बेकाबू हो रहे हालात:गांवों से रेफर संक्रमित 3 घंटे तड़पते रहे फिर भी नहीं मिला बेड, डीडवाना के मरीज को मना ही करना पड़ा

नागौर6 महीने पहले
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नागौर। जेएलएन में एम्बुलेंस में तड़पता मरीज। - Dainik Bhaskar
नागौर। जेएलएन में एम्बुलेंस में तड़पता मरीज।
  • स्थिति ऐसी है कि जेएलएन से कोई स्वस्थ्य होकर घर जाता है तभी मिलता है दूसरे को बेड

नए वेरिएंट के चलते जिले में कोरोना महामारी भयानक रुप में है। हालात इतने बेकाबू हो गए हैं कि संक्रमितों को हॉस्पिटल में बेड तक नहीं मिल रहे। मरीजों को घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। इसमें भी जरुरी नहीं कि बैड मिल जाए। जबकि ऑक्सीजन युक्त बेड की तो संभावना व्यक्त करना भी बेमानी है।

क्योंकि ऑक्सीजन के जेएलएन में सीमित बेड हैं जो मरीज के स्वस्थ होकर घर जाने के बाद ही खाली होते हैं। कुछ ऐसा ही वाकया बुधवार शाम एवं रात को जवाहर लाल नेहरू हॉस्पिटल में दिखा। मेड़ता एवं जायल से रेफर कोरोना संक्रमितों को जब 108 एम्बुलेंस यहां जवाहर लाल नेहरू हॉस्पिटल लेकर पहुंची तो यहां उनको ढाई घंटे तक बेड ही नहीं मिला।

इसके चलते वे एम्बुलेंस में ही तड़पते रहे। बड़ी मिन्नतों एवं अधिकारियों से सम्पर्क करने के बाद दोनों कोरोना संक्रमितों को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया। इस तरह उनको आपातकालीन सेवा का बेड तो मिल गया, लेकिन इसमें उनको काफी वेदना एवं परेशानी का सामना करना पड़ा। उधर, डीडवाना के एक मरीज को तो बेड के लिए एंबुलेंस संचालकों को सीधा मना ही करना पड़ गया कि ऑक्सीजन सपोर्ट बेड खाली नहीं है।

बेड नहीं हैं इसलिए देरी लग रही है
बेड खाली है नहीं इसलिए जब एम्बुलेंस मरीज को लेकर आती है तो उसमें काफी समय लग रहा है। मरीज एम्बुलेंस में ही काफी देर तक पड़े रहते हैं। -राजेश पाटनी, डिस्ट्रिक कोऑर्डिनेटर, एम्बुुलेंस।

अब सीएचसी स्तर पर ही मरीजों को रोकने के प्रयास
कोरोना संक्रमित मरीजों को सीएचसी स्तर पर ही रोकने के प्रयास कर रहे हैं। वहीं पर ऑक्सीजन युक्त बेड लगाने के भी प्रयास कर रहे हैं। ताकि मरीज परेशान नहीं हो। -डाॅ. मेहराम महिया, सीएमएचओ, नागौर

दो मरीजों को बेड नहीं मिला तो तीसरे को मना करना पड़ा
सूत्रों के अनुसार जायल एवं मेड़ता के कोरोना संक्रमितों को जब बेड नहीं मिला तो 108 एम्बुलेंस के कार्मिकों को डीडवाना के कोरोना पेशेंट को तो स्पष्ट मना ही करना पड़ गया। ऐसे में रेफर शुदा मरीजों को यहां जिला मुख्यालय पर बैड नहीं मिलने से कोरोना संक्रमितों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारों के अनुसार मरीजों को भर्ती नहीं करने से अब एम्बुलेंस कार्मिकों ने ही मरीजों को इनकार करना शुरू कर दिया है। ताकि मरीजों को किसी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़े। सूत्रों के अनुसार मेड़ता से रेफर मरीज को 3 घंटे, जायल के मरीज को एक घंटा इंतजार करना पड़ा था।

जेएलएन के वर्तमान हालात, एक नजर में
वर्तमान में 121 बेड पर ऑक्सीजन, 59 बेड सामान्य, दस आईसीयू के तथा दस वेंंटिलेटर हैं। जो पूरी तरह भरे हुए हैं। इसके अलावा हर दिन जिले में 300 से अधिक कोरोना पॉजिटिव आ रहे हैं। ऐसे में मरीज जेएलएन से रेफर होता है या वह स्वस्थ होकर घर जाता है तो ही जेएलएन में बेड खाली होते हैं। इससे पहले अगर कोई मरीज यहां पहंुचता है तो उसको लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। इसके अलावा दूसरे हॉस्पिटल पर भी निर्भर रहना पड़ सकता है।

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