके बाद लड़की ने दूल्हे की उम्र ज्यादा होने का हवाला देकर शादी से इंकार कर दिया तो उसे और उसके परिजनों को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया गया। नहीं मानी तो सामाजिक पंचो ने मिलकर दबाव बनाया आखिरकार थक हारकर लड़की पिछले साल बाड़मेर कलेक्टर और एसपी के समक्ष पेश हुई। इस बीच लड़की की भाभी भी वापस अपने पीहर लौट गई। इस मामले में अब सामाजिक पंचों ने आटा-साटा में ब्याह नहीं करने के चलते लड़की और उसके परिजनों का हुक्का-पानी बंद कर रखा है।

बेटियों की घटती संख्या बड़ा कारण

लड़कों के बेरोजगारी और कम पढ़ाई के चलते राजस्थान में प्रचलित आटा-साटा शादियों का मुख्य कारण लड़कियों की कमी है। जिन समाज में शादी के लिए लड़कियां नहीं मिलती है, वहां आम तौर पर लड़की के बदले लड़की की शर्त रखी जाती है। कई मामलों में देखा गया है कि लड़का कम पढ़ा लिखा होता है या बेरोजगार होता है तो उसे दुल्हन नहीं मिल पाती है। ऐसे में वो अपने घर में अपनी बहन के बदले में आटा-साटा कर शादी करते हैं। बाल विवाह के मामलों में भी बच्चों के जन्म लेते ही उनका आटा-साटा कर लिया जाता है।

रेखा शर्मा, अध्यक्ष राष्ट्रीय महिला आयोग।
रेखा शर्मा, अध्यक्ष राष्ट्रीय महिला आयोग।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा का कहना है कि 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारा समाज अभी भी इस तरह की प्रतिगामी प्रथाओं का पालन कर रहा है। महिलाओं को अपना जीवन साथी चुनने की स्वतंत्रता है और हम अपनी और बेटियों को नहीं खो सकते हैं। राज्य सरकार को इस प्रथा को रोकने के लिए उपाय करने चाहिए।'

सुमन शर्मा, पूर्व अध्यक्ष राजस्थान महिला आयोग
सुमन शर्मा, पूर्व अध्यक्ष राजस्थान महिला आयोग

राजस्थान महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष सुमन शर्मा का कहना है कि 'आटा-साटा' प्रथा बहुत ही कष्टदायक और दुखदायी है, विशेषकर उन महिलाओं के लिए जिनका कुरीतियों के नाम पर पूरा जीवन ही कुर्बान कर दिया गया हो। जब मैं आयोग की अध्यक्ष थी तो मेरे पास आटा-साटा से जुडी 4 बड़ी घटनाएं आई थीं, जो इतनी पीड़ादायक थी कि बेवजह दो घरों की कई जिंदगियां बर्बाद हो रही थीं। इसमें कुछ लोगों को हमने सजा भी दिलाई थी पर सीधे तौर पर इसमें कोई कानून नहीं होने से कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा सकती थी। आजादी के बाद से महिलाओं के कल्याण के लिए कई सुधार हुए और कानूनी प्रावधान भी लाए गए पर दुर्भाग्य है कि अब तक आटा-साटा पर रोकथाम के लिए कोई कानून या नियम कायदे ही नहीं है। जबकि राजस्थान के कई इलाकों में ये आटा-साटा बहुतायत से किया जा रहा है। सरकार को चाहिए कि इस कुप्रथा पर प्रभावी रोक लगाने के लिए जल्द से जल्द कानून बनाया जाए।

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