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रामायण भाग-3:रावण ने सीता का हरण किया, राम ने शबरी के जूठे बेर खाए

नागौरएक महीने पहले
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प्रेम भगवान राम ने प्रेम में शबरी के जूठे बेर भी खाए।

तुलसीदासकृत रामचरित मानस के तीसरे अध्याय अरण्य कांड में भगवान राम, मां सीता और लक्ष्मण अत्रि मुनि के आश्रम में आते हैं। मां अनसुईया मां सीता को पतिव्रता धर्म निभाने की सीख देती हैं। इस अध्याय में भगवान राम ने अनेक राक्षसों का वध किया और संतों की पीड़ा हरी। इसी अध्याय में शूर्पणखा और मारीच प्रसंग के बाद मां सीता के हरण, जटायु का प्रसंग आता है। इसके बाद रामजी मां शबरी की कुटिया जाते हैं और नवधा भक्ति का उपदेश देते हैं। अरण्यकांड में 46 छंद, दोहे और सोरठ समाहित हैं।

आज अरण्यकांड की संक्षिप्त जानकारी एवं संबंधित चित्र।

सीख सीता को सीख देतीं मां अनसुईया

वन में मां अनसुईया ने सीता मां को पतिव्रता धर्म निभाने की सीख दी। कहा, सुख-दुख में पति का साथ देना। मां सीता ने अनुसुईया के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद भी लिया।

सीताहरण बचाने को जटायु ने रावण से युद्ध भी किया

रावण जब मां सीता का हरण करके आकाश मार्ग से लंका ले जा रहा था तो जटायु ने रोकने के लिए रावण से युद्ध किया। जटायु का सौभाग्य देखिए, राम की गोद में प्राण त्यागे थे।

प्रेम भगवान राम ने प्रेम में शबरी के जूठे बेर भी खाए।

तुलसीदास जी ने लिखा- भगवान प्रेम के वशीभूत हैं। इसी प्रेम में शबरी के जूठे बेर भी खाए। इसके बाद मां शबरी को नवधा भक्ति का उपदेश भी दिया। शबरी ने राम को पा लिया। ​​​​​​​

शबरी ने प्रेम से भगवान राम को भी पा लिया

अरण्यकांड में भगवान राम शबरी की कुटिया में गए। बताते हैं कि शबरी को उनके गुरु ने कहा था, आप भक्ति करना, भगवान आपसे मिलने आपके पास आएंगे। शबरी सालों-साल कुटिया के झाड़ू लगा कांटे चुनती थी, यही सोचकर की मेरे राम आएंगे तो उनके चुभ न जाएं। शबरी के सरल प्रेम में भगवान ने शबरी के जूठे बेर भी खाए थे। जो संत शबरी के ऐसा करने पर हंसते थे, भगवान उन्हीं से शबरी का पता पूछकर शबरी की कुटिया पहुंचे थे। यानी भगवान प्रेम के भूखे हैं, वे जात-पांत नहीं जानते। भक्ति का महत्व भी समझाया। ​​​​​​​

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